फ़ारुक़ नए सिनेमा की पहली पीढ़ी के अभिनेता थे: श्याम बेनेगल

फ़ारूक़ शेख

हिंदी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता फ़ारूक़ शेख का दिल का दौरा पड़ने से निधन होने के बाद बॉलीवुड में उनको एक अच्छे इंसान के तौर पर याद किया जा रहा है.

उन्हें समानांतर सिनेमा के दौर का अहम अभिनेता माना जाता है. 65 साल के फ़ारूक़ शेख पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने हिंदी फ़िल्मों के जाने माने निर्देशक श्याम बेनेगल से फ़ारुक़ शेख के व्यक्तित्व के बारे में बात की.

प्रगतिशील थिएटर

श्याम बेनेगल ने फ़ारूक़ शेख़ को याद करते हुए कहा, "वह हिंदी में नए सिनेमा की शुरुआत करने वाली पहली पीढ़ी के अभिनेता थे. गर्म हवा इसका अच्छा उदाहरण है. इसके बाद भी वह थिएटर में काम करते रहे. ख़ास बात यह है कि वह प्रगतिशील थिएटर से ही ज़्यादातर जुड़े रहे."

उन्होंने कहा," फ़ारुक़ शेख़ बेहतरीन अभिनेता और कलाकार थे. साहित्य में भी उनका काफ़ी योगदान रहा है."

Image caption श्याम बेनेगल ने फ़ारूक़ शेख के बारे में कुछ ऐसी बातें भी बताईं जो बहुत कम लोग जानते हैं.

श्याम बेनेगल ने उनके बारे में कुछ ऐसी बातें भी बताईं जो बहुत कम लोग जानते हैं.

उन्होंने बताया, "कम ही लोग जानते हैं कि वो बहुत अच्छे अनुवादक थे. अंग्रेज़ी से हिंदी और उर्दू में भी उन्होंने काफ़ी अनुवाद किया है."

परिपक्व व्यक्तित्व

उन्होंने कहा, "वो काफ़ी पढ़े लिखे थे और इसलिए उनका व्यक्तित्व भी काफ़ी परिपक्व था. उनमें बहुत से गुण थे लेकिन वो हमेशा लाइम लाइट से दूर रहे. वो बहुत ही शांत थे. "

बेनेगल ने कहा, "वह एक सभ्य और सुसंकृत व्यक्ति थे. मैं उन्हें इसी तरह याद रखूँगा."

श्याम बेनेगल ने फ़ारुक़ शेख के साथ हुई अपनी आख़िरी मुलाक़ात को याद करते हुए कहा, "आख़िरी बार इस साल फ़रवरी की शुरुआत में दिल्ली के एक समारोह में हमारी मुलाक़ात हुई थी. वहाँ एक दो फ़िल्में दिखाई गईं थीं. उनकी भी एक फ़िल्म दिखाई गई थी और मेरी भी. मैं उन्हें हमेशा एक अच्छे इंसान के तौर पर याद रखूँगा."

सामाजिक मुद्दों पर मुखर

बेनेगल ने आगे कहा, "हमें कभी साथ काम करने का मौक़ा मिला नहीं या कहें कि कभी साथ में काम करने का कोई विषय नहीं मिला."

समाज के प्रति सकारात्मक सोच रखने वाले फ़ारुक़ शेख के बारे में श्याम बेनेगल ने कहा, " पिछले कुछ समय से वह सामाजिक मुद्दों को लेकर काफ़ी मुखर थे. उन्होंने भारत में मुस्लिमों की स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में भी काम किया."

उन्होंने बताया, "साल में तीन चार बार मिलना हो ही जाता था. हालाकि मैं फ़ारुक़ शेख़ को निजी तौर पर जानता नहीं था."

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