अखिलेश से क्यों ख़फा हैं मुलायम सिंह?

मुलायम सिंह यादव

उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर न सिर्फ़ विपक्ष की चौतरफ़ा आलोचनाओं से घिरी है बल्कि खुद पार्टी के नेता भी सवाल उठा रहे हैं.

पार्टी के सांसद और मुलायम सिंह यादव के भाई रामगोपाल यादव ने अपने पैतृक गांव सैफई में राज्य में बढ़ती गुंडागर्दी को लेकर चिंता व्यक्त की.

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के कुछ मंत्री-विधायक-नेताओं की गुंडागर्दी की वजह से सरकार की भारी बदनामी हो रही है.

21 दिसंबर को जौनपुर ज़िले में उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव की सरकार में एक कैबिनेट मंत्री के पुत्र ने समाजवादी पार्टी के ही कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की.

इस घटना के दो दिन बाद, 23 दिसंबर को, पार्टी के लोगों को सम्बोधित करते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा कि "समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता कई स्थानों पर गुंडागर्दी करते हैं. यदि किसी मंत्री के परिवार का एक व्यक्ति गुंडागर्दी करता है तो हमारी छवि करती है. यदि मुझे गुंडागर्दी की किसी घटना का पता चला तो उसमें जिसका हाथ होगा मैं उसे पार्टी से निकाल दूंगा."

पार्टी की छवि को सुधारने के उद्देश्य से 25 दिसंबर को जौनपुर में पार्टी के कार्यकर्ता गिरफ़्तार तो कर लिए गए लेकिन आश्चर्य है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जौनपुर की घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की.

'नाराज़' मुलायम

Image caption मुलायम ने अपने कार्यकर्ताओं को शालीन बनने को कहा है.

यह पहला अवसर नहीं है जब प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ताओं की आपराधिक गतिविधियों और प्रशासनिक ढिलाई पर मुलायम को बोलना पड़ा है और अखिलेश खामोश रहे हैं.

कुछ मौकों पर तो मुलायम ने अपने पुत्र अखिलेश को जनता के सामने डाँट लगाई है.

23 मार्च को लखनऊ में एक भाषण में अखिलेश को सख़्त प्रशासक बनने की सलाह दी. उन्होंने कहा, "अखिलेश, सरकार लचीलेपन से नहीं बल्कि सख़्ती से चलती है."

मुलायम ने यह बात पार्टी की छवि ख़राब करने वाले मंत्रियों और अफ़सरों से नाराज़ हो कर कही.

इसी साल 13 अक्टूबर को अखिलेश यादव, शिवपाल यादव एवं अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की उपस्थिति में मुलायम ने कार्यकर्ताओं से कहा "जो लोग में सत्ता में हैं मैं उन पर पैनी नज़र रखे हुए हूं. उनको अपना रवैया बदलना चाहिए, नहीं तो मेरे लिए मुश्किल होगी. यदि आप अपने मंत्री, विधायक या सांसद से नाराज़ हैं तो उसका बदला मुझसे मत लीजिए. क्या आप मुझे अकेले संसद भेजेंगे?"

मंत्रियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि सब यहाँ मौजूद हैं और स्थिति को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री इनसे बात करेंगे.

चेतावनी

उन्होंने मंत्रियों और अखिलेश को चेतावनी देते हुए कहा कि वे जनता को अनपढ़ ना समझें और ऐसा कुछ ना करें जो स्वान्तः सुखाय हो.

इससे पहले एक अगस्त 2012 को मुलायम ने अपने दल के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पार्टी के विधायकों, मंत्रियों और सांसदों के किए की सज़ा उन्हें ना दें. अखिलेश सरकार के छह माह भी नहीं हुए थे जब 'नेताजी' ने यह बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर रही है.

मुलायम की टिप्पणी के जवाब में अखिलेश ने कहा कि वो इस आलोचना को स्वीकार करते हैं. उन्होंने कहा, "वो हमारे नेता हैं, हम उनकी सलाह मानने की कोशिश करेंगे और जो वो कहते हैं करेंगे."

लचर क़ानून-व्यवस्था के लिए समाजवादी पार्टी की सरकार उस समय भी बदनाम थी जब मुलायम स्वयं मुख्यमंत्री थे और यही कारण था कि 2007 में मायावती ने पूर्ण बहुमत से चुनाव जीता था.

आशा की जा रही थी की एक युवा नेता के रूप में अखिलेश पार्टी की छवि को सुधारने में सफल होंगे. किन्तु उनके शपथ ग्रहण समारोह से पार्टी कार्यकताओं ने जो उद्दंडता दिखलानी शुरू की वह आज भी जारी है.

चिंता का विषय

मुलायम की 23 दिसंबर को दी गई चेतावनी के बाद एक विधायक के समर्थक बिना नंबर प्लेट की लाल बत्ती लगी गाड़ियों में पकडे गए. यही नहीं, उन्होंने एक वरिष्ठ पुलिस अफसर को धमकी भी दी.

बढ़ती हुई अव्यवस्था मुलायम के लिए गम्भीर चिंता बनी हुई है. वो समझ चुके हैं कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता, विधायक और मंत्री सभी ने मिलकर अखिलेश सरकार की छवि इतनी ख़राब कर दी है कि लोकसभा चुनाव में अब ज़्यादा सीट लाना एक दुष्कर कार्य हो गया है.

इसीलिए अपने 23 दिसंबर के भाषण में अपने मन की बात युवा वर्ग के सामने खुल कर रखते हुए मुलायम ने कहा, "अखिलेश को तो सीएम बनवा दिया अब हमें कब आगे बढ़ाओगे? हम कोई साधू-संन्यासी नहीं हैं. हमारे दिल में भट्ठी धधक रही है."

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