पश्चिम बंगाल पर भी 'आप' की नज़र

कोलकाता, आप

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद उसका हौसला बढ़ा है. अरविंद केजरीवाल जहां पढ़े थे उस आईआईटी खड़गपुर के छात्रों में आप को लेकर जिज्ञासा है तो नए साल में अरविंद केजरीवाल भी कोलकाता में एक रैली को संबोधित कर सकते हैं.

सदस्यता अभियान

हालांकि पश्चिम बंगाल में फ़िलहाल आम आदमी पार्टी की शाखा का औपचारिक गठन नहीं हुआ है. लेकिन उसके समर्थकों ने यहां एक तदर्थ समिति का गठन कर लिया है. आप के स्वयंसेवक विकास व्यास कहते हैं, "हमने कोलकाता में चेतना यात्रा आयोजित की है और अब सदस्यता अभियान चला रहे हैं."

(आम आदमी पार्टी से कश्मीर में बदलाव)

पार्टी फेसबुक समेत तमाम सोशल नेटवर्किंग साइटों और एसएमएस के ज़रिए आम लोगों को पार्टी की सदस्यता लेने के लिए प्रेरित कर रही है. आप समर्थकों का दावा है कि दिल्ली में आप सरकार के स्थिर होते ही राज्य में पार्टी की शाखा का औपचारिक एलान कर दिया जाएगा.

अगले साल होने वाले आम चुनावों में यहां आम आदमी पार्टी की सभी 42 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने की भी योजना है.

केजरीवाल की रैली

आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नए साल की शुरुआत में कोलकाता में पार्टी की ओर से आयोजित एक रैली में शिरकत कर सकते हैं. उस रैली की अनुमति के लिए पुलिस को भेजे पत्र में पार्टी ने रैली में ले जाने वाली तमाम चीजों का ब्यौरा दिया है.

उनमें दो लैपटॉप के अलावा एक प्रिंटर, इंटरनेट कनेक्शन के लिए जरूरी उपकरण, टेबल, कुर्सी और स्टेशनरी शामिल है.

व्यास कहते हैं, "कोई राजनीतिक पार्टी इन चीजों का ब्योरा नहीं देती. लेकिन हमने तमाम ब्योरा दिया है. इसकी वजह यह है कि हम शुरू से ही पारदर्शिता क़ायम रखना चाहते हैं." पार्टी ने अपनी रैली के लिए रविवार का दिन चुना है ताकि आम लोगों को कोई ख़ास परेशानी नहीं हो.

आईआईटी में उत्साह

केजरीवाल ने जिस आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी वहां भी आप की सदस्यता का अभियान जोरों पर है. इस आईआईटी में पहले राजनीतिक बहस की इजाज़त नहीं थी. लेकिन अब बदले हालात में छात्रों को राजनीतिक चर्चा में कोई डर नहीं लगता है.

(केजरीवाल के गाँव में उमंग और उत्साह)

एक छात्र अनिमेष कहते हैं, "केजरीवाल ने दिखा दिया है कि मन में लगन हो तो कोई काम असंभव नहीं है. हम भी उनके इस मिशन में सहयोग देना चाहते है."

केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद आईआईटी परिसर में दो दिनों तक जमकर पार्टी मनाई गई. आप की आईआईटी शाखा का दावा है कि राज्य में सिर्फ उसी शाखा को पार्टी प्रमुख की ओर से मान्यता मिली है.

कोलकाता में भ्रामक स्थिति

हालांकि आप की कामयाबी के बाद कोलकाता में सामने आने वाली आप की शाखाओं पर सवालिया निशान लगने लगे हैं. कोलकाता में कम से कम तीन शाखाओं ने खुद के मान्यता प्राप्त होने का दावा करते हुए सदस्यता अभियान शुरू कर दिया है.

कोलकाता में आप की प्रवक्ता होने का दावा करने वाली संगीता दास कहती हैं, "आप का आंदोलन सिद्धातों पर आधारित है. लोग प्रदेश शाखा की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करने के लिए स्वतंत्र हैं."

संगीता मानती हैं कि राज्य में कई लोग आप का नेता होने का दावा कर रहे हैं. इससे भ्रामक स्थिति पैदा हो गई है. उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को इस बारे में बता दिया है.

(आम आदमी पार्टी की क्या है चुनौतियां?)

आईआईटी खड़गपुर के छात्र अटल आशुतोष कहते हैं, "एक साथ इतने लोगों का सामने आना आश्चर्यजनक है. कुछ निहित स्वार्थी तत्व भी इस मुहिम में शामिल हो गए हैं. सिर्फ टोपी पहनने से कोई आप का सदस्य नहीं बन सकता."

'कांग्रेस सीखे सबक़़'

कोलकाता पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर कहते हैं, "आम आदमी पार्टी ने जिस तरह अपनी चुनावी रणनीति से कामयाबी हासिल की है उससे दूसरे राजनीतिक दल सबक़ ले सकते हैं."

अय्यर कहते हैं कि पार्टी ने जिस तरीके से अपनी चुनावी रणनीति बनाई और उसे जिस तरह से अंजाम तक पहुंचाया, वह दूसरे राजनीतिक दलों के लिए एक सबक़ है.

आप के बढ़ते असर से पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगी हैं. पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तमाम नेताओं से सार्वजनिक तौर पर आप के बारे में कोई चर्चा नहीं करने को कहा है.

तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, "पश्चिम बंगाल में आप का कोई ख़ास असर नहीं होगा. उससे पार्टी को कोई ख़तरा नहीं है."

लेकिन जानकारों का कहना है कि ममता ने आने वाले लोकसभा चुनावों में आप के संभावित असर से निपटने के लिए भावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य कहते हैं, "आप अगले आम चुनाव में बंगाल की राजनीति पर गहरा असर डाल सकती है."

संगीता दास कहती हैं, "राज्य के लोग मुख्यधारा की पार्टियों से परेशान हो चुके हैं. इसलिए अगले चुनाव में ज़्यादातर लोग आप के उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे."

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