केजरीवाल सरकार को विश्वास मत हासिल

  • 2 जनवरी 2014
अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जनलोकपाल बिल उनकी सरकार के सामने सबसे बड़ा एजेंडा है. उन्होंने कहा कि वो अगले 15-20 दिनों के अंदर लोकपाल बिल लाने की कोशिश करेंगे.

सदन में विश्वास मत हासिल करने के बाद विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं.

इससे पहले सदन में विश्वास मत के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को बख़्शा नहीं जाएगा. केजरीवाल के अनुसार उनकी लड़ाई किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष से नहीं है.

उन्होंने कहा कि 65 साल में इस देश के आम आदमी को रोटी, कपड़ा, बिजली-पानी जैसी मामूली चीज़े नहीं मिल सकीं हैं.

केजरीवाल के अनुसार इसके लिए राजनीतिक भ्रष्टाचार ज़िम्मेदार है.

उन्होंने कहा कि देश के नेताओं ने आम आदमी को ललकारा और चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी और देश के नेताओं ने शायद अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर दी.

केजरीवाल ने सदन के सामने 17 मुद्दे रखे और सदन से उनपर समर्थन मांगा.

उन्होंने कहा कि सबसे ज़रूरी ये है कि इस देश से वीआईपी कल्चर ख़त्म होना चाहिए.

केजरीवाल ने कहा कि इतना सख़्त क़ानून होना चाहिए कि भ्रष्टाचारियों की रूह कांप जाए. इसके लिए उन्होंने एक मज़बूत लोकपाल बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

इसके अलावा उन्होंने सिटीज़न चार्टर्स, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा, बिजली और पानी को आम लोगों तक पहुंचाने, झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वालों की मजबूरी का ज़िक्र किया.

अंत में मतदान के समय 37 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि 32 विधायकों ने विरोध में मतदान किए.

बीजेपी ने विश्वास प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि आप, कांग्रेस, जनता दल-यू और एक निर्दलीय विधायक ने केजरीवाल सरकार के पक्ष में वोट दिए.

इससे पहले केजरीवाल सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव पर कांग्रेस की तरफ़ से बहस की शुरूआत गांधी नगर से पार्टी के विधायक और प्रदेश के नए अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि दिल्ली के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर पार्टी ने आम आदमी पार्टी को समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

लवली ने कहा कि केजरीवाल सरकार जब तक दिल्ली के लोगों के हित में काम करती रहेगी, तब तक कांग्रेस उनको समर्थन देती रहेगी. उन्होंने कहा कि ज़रूरत पड़ी तो पांच साल तक समर्थन जारी रहेगा.

लवली ने प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगारू लक्ष्मण और नितिन गडकरी की पार्टी के लोग भ्रष्टाचार की बात करें, ये अच्छा नहीं लगता.

लवली ने कहा कि कांग्रेस ने कुछ ग़लतियां की जिसका वो ख़मियाज़ा भुगत रही है लेकिन अगर भ्रष्टाचार तो एमसीडी में भी है जो भाजपा के नियंत्रण में है.

बीजेपी पर चुटकी लेते हुए कहा कि ऊपर वाले ने जो दर्द दिया है उसे सहते रहिए.

केजरीवाल की आलोचना

लवली ने पानी और बिजली के मामले में केजरीवाल के फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे कुछ ख़ास लोगों को ही फ़ायदा होगा, असल ग़रीबों तक इसका लाभ नहीं पहुंचेगा.

उन्होंने कहा कि केजरीवाल के अधिकारी उन्हें ग़लत सलाह दे रहें हैं और केजरीवाल सरकार ने कई फ़ैसले सदन को विश्वास में लिए बग़ैर ले लिए जो कि ग़लत है.

इससे पहले गुरूवार दोपहर बाद दो बजे सदन की कार्रवाही शुरू होते ही प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने हंगामा शुरू कर दिया.

बीजेपी आम आदमी पार्टी के नेताओं और समर्थकों के ज़रिए आप की टोपी पहनने का विरोध कर रहे थे.

बीजेपी का कहना था कि पार्टी के स्लोगन वाली टोपी सदन में नहीं पहनी जानी चाहिए.

उसके बाद शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने विश्वास मत का प्रस्ताव रखा.

मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की जनता ने उन्हें नैतिक बहुमत दिया है. मनीष सिसोदिया ने कहा कि जब सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया तब आप पार्टी की ये नैतिक ज़िम्मेदारी थी कि वो दिल्ली की जनता को एक सरकार दें.

विश्वास प्रस्ताव

उनके अनुसार फिर भी उन्होंने दिल्ली की आम जनता से दोबारा पूछा कि उन्हें सरकार बनानी चाहिए या नहीं.

मनीष सिसोदिया के अनुसार जब दिल्ली की जनता ने उन्हें सरकार बनाने के पक्ष में अपना फ़ैसला सुनाया, उसके बाद ही आप पार्टी ने सरकार बनाने की दावेदारी पेश की.

उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से अपील किया कि वे दिल्ली की जनता के बारे में सोचकर मत दें.

मनीष सिसोदिया के विश्वास प्रस्ताव के बाद नेता प्रतिपक्ष हर्षवर्धन ने कहा कि ये विंडबना है कि जिस पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटें मिलीं वो विपक्ष में बैठी है और जो पार्टी पिछले 15 वर्षों से सत्ता में थी, वो सिर्फ़ आठ की संख्या पर सिमट कर रह गई और एक नई पार्टी जो दूसरे नंबर पर थी उसने सरकार बनाई.

हर्षवर्धन ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूछा कि आम आदमी पार्टी ने किन परिस्थितियों में कांग्रेस से समर्थन लिया है. उन्होंने कहा कि फिर उस वादे का क्या होगा जो आम आदमी पार्टी ने किया था कि वो भ्रष्ट कांग्रेस के नेताओं को जेल भिजवाएगी.

हर्षवर्धन ने मनीष सिसोदिया की संस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सिसोदिया की संस्था को विदेश से करोंड़ों रूपए मिलते हैं, उसकी जांच होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि पानी मुफ्त देने की बात हास्यास्पद है और जब फ़रवरी में पानी के बिल आएंगे तब इस घोषणा की पोल खुल जाएगी.

अल्पमत होने के बावजूद आम आदमी पार्टी को कांग्रेस विधायकों के समर्थन से सरकार के विश्वास मत हासिल कर लेने की संभावना है.

कांग्रेस ने एक दिन पहले ही साफ़ कर दिया था कि वह आप सरकार को समर्थन जारी रखेगी. गुरूवार को सदन में लवली के भाषण के बाद केजरीवाल सरकार के लिए विश्वास मत हासिल करना महज़ औपचारिक लग रहा है.

वैसे केजरीवाल ने बुधवार को आशंका जताई थी कि उनकी सरकार के पास वादों को पूरा करने के लिए सिर्फ 48 घंटे का वक्त है.

आपके 70 सदस्यीय विधानसभा में 28 विधायक हैं. विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए उसे 36 विधायकों की ज़रूरत होगी. इसके लिए उसे आठ विधायकों के समर्थन की ज़रुरत होगी.

कांग्रेस के जहां आठ विधायक हैं, लेकिन इसमें से सात विधायक ही विश्वास मत में हिस्सा ले पाएंगे, क्योंकि कांग्रेस के मतीन अहमद को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है और वह अपना वोट नहीं डाल पाएंगे.

वैसे जद (यू) के एकमात्र विधायक ने भी केजरीवाल सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है. इस तरह देखें तो कांग्रेस के साथ विधायकों और जद यू के एक विधायक ने आप को समर्थन दिया तो सरकार विश्वास मत हासिल कर लेगी.

विश्वास मत के टाई होने की सूरत में प्रोटेम स्पीकर को वोट देने का मौक़ा मिलेगा. लेकिन लगता नहीं कि वो नौबत आएगी.

इसके अलावा विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगी अकाली दल के कुल 32 विधायक हैं. जबकि एक निर्दलीय विधायक हैं.

पांचवीं विधानसभा का सात दिवसीय सत्र बुधवार से शुरू हो गया. पहले दिन सभी सदस्यों ने शपथ ग्रहण की. आप के मंत्रियों ने भी बुधवार को पद की शपथ ली.

इस बीच केजरीवाल सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं. उन्होंने दिल्‍लीवासियों को रोज़ 700 लीटर मुफ़्त पानी और 400 यूनिट तक बिजली के दामों को आधा करने की घोषणा की है.

नए साल के पहले ही दिन दिल्ली सरकार ने तीन बिजली वितरण कंपनियों का ऑडिट कराने का भी आदेश दिया. पिछली सरकार ने चार साल में कभी बिजली कंपनियों के ऑडिट का आदेश नहीं दिया.

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