मनमोहन सिंह से सवाल और उनके जवाब

  • 3 जनवरी 2014
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया. प्रधानमंत्री के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल जल्द ही समाप्त हो रहा. उन्होंने अपने कार्यकाल और व्यक्तित्व को लेकर पूछे गए तमाम सवालों के जवाब दिए.

मनमोहन के भाषण के मुख्य बिंदु-

मैं लोगों को नए साल की मुबारकबाद देता हूं. पिछला साल लोकतंत्र की मजबूती का साल रहा. लोगों ने जम कर वोट दिया. हालांकि हमारी पार्टी का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा. हम परिणामों का विश्लेषण करेंगे और नए सबक सीखेंगे.

पिछले कुछ वर्षों में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को परेशानी हुई है. इसमें भारत भी शामिल है. अर्थव्यवस्था धीमी रही है लेकिन नौ वर्षों में हमने विकास दर में तेज़ी देखी है. विकास की प्रक्रिया सामाजिक रूप से सभी लोगों को साथ लेकर चलने वाली रही है. हमने ग्रामीण भारत के लिए काम करने का वादा किया था और ये वादा पूरा किया है.

हमने किसानों के लिए मदद का वादा किया था. हमने उनके लिए निवेश, मदद, विकास के कई काम किए हैं. सड़क निर्माण और बिजली के ज़रिए. मनरेगा ने ये सुनिश्चित किया है कि लोगों को काम मिले. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं. इन कदमों ने सुनिश्चित किया कि कृषि का विकास अधिक हुआ है.

शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को हमने बढ़ावा दिया है. हमने शिक्षा व्यवस्था को बदल दिया है सर्व शिक्षा अभियान के ज़रिए, अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों के लिए नई स्कॉलरशिप के ज़रिए. हमने नए विश्वविद्यालय बनाए. औद्योगिक ट्रेनिंग सेंटर्स खोले.

हम कई महत्वपूर्ण क़ानून बनाए हैं हालांकि संसद में काफी हंगामा होता रहा. मैं इस बारे में और अधिक नहीं बात करुंगा.

हम रोज़गार पैदा करने में उतने सफल नहीं हुए ख़ास तौर पर मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में. छोटे और मझोले उद्योग को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं हम.

हम मंहगाई को काबू में रखने में उतना सक्षम नहीं रहे जितना हम चाहते थे. खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बढ़ती रहीं. यहाँ ये जानना भी ज़रुरी है कि मंहगाई से किसानों को फ़ायदा हुआ है.

ख़ासकर फल और सब्ज़ियों के क्षेत्र में. इस संदर्भ में राज्य सरकारें और बेहतर कर सकती थीं. हमने आम आदमी को खाद्य पदार्थों की मंहगाई से दूर रखने की भरपूर कोशिश की है. मंहगाई चिंता का सबब है लेकिन लोगों की आमदनी भी बढ़ी है और खपत बढ़ी है.

हमने भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में कई क़दम उठाए हैं. प्रशासन अब और जवाबदेह है. सूचना का अधिकार आप सबके पास है. बड़े लोगों के ख़िलाफ़ आरोपों खासकर 2 जी, कोयला आवंटन और ज़मीन के मामले में लोगों ने बड़ी चिंता दिखाई.

हमने 2 जी के मामले में आवंटन के तरीक़े बदले ताकि ऐसी समस्या न हो. जिन मुद्दों पर सवाल उठे उसकी जांच हो रही है. भूमि का मुद्दा राज्य सरकार के हाथ में है. हम उन्हें सुझाव देते हैं कि वो इन मामलों में पारदर्शिता बरते.

विदेश मामलों में मैं ये कह सकता हूं कि माहौल बदला है. हम दुनिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर चलना होगा. भारत अपने रक्षा मामलों में निवेश जारी रखेगा ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. हम पड़ोसी देशों से बेहतर संबंध बनाना चाहेंगे क्योंकि दक्षिण एशिया की सुरक्षा साझा भूगोल और साझा संबंधों में निहित है.

पत्रकारों से सवाल-जवाब

अजय कौल पीटीआई से- विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी परेशान है क्या उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करना चाहिए?

मनमोहन सिंह- उचित समय पर घोषणा की जाएगी. सोनिया जी ने इस बारे में पहले ही कह दिया है.

दैनिक भास्कर का सवाल- यूपीए एक से यूपीए दो तक भ्रष्टाचार के मुद्दे आए हैं. क्या आपकी मिस्टर क्लीन छवि दागदार हुई है?

मनमोहन सिंह- जहां तक भ्रष्टाचार के आरोपों का सवाल है वो यूपीए वन के दौर के हैं. मुख्य रुप से कोयला और 2 जी दोनों यूपीए वन के समय के हैं. पिछले चुनाव में हम जनता के सामने अपने काम को लेकर गए थे और लोगों ने यूपीए में ही अपना विश्वास जताया. ये मुद्दे मीडिया, कोर्ट और सीएजी द्वारा उठाए गए. ध्यान रखना चाहिए कि ये मुद्दे यूपीए वन के समय के थे और इसके बावजूद हमें यूपीए 2 के लिए जनादेश मिला था.

टाइम्स ऑफ इंडिया के राजीव देशपांडे का सवाल- आपने कहा कि ये मामले यूपीए वन के थे और इसके बावजूद सत्ता में लौटे लेकिन इन स्कैंडलों की वजह से आपकी सरकार को नुकसान पहुंचा. आप क्या अलग कर सकते थे जो आपने नहीं किया?

मनमोहन सिंह- मैं दुखी महसूस करता हूं. मैं समझता हूं कि स्पेक्ट्रम का आवंटन पारदर्शी होना चाहिए. कोयला आवंटन नीलामी के हिसाब से आवंटित होना चाहिए. ये तथ्य भुला दिए गए. विपक्ष की अपनी अलग रुचि है कभी कभी मीडिया उनके हिसाब से चलता है. जब इतिहास लिखा जाएगा तो पता चलेगा कि मै निर्दोष हूं. मैं नहीं कहता कि अनियमितता नहीं हुई. हुई है पर कुछ बहुत बढ़ा-चढ़ाकर लिखा गया मीडिया में.

सीएनएन आईबीएन का सवाल- क्या राहुल गांधी कांग्रेस के पीएम पद के उम्मीदवार होने चाहिए. और आप आगे क्या करेंगे?

मनमोहन सिंह- मैंने ये कहा कि अगर यूपीए सत्ता में फिर आई तो मैं पीएम पद का उम्मीदवार नहीं रहूंगा. राहुल में क्षमता है लेकिन इस बारे में पार्टी ही फ़ैसला करेगी.

एबीपी न्यूज़ से शाज़ी ज़मा का सवाल- पिछले नौ दस सालों में क्या कोई ऐसा मुश्किल वक़्त आया जब आपको लगा कि इस्तीफ़ा दे देना चाहिए?

मनमोहन सिंह- नहीं ऐसा कभी नहीं हुआ. मैं बिना किसी डर के काम करता रहा.

बिजनेस स्टैंडर्ड से अदिति फडनिस का सवाल- कांग्रेस की हार विधानसभा चुनाव में रही. मुख्यमंत्रियों ने कहा कि मंहगाई मुख्य कारण रही. क्या आपको लगता है कि सारा दोष आप पर मढ़ा गया? एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम कम हुए फिर बढ़े?

मनमोहन सिंह- मैं अनुमान नहीं लगाना चाहूंगा कि आगे क्या क़दम उठाए जाएंगे. ये सही है कि मंहगाई एक फैक्टर रहा जिसके कारण लोग कांग्रेस से नाराज़ हुए. मैंने कारण दिए जो हमारे बस के बाहर थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की क़ीमत बढ रही थी. उसे नियंत्रित करना हमारे नियंत्रण में नहीं था. मैं ये भी कहना चाहूंगा कि मैंने अर्थव्यवस्था में कमज़ोर लोगों के हित के लिए काम किए हैं.

उर्दू प्रेस का सवाल- सच्चर कमिटी की रिपोर्ट लागू करने की बात हुई थी. अल्पसंख्यकों के लिए कई स्कीम बनी लेकिन लोगों तक नहीं पहुंचती?

मनमोहन सिंह- सच्चर कमिटी की सिफ़ीरिशों को लागू करने की कोशिश की गई है. कई स्कीम लाई गईं. मुझे दुख है कि वो लोगों तक नहीं पहुंच पाई. कुछ मामले कोर्ट में है. कुछ और समस्याएं हैं जिसकी वजह से कमिटी की सिफ़ारिशें लागू नहीं की जा सकीं. हमने कई स्कॉलरशिप शुरु की हैं. स्कॉलरशिप के पैसे बढ़ाए गए हैं.

दैनिक जागरण के राजकिशोर का सवाल- दस वर्षों में आप पर सबसे अधिक चुप रहने के आरोप लगे. ऐसी क्या चीज़ थी जो आपको रोके रही? मनमोहन सिंह- जहां तक बोलने का सवाल है जब भी ज़रुरत पड़ी है पार्टी फोरम में मैं ज़रुर बोलता रहा हूं और आगे भी बोलता रहूंगा.

हिंदुस्तान टाइम्स का सवाल- चुनाव चार महीने में होने वाले हैं. क्या आप और सुधारों को आगे बढ़ाएंगे? मनमोहन सिंह- हम इस दिशा में काम करते रहेंगे. ये प्रक्रिया है जो चलती रहती है.

टाइम्स नाउ की नाविका कुमार का सवाल- आप वक़्त-वक़्त पर अपने मंत्रियों को लिखकर व्यावसायिक हितों को घोषित करने के बारे में कहते रहे हैं ताकि पूरी पारदर्शिता बरती जा सके. अभी वीरभद्र सिंह का मामला सामने आया है. क्या ये सही है?

मनमोहन सिंह- मैं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के बारे में कुछ नहीं कह सकता क्योंकि इस बारे में मुझे पूरी जानकारी नहीं है. इस बारे में अरुण जेटली का पत्र भी मिला है जिसमें लगाए गए आरोपों की सच्चाई के बारे में मैं विचार नहीं कर पाया हूँ. आरोपों के बारे में इस समय कुछ नहीं कह सकता हूँ.

वॉशिंगटन पोस्ट का सवाल- भारत-अमरीका संबंधों के बारे में आपकी क्या राय है. दोनों देशों के संबंध इस समय खराब ही दिखते हैं.

मनमोहन सिंह- हम अमरीका के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं. हाल में कुछ गड़बड़ी हुई है लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि ये सब अस्थाई दिक्कतें हैं.

डीवाई 365 चैनल की रमा शर्मा- पूर्वोत्तर में परियोजनाएं ठीक से क्यों लागू नहीं हो पा रही हैं? मनमोहन सिंह- मुझे लगता है कि इन परियोजनाओं में दिक़्क़तें हो रही हैं. वो इलाक़ा कठिन है मानता हूं इस बात को.

एनडीटीवी से सुनील प्रभु- आपके बारे में कहा जाता है कि आप कैबिनेट में मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पाए. आपकी बात नहीं मानी गई और आप चुप रहे? मनमोहन सिंह- मैं मानता हूं कि अभी की मीडिया की तुलना में इतिहास मेरे प्रति दयालु होगा. मैं सारी बात बता नहीं सकता कि कैबिनेट में क्या-क्या बातें होती हैं. गठबंधन की मजबूरियां होती ही हैं.

इंडियन एक्सप्रेस से मनीष छिब्बर- बीजेपी और मोदी जी का आरोप है कि आप कमज़ोर प्रधानमंत्री हैं क्या आपकी पार्टी ने ही आपको कमज़ोर किया? मनमोहन सिंह- ये तो इतिहास ही तय करेगा कि मैं कमज़ोर था या नहीं. विपक्ष को जो मन है बोल सकते हैं. मजबूत प्रधानमंत्री का ये मतलब नहीं है कि आप लोगों की सामूहिक रूप से हत्या करें.

द हिंदू से प्रवीण स्वामी- ख़बरें आ रही थी कि कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ आप समझौते के क़रीब थे. क्या कहेंगे इस बारे में? मनमोहन सिंह- मैंने पाकिस्तान ही नहीं बाक़ी सभी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश की. हां मौका था कि बड़ा समझौता हो सकता था.

दूरदर्शन - आप अपनी विरासत को कैसे याद करेंगे. क्या नहीं कर पाए? मनमोहन सिंह- मुझे लगता है कि हमने अच्छा आर्थिक विकास किया. मेरे कार्यकाल के बारे में इतिहासकार फ़ैसला करेंगे.

पदमा राव सुंदर जर्मन अखबार से- विदेशी निवेशकों के लिए क्या कहेंगे आप.

मनमोहन सिंह- हम पूरा सहयोग करेंगे विदेशी निवेशकों को.

निर्मल पाठक- आपकी छवि थी कि आप गलत बात बर्दाश्त नहीं करते लेकिन ऐसा लगता है कि आप काफी बकवास बर्दाशत कर रहे हैं? मनमोहन सिंह- मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता कि आप क्या सोचते हैं मेरे बारे में या और लोग क्या सोचते हैं? मैंने अपना काम ईमानदारी से किया है. ऐसी धारणा थी कि कांग्रेस गठबंधन नहीं चला सकती. मैंने वो सफलता से चला कर दिखाया है.

एनडीटीवी प्रॉफिट- बिजनेस समुदाय के लिए दिक़्क़तें बढ़ी हैं. क्या कहेंगे आप? मनमोहन सिंह- मेरे हिसाब से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था में जो बदलाव हुए उसका असर भारत पर भी पड़ा.

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