असम से उठी अलग टाइम ज़ोन की माँग

पूर्वोत्तर राज्य असम
Image caption भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अलग टाइम जोन की माँग का मुद्दा फिर से चर्चा में है.

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से भारत के इकलौते टाइम ज़ोन में बदलाव करने की माँग हो रही है. असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने देश में एक टाइम ज़ोन होने के कारण पूर्वोत्तर के निवासियों को जल्दी सूर्योदय होने के कारण समस्या का सामना करना पड़ता है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी से उन्होंने कहा, "असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों को अलग स्थानीय मानक समय की दरकार है जो भारत के मानक समय (आईएसडी) से कम से कम डेढ़ घंटा आगे हो."

उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर में देश के बाक़ी हिस्सों की तुलना में काफ़ी पहले सूर्योदय होता है. हमारे लिए अलग टाइम ज़ोन का होना काफ़ी लाभदायक होगा. इससे हमें ऊर्जा बचाने में मदद मिलेगी."

बृहस्पतिवार को उन्होंने भारत के एक टाइम ज़ोन में बदलाव की बात कही. असम में गर्मियों के समय में सूर्योदय 4.30 बजे सुबह हो जाता है.

इसके लिए असम के मुख्यमंत्री दिल्ली में अपनी आवाज़ उठाने पर विचार कर रहे हैं. इस मुद्दे को सबसे पहले 2010 में उठाया गया था.

विवादास्पद मुद्दा

भारत का विस्तार पूर्व में बांग्लादेश की सीमा से लेकर पश्चिम में अरब सागर तक है. लेकिन विशाल भौगोलिक क्षेत्र के बावजूद एक अरब 20 करोड़ की जनसंख्या के लिए एक ही टाइम ज़ोन है.

भारत में एक टाइम ज़ोन का मसला एक विवादास्पद मुद्दा रहा है, इसमें बदलाव के प्रस्ताव आते रहे हैं, जिसमें भारत के मानक समय को ग्रीनिच के मानक समय (जीएमटी) से +5.30 घंटे से बढ़ाकर +6.00 घंटे करने या फिर सर्दियों में घड़ियों को एक घंटा आगे करने की बात कही जाती रही है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडी़ज़ बंगलौर के दो वैज्ञानिकों ने इस मसले का अध्ययन करके 2007 में निष्कर्षों को प्रकाशित किया था. इसमें भारत के मानक समय को आधा घंटा आगे बढ़ाने की बात कही गई थी. उनका दावा था कि इससे 2.3 अरब यूनिट बिजली की बचत होगी, शाम के समय ख़र्च होने वाली लगभग 18 फ़ीसदी ऊर्जा का इस्तेमाल रात के समय नागरिकों को आपूर्ति के लिए किया जा सकता है.

अलग टाइम ज़ोन के ख़तरे

Image caption असम के मुख्यमंत्री अलग टाइम जोन के मुद्दे को लोगों के हित में बता रहे हैं.

अंग्रेज़ी समाचार पत्र द हिंदू में प्रकाशित आलेख में वैज्ञानिकों ने लिखा, " अगर देश को दो समय ज़ोन में विभाजित किया जाता है तो इससे टाइम ज़ोन की सीमा पर अफ़रा-तफ़री वाले हालात पैदा हो जाएंगे."

उन्होंने प्रशासकीय ख़तरों के बारे में कहा था कि इससे मानवीय भूल के कारण टाइम ज़ोन की सीमाओं पर बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं हो सकती है."

अमरीका में प्रशांत क्षेत्र और अलास्का को छोड़कर चार टाइम-ज़ोन हैं, ऑस्ट्रेलिया में तीन टाइम ज़ोन हैं, जबकि रूस में नौ टाइम ज़ोन हैं.

भारत की तरह चीन में भी एक ही समय क्षेत्र है, जो जीएमटी से आठ घंटे आगे है.

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