केजरीवाल का घर, कोई ख़ुश तो कोई परेशान

  • 7 जनवरी 2014
फणींद्र द्विवेदी
Image caption गोरखपुर से दिल्ली तक साइकिल से आए फणींद्र द्वीवेदी अरविंद केजरीवाल को बधाई देने के लिए आए हैं.

दोपहर का वक़्त है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कौशाम्बी स्थित अपने घर पर नहीं हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि उनसे मिलने वालों में कमी हुई है.

पता चला कि वो सचिवालय में हैं, मगर लोग उनके घर वापस लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. इनमें से एक हैं फणींद्र द्विवेदी जो गोरखपुर से दिल्ली तक साइकिल चलाते हुए अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे हैं.

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अपनी साइकिल को केजरीवाल के अपार्टमेंट के बाहर खड़ा कर वो पास की दुकान की बेंच पर बैठ कर इंतज़ार कर रहे हैं.

द्विवेदी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "मैं इतना लम्बा सफ़र तय कर सिर्फ़ उन्हें बधाई देने आया हूँ. मुझे साइकिल से यहाँ तक पहुँचने में आठ दिन लग गए हैं."

उनके साथ साथ अपार्टमेंट के पास ऐसे भी कई लोग थे जो आगामी लोक सभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार बनना चाहते हैं.

जब से पार्टी ने घोषणा की है कि वो लोक सभा चुनाव में सभी सीटों पर लड़ेगी तब से टिकट के दावेदारों की और भी लम्बी क़तार लग गई है.

लोगों का तांता

अरविंद केजरीवाल कौशाम्बी में गिरिनार अपार्टमेंट में रहते हैं जो भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों की रिहाइशगाह है. उनके मुख्यमंत्री बनते ही इस अपार्टमेंट में गहमा-गहमी बेहद बढ़ गई है.

यहाँ तक कि इस जगह पर एक दो जनता दरबार भी लग चुके हैं. अब अपार्टमेंट के चौकीदारों को आने वालों से काफ़ी मशक्क़त करनी पड़ती है.

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अपार्टमेंट के दरवाज़े पर तैनात चौकीदारों का कहना है कि पहले तो सबकुछ ठीक था लेकिन विधानसभा के चुनाव से ही अपार्टमेंट में भीड़ उमड़ने लगी है.

फिर केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद और भी ज़्यादा लोगों का तांता लगा रहता है.

ये कहा जा रहा था कि अपार्टमेंट में उनके पड़ोस में रहने वालों ने इस भीड़-भाड़ पर आपत्ति भी जताई है लेकिन कुछ एक पड़ोसियों का कहना है कि ऐसा नहीं है और ये उनके लिए फ़ख़्र की बात है कि उनके बीच से ही कोई दिल्ली का मुख्यमंत्री बना है.

केजरीवाल का घर

मगर गिरिनार अपार्ट्मेंट के बाहर मौजूद दुकानें चलाने वाले लोगों की तो निकल पड़ी है. अब वो पहले से ज़्यादा अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं.

पास की ही दुकान के शैलेन्द्र कहते हैं कि हालांकि वो पिछले आठ सालों से वहाँ दुकान लगा रहे हैं लेकिन अब उनके धंधे में थोड़ी तेज़ी आई है.

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वो कहते हैं, "दूर-दूर से लोग मिलने आते हैं. यहाँ खाने की और कोई जगह नहीं है. इसलिए खाने की दुकानों को फायदा हो रहा है. अब मीडियाकर्मियों को ही देख लीजिए. सुबह से शाम तक यहीं जमे रहते हैं. इसलिए वो इन्हीं दुकानों से कुछ-कुछ खरीदते हैं."

गिरिनार अपार्टमेंट के आसपास के दुकानदार हों या केबल टीवी का कनेक्शन देने वाले लोग, सभी का कहना है कि वो आज भी बिना किसी रोक-टोक के अरविंद केजरीवाल के घर चले जाते हैं.

दिल्ली में मकान

कुछ अपने मोबाइल फ़ोन पर केजरीवाल परिवार के साथ खींची गई अपनी तस्वीरें दिखाने लगे तो कुछ ये बताने लगे कि वो किस तरह उन्हें अपने दुपहिया वाहन पर बैठाकर घर से आम आदमी पार्टी के कार्यालय तक छोड़ने जाते हैं.

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कौशाम्बी के गिरिनार अपार्टमेंट के लोग हों या फिर आस-पास के, कई लोग अब ऐसे हैं जो नहीं चाहते कि अरविन्द केजरीवाल कौशाम्बी से कहीं और चले जाएँ.

लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए दिल्ली में मकान ढूँढा जा रहा है.

इस ख़बर से कौशाम्बी के लोग थोड़ा उदास ज़रूर हैं मगर उन्हें ख़ुशी है कि पास ही में आम आदमी पार्टी का मुख्यालय है और अरविंद केजरीवाल का उन लोगों से नाता जुड़ा रहेगा.

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