प्रवासी भारतीय सम्मेलन प्रवासी मज़दूरों के लिए नहीं: वायलार रवि

प्रवासी भारतीय  दिवस का विरोध

प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि का कहना है कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन 'प्रवासी मज़दूरों या घरेलू कामगारों के मुद्दों के लिए नहीं है'.

उनका कहना है, "यह सम्मेलन घरेलू कामगारों और मज़दूरों के बारे में चर्चा करने के लिए नहीं है. यहाँ पर आम मुद्दों पर बात की जाएगी."

वायलार रवि का कहना था कि अगर प्रवासी भारतीय श्रमिकों और मज़दूरों की कोई समस्या है तो वे उनके पास आकर ज्ञापन दे सकते हैं.

दिल्ली के विज्ञान भवन में 12वाँ प्रवासी भारतीय सम्मेलन चल रहा है. सम्मेलन के दौरान बीबीसी से बातचीत में वायलार रवि ने यह बात कही.

दूसरी तरफ़, घरेलू कामगार, प्रवासी और श्रमिक संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आयोजन किया. प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन को अधिक लोकतांत्रिक बनाया जाना चाहिए और उसमें समाज के सभी वर्गों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

प्रवासी भारतीय सम्मेलन के कार्यक्रम की रूपरेखा देखने पर पता चला कि सम्मेलन के आख़िरी दिन के आखिरी सत्र में डेढ़ घंटा खाड़ी देशों में प्रवासियों के मुद्दों के लिए रखा गया है. मगर इसमें कहीं भी मज़दूरों या घरेलू कामगारों का ज़िक्र नहीं है.

'धनी प्रवासियों पर ध्यान'

Image caption डॉक्टर आरएस तिवारी ने सरकार से देश के बाहर काम करने जाने वाले श्रमिकों के लिए नया क़ानून बनाने की माँग की.

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर श्रमिक हितों के लिए काम कर रहे डॉक्टर आर एस तिवारी कहते हैं, "प्रवासी भारतीय सम्मेलनों में केवल धनी प्रवासियों और निवेश पर ध्यान होता है. इसमें श्रम मंत्रालय की कोई भागीदारी नहीं होती क्योंकि वहाँ श्रमिक अधिकारों की कोई बात नहीं होती."

डॉक्टर आर एस तिवारी और उनके सहयोगी संगठन सरकार से देश के बाहर काम करने जाने वाले श्रमिकों के लिए नया क़ानून बनाने की माँग कर रहे हैं.

ज्ञापन सौंपने से जुड़ी बात पर जब हमने प्रवासी कामगार संगठनों के उस दावे का ज़िक्र किया कि उन्होंने पहले भी कई ज्ञापन सौंपे हैं, वायलार रवि का कहना था, "यह मेरी चिंता नहीं है कि वह क्या कहते हैं. मैं यहाँ उस बात का जवाब देने के लिए नहीं हूँ, जो किसी ने विदेश में कही या सड़क पर कही."

घरेलू कामगार संगठन के लिए कार्यरत अनन्या भट्टाचार्जी ने बताया, "खाड़ी देशों में घरेलू कामगार और निर्माण मज़दूरों का शोषण होता है इसके लिए प्रवासी मज़दूर सुरक्षा बिल संसद में लाया जाना चाहिए. साथ ही साल 2011 में पास अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन की संधि संख्या-189 को स्वीकार किया जाना चाहिए. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन का प्रवासी समझौता भी स्वीकार किया जाना चाहिए."

उनका कहना है कि इन समझौतों में घरेलू कामगारों के हक़, काम करने के घंटे, बाहर जाने की व्यवस्था, अवकाश आदि की जानकारी है.

'ज़िंदा वापस नहीं जाओगी'

Image caption यशोदा अपने बेटे की मौत के बाद 10,000 रुपए महीने की नौकरी के लिए कुवैत गईं थीं.

अनन्या ने प्रदर्शनकारियों में एक हैदराबाद की यशोदा से मेरी मुलाक़ात कराई. वह कुवैत और सऊदी अरब में घरेलू कामगार के तौर पर गईं थीं.

यशोदा ने बताया, "भारत छोड़कर पैसे के लिए दूसरे देश नहीं जाना. यहाँ रोटी-चटनी से पेट भरना अच्छा है."

यशोदा अपने बेटे की मौत के बाद 10 हज़ार रुपए महीने की नौकरी के लिए कुवैत गईं थीं मगर वहाँ उन्हें पूरी तनख्वाह नहीं मिली, और जो मिली वह प्लेसमेंट एजेंट ने अपने पास रख ली. एजेंट ने उनसे मारपीट की और उनका पासपोर्ट और फ़ोन भी ले लिया. यशोदा को दो लाख रुपए में सऊदी अरब के एक शेख को बेचा गया.

यशोदा बताती हैं, "मैं शाकाहारी हूँ लेकिन मुझे माँसाहारी खाना खाने के लिए मजबूर किया जाता था. कभी ठीक से सोने को नहीं मिलता था. मैं वापस आना चाहती थी, पर मुझे वापस नहीं आने दिया जा रहा था. मेरे पास पासपोर्ट भी नहीं था. एक दिन मुझे मालिक ने धमकी दी कि अब तुम यहाँ से ज़िंदा वापस नहीं जाओगी. मैं बहुत डर गई थी."

बाद में एक एनजीओ की मदद से यशोदा वापस आ सकीं.

विरोध प्रदर्शन में पहुंचे ज़्यादातर लोगों की कहानी यशोदा से मिलती थी. प्रदर्शन में शामिल लोगों में कई महिलाएं थीं.

'श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा'

Image caption अनन्या भट्टाचार्जी कहती हैं कि खाड़ी देशों में घरेलू कामगारों और निर्माण मज़दूरों का शोषण होता है.

पूर्व क्षेत्रीय श्रम आयुक्त आर एस तिवारी ने क़ानून में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की.

शोषण के अलावा भी प्रवासी कामगारों की कई समस्याएं हैं. इस बारे में हमने 'माइग्रेंट्स राइट्स काउंसिल ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष पी नारायण स्वामी से बात की.

उनका कहना था "मुझे सूचना के अधिकार के ज़रिए पता चला कि भारत से कुल 112 देशों में प्रवासी कामगार जाते हैं, जिनकी जेलों में कुल 6,635 कामगार क़ैद हैं. मगर भारत सरकार इनकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है."

प्रवासी भारतीय सम्मेलन और दिवस 9 जनवरी को 1915 में इसी दिन महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका से भारत वापसी की याद में मनाया जाता है. हर साल सात से नौ जनवरी तक प्रवासी भारतीय सम्मेलन और नौ जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस होता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार