रास्ते में रूकावटों पर जयराम रमेश को आया ग़ुस्सा

Image caption सेना प्रमुख के काफिले के कारण ट्रैफिक में फंस गए थे जयराम रमेश.

केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने देश में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की तीखी आलोचना करते हुए इसे मूर्खतापूर्ण क़रार दिया है.

सेना प्रमुख के काफिले की वजह से ट्रैफिक में फंस गए और उसकी वजह से ख़फ़ा जयराम रमेश ने कहा कि वो इस बारे में रक्षा मंत्री एके एंटनी को पत्र लिखेंगे.

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उन्होंने वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को 'इस्टेट विदिन इस्टेट' या 'राज्य के अंदर राज्य' बताया और कहा कि यातायात को किसी के लिए भी नहीं रोका जाना चाहिए.

दरअसल, सेना प्रमुख के काफ़िले में केंद्रीय मंत्री फंस गए थे.

'एंटनी के पास भी नहीं सुरक्षा घेरा'

जयराम रमेश का कहना था कि एंटनी खुद कोई सुरक्षा घेरा लेकर नहीं चलते हैं. लेकिन जब भी सेना प्रमुख राष्ट्रीय राजधानी में यात्रा करते हैं दिल्ली पुलिस को हटाकर मिलिटरी पुलिस यातायात व्यवस्था अपने हाथ में ले लेती है.

जयराम रमेश स्वयं कभी लाल बत्ती की गाड़ी से नहीं चलते.

उन्होंने कहा कि गुरूवार को वो एक बैठक में शामिल होने तीन मूर्ति जा रहे थे तो सेना प्रमुख के आवास के पास उनकी कार को सेना पुलिस ने रोक लिया.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''यह मूर्खतापूर्ण है... एंटनी भी ऐसा नहीं करते. एंटनी के पास कोई भी सुरक्षा नहीं है और उनके (सेना) पास यातायात संचालन के लिए खुद की पुलिस है. यातायात की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस पर छोड़ देनी चाहिए...मैं इस बारे में एंटनी को पत्र लिखने जा रहा हूं.''

उन्होंने कहा कि एक बार दफ़्तर से घर जाते हुए भी सेना के जवानों ने उन्हें रोक लिया था.

''यह सब सेना प्रमुख के काफ़िले को आसानी से जाने देने के लिए किया गया था.''

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति

जयराम रमेश को कृषि भवन स्थित कार्यालय से लोधी गार्डन में अपने आधिकारिक आवास तक बिना सुरक्षा के पैदल जाने में 40 मिनट का समय लगता है.

वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए रमेश ने कहा, ''एक बार सेना प्रमुख के कारण मैं जाम में फंस गया था. एक बार नौसेना प्रमुख के काफ़िले में फंस गया. एक बार वायु सेना प्रमुख के काफ़िले के कारण और एक बार तो मुख्य न्यायाधीश के काफ़िले के कारण जाम में फंसा रहा.''

उन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के काफ़िले को जाने देने के लिए जिस तरह यातायात को रोका जाता है उसकी भी आलोचना की.

उन्होंने कहा, ''यातायात को किसी के लिए भी नहीं रोका जाना चाहिए. मुझे लगता है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए भी यातायात को काफी देर तक रोका जाता है.''

''मुझे लगता है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के काफ़िले में कारों की संख्या को आसानी से आधा किया जा सकता है. वीआईपी सुरक्षा 'राज्य के भीतर राज्य' की व्यवस्था जैसा है. कोई भी इस बारे में सवाल नहीं करता और किसी पर भी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती.''

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