छत्तीसगढ़ः देर में बच्चे पैदा करो, इनाम पाओ

अस्पताल बच्चा नर्सरी

छत्तीसगढ़ में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक अनूठी पेशकश की है. सरकार ने बच्चे पैदा करने में देरी करने वालों को पुरस्कृत करने का फ़ैसला किया है.

सरकार ने घोषणा की है कि शादी के कम से कम दो साल बाद पहले बच्चे को जन्म देने वाले दंपत्ति को बेटे के जन्म पर 10 हज़ार रुपए और बेटी के जन्म पर 12 हज़ार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा.

यह योजना राज्य में ग़रीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों के लिए शुरू की गई है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के अनुसार “इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ख़ास निर्देश दिए गए हैं. हमें उम्मीद है कि इस योजना का सकारात्मक असर होगा.”

पहली संतान के बाद दूसरी संतान के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर रखने और बच्चे के जन्म के एक साल के भीतर परिवार नियोजन के स्थायी उपाय अपनाने वाले दंपत्ति को बेटे के जन्म पर पांच हज़ार रुपए और बेटी के जन्म पर सात हज़ार रुपए का अतिरिक्त पुरस्कार राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र के रूप में दिया जाएगा.

जनसंख्या दर में वृद्धि

Image caption छत्तीसगढ़ की आबादी के कुल 56 लाख परिवारों में 48 लाख परिवार ग़रीब हैं.

जनसंख्या नियंत्रण का उद्देश्य आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लड़कियों के विवाह की आयु और बच्चों के जन्म में अंतर बढ़ाने के लिए जनसंख्या स्थिरता कोष के ज़रिए 'प्रेरणा-एक उत्तरदायी पितृत्व रणनीति' नामक योजना शुरू की गई है.

इस योजना के तहत ऐसे दंपत्तियों को चिह्नित कर पुरस्कृत करने का निर्णय लिया गया है, जो कम उम्र में शादी करने की परंपरा तोड़ते हैं और बच्चों के जन्म में अंतर रखते हैं.

जनसंख्या के मामले में भारत में छत्तीसगढ़ का नौंवा स्थान है.

2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी दो करोड़ 55 लाख से ज़्यादा है. कुल 56 लाख परिवारों में 48 लाख परिवार ग़रीब हैं.

जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि साल 2001 में छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या दो करोड़ आठ लाख के क़रीब थी जो 2011 में बढ़कर दो करोड़ 55 लाख से ज़्यादा हो गई.

इस प्रकार राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 22.61 प्रतिशत थी, जबकि इस दौरान देश की जनसंख्या वृद्धि दर 17.6 प्रतिशत थी यानी देश की तुलना में राज्य में जनसंख्या वृद्धि दर पांच प्रतिशत अधिक थी.

यहां तक कि 1991 से 2001 की अवधि छत्तीसगढ़ की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 18.27% थी. यानी इन दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि दर में छत्तीसगढ़ में 4.34 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है.

'आदिवासी केंद्रित योजनाएं'

छत्तीसगढ़ में सरकार ने इससे पहले नगरपालिका और नगरीय निकाय संस्थाओं में दो से अधिक बच्चों के माता-पिता के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा रखा था.

इस कारण कई लोगों को तीसरी संतान पैदा होने के बाद अपना पद छोड़ना पड़ा था. हालांकि बाद में सरकार ने इस नियम को समाप्त कर दिया.

Image caption राज्य की पांच आदिम जनजातियों में हाल यह है कि उनकी छह-सात संतान पैदा होती हैं, जिनमें बमुश्किल दो-तीन ज़िंदा रह पाती हैं.

इसी तरह सरकारी नौकरी में भी राज्य सरकार ने दो से अधिक संतान वालों को नौकरी के लिए अपात्र घोषित कर दिया था लेकिन सरकार की ताज़ा योजना को सामाजिक कार्यकर्ता बहुत उपयोगी नहीं मान रहे.

राज्य में आदिवासियों के बीच जल-जंगल और ज़मीन के मुद्दे पर लड़ाई लड़ने वाले गौतम बंदोपाध्याय का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण से बड़ा मुद्दा बेहतर जनसंख्या है.

उनका कहना है कि राज्य की पांच आदिम जनजातियों में हाल यह है कि उनकी छह-सात संतान पैदा होती हैं, जिनमें बमुश्किल दो-तीन ज़िंदा रह पाती हैं.

वे कहते हैं, ''शहरों के लिए सरकार की यह योजना ठीक हो सकती है पर इस आदिवासी बहुल राज्य में सरकार को आदिवासी केंद्रित स्वास्थ्य जनसंख्या की योजना बनानी चाहिए, जिसे लागू करने के लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया जाना चाहिए. आदिवासियों में मृत्यु दर घटे, उनमें कुपोषण कम हो, उनका जीवन स्तर सुधरे, इसे पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार