प्रवासी भारतीय: मोदी को केजरीवाल की टक्कर?

  • 11 जनवरी 2014
नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल

भारत में होने जा रहे लोकसभा चुनावों को लेकर विदेशों में ख़ासा उत्साह है. विदेशों में रह रहे भारतीय, प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल लोगों पर भी पैनी नज़र रखे हुए हैं. उनके बीच सबसे अधिक उत्सुकता नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के परिणामों को जानने को लेकर है.

हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में बीबीसी ने इनकी इसी उत्सुकता और उसके कारण को क़रीब से जाना.

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल अपनी भ्रष्टाचार विरोधी नीति और सरकार में जनता की भागीदारी को बढ़ावा देने की वजह से विदेशों में बसे भारतीय नागरिकों के मन में जगह बना रहे हैं.

उधर भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उद्योग जगत को बढ़ावा देने की वजह से अधिकतर प्रवासी भारतीयों में लोकप्रिय हैं. वह प्रवासी भारतीयों के लिए अपने प्रशासनिक अनुभव की वजह से प्रधानमंत्री पद के लिए अनुभवी दावेदार का प्रमुख चेहरा हैं.

'प्रतिस्पर्धा'

प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए सुरेन्द्र कहते हैं, "नरेंद्र मोदी को अरविंद केजरीवाल से प्रतिस्पर्धा मिल रही है, और आगे भी मिलेगी."

नरेंद्र मोदी प्रवासी भारतीय सम्मेलन में पहुंचे थे और एक सत्र को संबोधित भी किया. ऐसे में कुछ प्रवासियों को दिल्ली में प्रवासी भारतीय सम्मेलन होने के बाद भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का उनसे मिलने न आना खल गया.

ब्रिटेन से आए ओम प्रकाश खन्ना ने अरविंद केजीवाल के लिए सवाल खड़ा कर दिया.

ब्रिटेन से आए ओम प्रकाश खन्ना ने अरविंद केजीवाल के लिए सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा, "जब हम प्रवासी भारतीय दिल्ली में आए हैं तो यहाँ के मुख्यमंत्री को भी हमसे मिलने आना चाहिए था. हमें तो इस बात का बड़ा खेद है कि वह नहीं आए. पता नहीं क्या वजह है.''

फिर भी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी की मुहिम की वजह से ओम प्रकाश खन्ना उनके मुरीद हैं.

उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की, "अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार को हटाएंगे. जैसा दिल्ली में हो रहा है वैसे हर प्रदेश में हो जाए तो भारत का कल्याण हो सकता है."

लेकिन उन्हें नरेंद्र मोदी का भाषण भी अच्छा लगा.

ओम प्रकाश कहते हैं, "मोदी जी ने जो भी बातें की हैं वो देश के लिए बहुत ही अच्छी हैं."

नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए केवल गुजरात की विकास परियोजनाओं और पर्यटन के बारे में बताया था. साथ ही उन्होंने विदेशी नागरिकों को अपने मूल स्थान से जुड़ने और वहाँ के लिए कुछ करने को भी कहा था.

'भ्रष्टाचार अहम मुद्दा'

जर्मनी से आए वेद प्रकाश शास्त्री का कहना था कि जर्मनी में लोगों के लिए भ्रष्टाचार एक अहम मुद्दा है.

उन्होंने बताया, "जर्मनी में रह रहे भारतीयों के बीच आम आदमी पार्टी ज्यादा लोकप्रिय है."

जर्मनी से आए वेद प्रकाश शास्त्री का कहना था कि जर्मनी में लोगों के लिए भ्रष्टाचार एक अहम मुद्दा है

इसका कारण बताते हुए वेद प्रकाश ने कहा, "एक नई चीज़ सभी को बहुत अच्छी लगती है, जैसे छोटा बच्चा जब पैदा होता है तो सभी को बहुत अच्छा लगता है. तो अभी सब लोग यही सोचते हैं कि अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार को दूर करेगा."

जब मैंने उनसे पूछा कि नरेंद्र मोदी को लेकर जर्मनी में किस तरह की बातें होती हैं?

तो वेद प्रकाश ने बताया, "नरेंद्र मोदी के लिए लोग अच्छी बातें करते हैं. वह भावी प्रधानमंत्री हो सकते हैं."

ब्रिटेन के ओम प्रकाश और जर्मनी के वेद प्रकाश की तरह ही अधिकतर प्रवासियों पर नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल का लगभग बराबर प्रभाव देखने को मिला.

इस प्रभाव पर कुछ ख़ास देशों में नरेंद्र मोदी और गुजरात दंगों के इतिहास से जोड़कर भी देखा जाता है.

मुस्लिम बहुल देश मॉरिशस से आईं याशिका बतातीं हैं, "नरेंद्र मोदी मॉरिशस में लोकप्रिय नहीं हैं."

लेकिन अधिकतर प्रवासी गुजरात के उद्योगपतियों और व्यापारियों की समृद्धि की वजह से उन्हें गुजरात के सफल मुख्यमंत्री के तौर पर देखते हैं.

फाकी दुबई में लघु उद्योग से जुड़ा व्यापार कर रहे हैं.

अमरीका से आए अंकुर वैद्य न्यूयॉर्क के स्टॉक एक्सचेंज में काम करते हैं. उन्होंने अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी दोनों की तुलना दो तरह के शेयरों से की.

उन्होंने कहा, "जिस कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता है उसके शेयर ख़रीदने में जोखिम होता है. फ़िलहाल नरेंद्र मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड है लेकिन अरविंद केजरीवाल का ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है.''

'प्रदर्शन पर निर्भर'

अंकुर वैद्य के अनुसार आम आदमी पार्टी का भविष्य दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.

उन्होंने कहा, "आम आदमी पार्टी अगर दिल्ली में अपना अच्छा प्रदर्शन साबित कर पाते हैं तभी उन्हें लोकसभा चुनावों में जीतने का कोई मौक़ा मिल सकता है."

कनाडा से आए बलदेव छोंकर देश में सरकार बनाने वाले राजनीतक दल में परपक्वता देखना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में सबको अचंभित कर दिया है. लेकिन एक देश को चलाने के लिए परिपक्वता चाहिए. मुझे लगता है कि मोदी इस काम के लिए अभी सबसे परिपक्व व्यक्ति हैं."

सम्मेलन में शामिल होने आए चेन्नई के हसन ने कहा, "भारत को तानाशाही व्यवस्था नहीं चाहिए. मोदी की प्रसिद्धि 'कॉर्पोरेट भारत' द्वारा समर्थित 'कॉर्पोरेट मीडिया' की वजह से है.''

पिछले कुछ सालों में तेज़ी से मीडिया उद्योग घरानों के हाथों में गया है. ऐसे में हसन की टिपण्णी पड़ताल का विषय हो सकती है.

लेकिन विदेशों में रहने वाले कुछ मुस्लिम भारतीय नागरिक दुबई में लघु उद्योग से जुड़ा व्यापार कर रहे फाकी की तरह भी सोचते हैं.

उन्होंने कहा, "मैं तो मुस्लिम समुदाय से हूँ. मेरा मानना है कि लोक सभा चुनाव में उसे मत देना चाहिए जो भारत के विकास के लिए दूर तक सोच सकता हो, प्रगतिशील विचारधारा का समर्थक हो, और जो केवल दावे करने के अलावा कुछ कर के भी दिखा सके.''

उन्होंने कहा, ''मैं तो बस यही चाहता हूँ कि कोई भी सरकार बनाए, भारत की आगे बढ़ती हुई, विविधतापूर्ण छवि पूरी दुनिया में फैलनी चाहिए."

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