ऑपरेशन ब्लू स्टार पर ब्रितानी संसद में हंगामे के आसार?

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ब्रिटेन में लेबर पार्टी के नेता एड मिलिबैंड ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की मदद के बारे में सरकार से तत्काल संसद में बयान देने की मांग की है. साथ ही मांग की है कि इस बारे में सभी संबद्ध दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं जिसमें एक ब्रितानी अधिकारी के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हमले की इस योजना में मदद करने की बात सामने आई है.

एक बयान में मिलिबैंड ने कहा, "साल 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुआ हमला एक हादसा था. हमला और उसके बाद सिखों के ख़िलाफ़ पूरे भारत में हुई हिंसा में हज़ारों निर्दोष लोग मारे गए."

बयान में उन्होंने कहा है कि ब्रिटेन में रहने वाला सिख समुदाय इस हमले की योजना में ब्रिटेन के शामिल होने की ख़बरों के बाद काफ़ी चिंतित है.

उनका कहना था, "मैं इस मामले की जांच कराने के सरकार के फ़ैसले का स्वागत करता हूं, लेकिन जांच में पूरी तरह से पारदर्शिता होनी चाहिए."

एक दिन पहले ही ख़बर आई थी कि भारत के पंजाब प्रांत में सिखों के स्वर्ण मंदिर पर 1984 में हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में कुछ नए ख़ुफ़िया दस्तावेज़ सामने आए हैं जिनसे इस ऑपरेशन में ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं.

ब्रिटेन सरकार के इन कथित दस्तावेज़ों के मुताबिक़ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुई भारतीय सेना की कार्रवाई में ब्रितानी स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) ने मदद की थी.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इस मामले की पड़ताल के आदेश दिए हैं.

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ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर के निर्देश के बाद ऐसा हुआ था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह मदद किस तरह की थी.

ब्रिटेन की लेबर पार्टी के सांसद टॉम वाटसन का दावा है कि उन्होंने इन दस्तावेज़ों को देखा है. उनके मुताबिक़ ये दस्तावेज़ उस वक़्त की सरकार की भूमिका पर कई सवाल खड़े करते हैं.

वाटसन ने कहा, "गोपनीयता नियम की 30 साल की सीमा पूरी होने के बाद सामने आए दस्तावेज़ों के मुताबिक़ ब्रिटेन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की योजना बनाने और कार्रवाई में भारत सरकार की मदद की थी."

भारत सरकार के श्वेत पत्र के मुताबिक़ ऑपरेशन ब्लूस्टार में चरमपंथियों समेत 554 नागरिक मारे गए थे. हालाँकि सिख संगठनों का दावा है कि इस कार्रवाई में कई हज़ार लोग मारे गए थे.

उन्होंने बीबीसी के एशियन नेटवर्क से कहा, "मैं काफ़ी अचरज में हूं. हम उस अभियान में शामिल रहे जिसमें कई लोगों की मौत हुई और इसके बाद राजनीतिक तनाव पैदा हुआ. यह जानकर मैं काफ़ी परेशान और आहत महसूस कर रहा हूं."

उन्होंने कहा, "ब्रितानी सिख और दुनिया भर में मौजूद मानवाधिकार के हिमायती लोग यह जानना चाहते हैं कि इस मामले में ब्रिटेन की संलिप्तता कहां तक थी. हमें उम्मीद है कि ब्रितानी विदेश मंत्री इन सवालों के जवाब देंगे."

'सिख आहत होंगे'

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Image caption लेबर पार्टी के सांसद टॉम वाटसन का दावा है कि उन्होंने इन दस्तावेज को देखा है.

टॉम वाटसन ने दावा किया है कि इस ख़ुलासे से ब्रितानी ही नहीं दुनिया भर के सिख प्रभावित हो सकते हैं.

वाटसन ने कहा, "ब्रिटेन सरकार और ब्रिटेन में रह रहे सिखों के रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा. सिख समुदाय इससे आहत होगा. इस दस्तावेज़ के महज़ 30 साल पूरे नहीं हुए हैं, बल्कि इसी साल सिख ऑपरेशन ब्लू स्टार की 30वीं वर्षगांठ में मारे गए अपने परिजनों को याद भी कर रहे हैं."

यूके सिख काउंसिल के महासचिव तरसेम सिंह देओल ने बीबीसी से कहा, ''सिख समाज ने ब्रिटेन के लिए बहुत बलिदान दिए हैं. सिख समाज इस जानकारी से बहुत आहत है.''

उधर जून 1984 में भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशन ब्लूस्टार की पूरी कार्रवाई की कमान संभालने वाले लेफ़्टेनेन्ट जनरल केएस बराड़ ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा कि उन्होंने पहली बार आज के अख़बारों में ही इस बारे में पढ़ा है.

उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रिटेन या फिर किसी अन्य सरकार से इस ऑपरेशन के बारे में संपर्क साधे जाने या सहयोग लिए जाने की कोई जानकारी नहीं है.

जून, 1984 में भारतीय सेना ने हरिमंदिर साहिब परिसर से चरमपंथियों को निकालने के लिए स्वर्ण मंदिर परिसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से सैन्य कार्रवाई की थी.

ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ ही दिनों के बाद भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके सिख अंगरक्षकों ने कर दी थी.

इसके बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे, जिसमें दिल्ली में कम से कम तीन हज़ार लोग मारे गए थे.

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