ये दिल्ली की टूरिस्ट पुलिस क्या है?

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दिल्ली में मंगलवार को डेनमार्क की एक महिला के साथ कथित बलात्कार के बाद विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताएं जताई जा रही हैं.

साल 2004 से ही दिल्ली पुलिस का एक ख़ास महकमा पर्यटकों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए शहर में तैनात रहता है लेकिन इसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है.

बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य ने बात की इस दस्ते की देखरेख करनेवाले दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (ऑपरेशंस) टीएन मोहन से और जानीं टूरिस्ट पुलिस के बारे में पांच अहम बातें.

1. कहां रहती है तैनात?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ राजधानी में उनकी 800 पुलिस वैन गश्त लगाती हैं. इनमें से 10 के अंदर ख़ास टूरिस्ट पुलिस तैनात रहती है और वैन के बाहर 'टूरिस्ट पुलिस' लिखा रहता है.

ये 10 वैन पुलिस की तय की गई ऐसी 10 जगहों पर तैनात रहती हैं, जहां सैलानियों की आवाजाही ज़्यादा रहती है. ये वैन गश्त नहीं लगातीं बल्कि एक जगह खड़ी रहती हैं.

ये दस जगहें हैं - इंदिरा गांधी हवाई अड्डा, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन, राजघाट, लाल क़िला, कुतुबमीनार, पालिका बाज़ार, जनपथ, इंडिया गेट और पहाड़गंज

2. क्या हैं ज़िम्मेदारियां?

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टूरिस्ट पुलिस को तैनात करने का मक़सद उन सैलानियों की मदद करना है, जो रास्ता भटक जाएं, ऑटो-टैक्सी-बस का सही किराया जानना चाहें या किसी टुअर ऑपरेटर के बारे में जानकारी लेना चाहें.

साथ ही अगर किसी ने उनसे वाजिब से ज़्यादा पैसे लिए हों या उनके साथ कोई धोखाधड़ी की हो, तो ऐसे दलाल की धरपकड़ करना भी टूरिस्ट पुलिस की ज़िम्मेदारी है.

ये दस्ता गश्त नहीं लगाता और सुरक्षा मुहैया कराना इसकी ज़िम्मेदारी भी नहीं है. हालांकि अगर कोई पर्यटक किसी भी हिंसा की शिकायत लेकर इनके पास आए, तो वो उस पर वैसे ही कार्रवाई करेंगे जैसे बाक़ी दिल्ली पुलिस करती है.

3. कितने पुलिसकर्मी शामिल?

इन दस पीसीआर वैन में से हर एक में एक ड्राइवर और दो पुलिसकर्मी रहते हैं. दोनों पुलिसकर्मी पुरुष होते हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ इस दस्ते के लिए अंग्रेज़ी जानने वाले पुलिसकर्मियों को ही चुना जाता है.

टीएन मोहन के मुताबिक़, "विदेश से आई महिलाएं, पुरुषों से बात करने में हिचकिचाती नहीं हैं और न कोई झिझक महसूस करती हैं. इसलिए अलग से महिला पुलिसकर्मी तैनात करने की कोई ज़रूरत नहीं है."

वैसे दिल्ली में तैनात 800 पुलिस वैन में से 100 में एक महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद होती हैं, लेकिन इनमें टूरिस्ट पुलिस शामिल नहीं है.

4. किस तरह की शिकायतें?

टूरिस्ट पुलिस को मिलने वाली शिकायतों का कोई अलग ख़ाका नहीं बनाया जाता और इन्हें भी आम शिकायतों के साथ निपटाया जाता है.

टीएन मोहन के मुताबिक़, "इनमें से ज़्यादातर जानकारी से संबंधित होती हैं. क़रीब 20 फ़ीसदी दलालों के ख़िलाफ़ होती हैं. शारीरिक चोट और यौन हिंसा के मामले कभी-कभार ही होते हैं."

वह कहते हैं कि हिंसा से जुड़ी शिकायतों के लिए पूरे शहर में पुलिस तैनात है और वो भारतीय नागरिक से लेकर विदेशी सैलानियों तक सभी की मदद करती है.

5. दस्ता बढ़ाने की योजना?

दिल्ली में विदेशी पर्यटकों के ख़िलाफ़ हिंसा की वारदात के मद्देनज़र इनकी सुरक्षा के लिए ख़ास पुलिस फ़ोर्स बनाने की मांग उठती रही है लेकिन फ़िलहाल दिल्ली पुलिस की ऐसी कोई योजना नहीं है.

टीएन मोहन इसे व्यावहारिक नहीं मानते और दावा करते हैं कि जैसे विदेश में भारतीय नागरिकों की मदद वहां के आम पुलिस दस्ते करते हैं, वैसे ही दिल्ली में भी विदेशी पर्यटकों के लिए दिल्ली पुलिस काफ़ी है.

साथ ही वह कहते हैं कि रोज़ औसतन 25 हज़ार कॉल के बोझ तले दबी पुलिस वैन पर पर्यटकों की ज़िम्मेदारी डालने के बजाय इसके लिए पर्यटन विभाग को क़दम उठाने चाहिए.

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