केजरीवाल के कारण उर्दू अख़बारों से भी गायब होते मोदी!

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Image caption मीडिया में मोदी और केजरीवाल की तुलना होने लगी है

बीते हफ़्ते पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में तिजारत के रास्ते भारत पाक के रिश्तों को परवान चढ़ाने की कोशिशों पर टिप्पणी की गई, तो भारत में राहुल गांधी से लेकर नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल से जुड़ी सियासी सरगर्मियों का ज़ोर रहा.

राहुल गांधी को कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित न किए जाने पर राष्ट्रीय सहारा ने लिखा है कि ये अप्रत्याशित नहीं है.

अख़बार के अनुसार अगर राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता तो इसका ये मतलब ये होता कि उन्हें नरेंद्र मोदी से सीधे टक्कर लेनी है जबकि नरेंद्र मोदी जो आक्रामकता दिखा रहे हैं, वो राहुल गांधी के लिए मुमकिन नहीं है.

अख़बार के मुताबिक़ कांग्रेस ने चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित ना कर अपनी परंपरा को निभाया है.

दिल्ली बदनाम हुई

चुनावी सरगर्मियों पर दैनिक सहाफ़त कहता है कि आजकल आम आदमी पार्टी की चर्चा हर तरफ़ है. उसके नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री सबकी तवज्जो का केंद्र है. और इसी का नतीजा है कि नरेंद्र मोदी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से ग़ायब होते जा रहे हैं, जबकि इससे पहले सब जगह मोदी छाए हुए थे,

अख़बार के मुताबिक़ उनका जादू इस कदर चल रहा है कि उनसे बीजेपी के बुज़ुर्ग नेता लाल कृष्ण आडवाणी और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक प्रभावित हैं.

अख़बार के मुताबिक तो दिल्ली में 'आप' को समर्थन देने के कांग्रेस के फ़ैसले का मकसद यही मानते हैं कि मोदी को रोका जाए.

हिंदुस्तान एक्सप्रेस का संपादकीय है दिल्ली फिर बदनाम हुई. दिल्ली में डेनमार्क की एक महिला से हुए सामूहिक बलात्कार पर अखबार लिखता है कि प्रशासन और सरकारी मशीनरी अपनी कोशिश कर के थक चुके हैं लेकिन दिल्ली की बदनामी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

अख़बार के मुताबिक़ विदेशी महिलाओं के साथ ये इस तरह की पहली घटना नहीं है, बल्कि बार बार ऐसी घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धक्का लग रहा है.

बातचीत ही रास्ता

रुख़ पाकिस्तान का करें तो दैनिक खबरें प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के इस बयान पर संपादकीय लिखा है कि सरकार ही नहीं, बल्कि तालिबान से बातचीत सभी दलों को मिल कर करना चाहिए.

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Image caption शरीफ़ सरकार लगातार तालिबान से बातचीत पर ज़ोर देती रही है

ख़ास कर उन्होंने इस काम में इमरान ख़ान, फ़ज़लुर्रहमान, समी उलहक़ और मुनव्वर हुसैन जैसे राजनेताओं से अपना योगदान देने को कहा है.

अख़बार लिखता है कि सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से ही लगातार तालिबान से बातचीत की कोशिश की है लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि कभी इस प्रक्रिया को अमेरिका ने नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो कभी तालिबान अपनी जिद पर अड़ा, यही वजह है कि गृह मंत्री चौधरी निसार अली ख़ान को कहना पड़ा है कि बातचीत का जवाब गोली से देने वालों के ख़िलाफ़ जंग होगी.

अख़बार कहता है कि तालिबान को ये समझना चाहिए कि बातचीत ही सबके हित में है क्योंकि चाहें जितनी भी लड़ाइयां लड़ी जाएं लेकिन आख़िरकार तो बातचीत की मेज़ पर ही आना होगा.

दैनिक दुनिया ने अमरीकी कांग्रेस में पेश उस बिल के बारे में ख़बर दी है जिसके मुताबिक़ पाकिस्तान को मिलने वाली तीन करोड़ तीस लाख डॉलर के साथ अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन को तलाशने में मदद करने वाले डॉ शकील अफ़रीदी की रिहाई और उनके ख़िलाफ़ अमरीका के लिए जासूसी करने के आरोप वापस लेने की शर्त लगाई गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस बिल को डेमोक्रेट्स और विपक्षी रिपब्लिकन, दोनों ही पार्टियों का समर्थन हासिल है.

दैनिक वक्त ने बिजली और गैस की किल्लत की ख़बर दी है जिसके साथ लगाई गई एक तस्वीर में दो महिलाओं खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ियां पीठ पर ले जा रही हैं उनके पीछे प्रधानमंत्री कार्यालय के साइन बोर्ड को देखा जा सकता है.

आज कल में एक कार्टून छपा है जिसमें पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ अस्पताल के बिस्तर पर बैठे एक ज्योतिषी को अपना हाथ दिखा रहे हैं और कह रहे हैं कि ये छोड़ो कि मैं प्रधानमंत्री कब बन पाऊंगा, ये बताओ कि मैं निकल पाऊंगा या नहीं. मुशर्रफ देशद्रोह समेत कई मुकदमे में फंसे हैं.

'पहले कश्मीर, बाद में तिजारत'

वहीं जंग ने भारतीय सेना प्रमुख के इस हालिया बयान पर अपने संपादकीय में टिप्पणी की है कि नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का जवाब दिया जाएगा.

अख़बार के अनुसार ये बड़ी अजीब बात है कि जब भी दोनों देशों के रिश्तों में बेहतरी की कोशिश की जाती है तो जिन वर्गों के हित तल्खियों की आग भड़काने से सधते हैं, वो कोई न कोई ऐसा शोशा छोड़ देते हैं जिससे शांति की दिशा में बढ़ते कदम वापस खिंचने लगते हैं.

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Image caption व्यापार के ज़रिए रिश्तों को सुधारने की बात लंबे समय से होती रही है

इस सिलसिले में अख़बार ने दोनों देशों के बीच सरहद पर फ़ायरिंग की घटनाओं को रोकने के बारे में हुई सहमति का जिक्र किया है.

वहीं नवा-ए-वक्त ने पाकिस्तान व्यापार मंत्री खुर्रम दस्तगीर के भारत दौरे पर संपादकीय लिखा है, व्यापार से पहले कश्मीर समस्या को हल किया जाए.

दोनों देशों के तीन-तीन बैंकों को एक दूसरे के यहां काम करने की अनुमति पर अख़बार का कहना है कि भारत में पाकिस्तानी बैकों को भला कौन काम करने देगा.

अखबार के अनुसार इसलिए दोनों देश पहले विवादति मुद्दों को हल कर लें तो फिर तिजारत भी आसान हो जाएगी.

इसके अलावा भारतीय केंद्रीय मंत्री शशि थरूर का एक पाकिस्तानी पत्रकार के साथ कथित प्रेम प्रसंग और बाद उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध हालात में मौत की खबरें दोनों देशों के उर्दू अखबारों में दिखीं.

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