धरने को लेकर कैसे बदले केजरीवाल के सुर!

सोमनाथ भारती

दिल्ली के दिल में सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के धरने और लोगों के जमावड़े ने एक बार फिर आम आदमी पार्टी और उसकी कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है. मगर दिन भर में कैसे नाटकीय घटनाक्रम में बात यहाँ तक पहुँची मुझे इसका गवाह बनने का मौक़ा मिला.

मुख्यमंत्री केजरीवाल का ये धरना इस रूप तक पहुँच जाएगा, इस बात से बेख़बर मैंने सुबह छह बजे से कुछ समय दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती के साथ गुज़ारने का फ़ैसला किया था.

मक़सद था पार्टी की सरकार के मंत्रियों की कार्यप्रणाली को समझने का. इसके लिए सोमनाथ भारती के साथ मैंने सफ़र शुरू किया.

दिल्ली सचिवालय जाने का सफ़र भारती ने मेट्रो में किया. अरविंद केजरीवाल के धरने में शामिल होने जा रहे एक युवक ने जब मेट्रो में ही क़ानून मंत्री से पूछा कि कहाँ पहुँचना है तब उन्होंने जबाव दिया, "आज धरने पर सिर्फ़ मंत्री और विधायक ही बैठेंगे इसलिए आप घर जाएं."

मेट्रो स्टेशन से सचिवालय तक ऑटो से जाने की हमारी कोशिश क़ामयाब नहीं हो सकी. अरविंद केजरीवाल की धरने की चेतावनी और गणतंत्र दिवस की परेड के कारण जगह-जगह बैरिकेडिंग थी. इस वजह से हमें आईटीओ से सचिवालय तक पैदल ही जाना पड़ा.

दिल्ली सचिवालय में आम आदमी पार्टी की बैठक हुई जिसमें धरना देने का फ़ैसला लिया गया. सरकार के मंत्री अलग-अलग कारों से गृह मंत्रालय के सामने धरना देने के लिए निकले.

मैं सोमनाथ भारती की कार में था. सोमनाथ भारती की कार को गृह मंत्रालय की ओर नहीं जाने दिया गया. भारती किसी भी तरह से गृह मंत्रालय के सामने पहुँचना चाहते थे. सामाजिक कल्याण मंत्री राखी बिड़ला भी अलग कार में आगे ही चल रही थी.

यात्रियों को दिक्कत

इस दौरान एक महिला ने सोमनाथ भारती से कहा, "मंत्री जी आपके इस धरने के कारण हमें बहुत दिक़्क़त हो रही है, पुलिस ने रास्ते बंद कर दिए हैं."

केजरीवाल के धरने के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद रखे गए थे. मेट्रो में भी एक व्यक्ति ने शिकायती लहजे में कहा कि धरने के कारण परेशानी हो रही है. हालाँकि उसी मेट्रो में कई लोग दिल्ली सरकार के मंत्रियों के सड़क पर उतरने से सहमत भी थे.

लोगों की इन शिकायतों पर भारती का कहना था कि ये सब लोगों के लिए ही किया जा रहा है.

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य मंत्रियों को रेल भवन पर ही रोक लिया गया. केजरीवाल के सैंकड़ों समर्थक और चुनिंदा स्वयंसेवक भी साथ थे.

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने केजरीवाल से कहा कि वह और बाक़ी मंत्री 12 बजे के बाद धरने पर बैठ सकते हैं. ऐसा लगा जैसे यही वो वक़्त था जब केजरीवाल ने इस धरने को अनिश्चितकालीन करने का फ़ैसला लिया.

पुलिस की ओर से यह जवाब मिलने के बाद तुरंत धरने की तैयारी की जाने लगी. अब तक धरना स्थल भी तय नहीं था. इसी बीच आम आदमी पार्टी में व्यवस्था का कार्य संभालने वाले एक स्वयंसेवक ने माइक का इंतज़ाम किया.

अनिश्चितकालीन धरना

Image caption यात्रियों को प्रदर्शन से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

रेल भवन के सामने बिजली विभाग के बक्से पर खड़े होकर केजरीवाल जब मीडिया के ज़रिए जनता को संबोधित कर रहे थे तब मेरे इर्द-गिर्द खड़े लोगों को अहसास भी नहीं था कि वह अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा करने जा रहे हैं.

रविवार की रात केजरीवाल ने आम जनता से धरना स्थल पर न पहुँचने की अपील की थी. साथ ही अपनी माँग में ढील देते हुए कहा था कि यदि जाँच होने तक पुलिस अधिकारियों का तबादला भी किया जाता है तब भी वह मान जाएंगे.

लेकिन जब गृह मंत्रालय ने केजरीवाल की सभी माँगें अनसुनी कर दीं तब उन्होंने न सिर्फ़ धरने की घोषणा की बल्कि दिल्ली की जनता से भी धरनास्थल पहुँचने का आह्वान किया.

अरविंद केजरीवाल के इस तरह अचानक अनिश्चितकालीन धरने ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली का माहौल बदल दिया है. और इस बार मुद्दा है दिल्ली पुलिस का कथित भ्रष्टाचार.

धरने की घोषणा करते हुए केजरीवाल ने यह भी कहा कि मैं ज़िद्दी हूँ और व्यवस्था के बदलने तक ज़िद्दी रहूँगा. लेकिन सवाल यह रह जाता है कि केजरीवाल की यह ज़िद जनता की परेशानी बनेगी या जनता इस बार भी उनके साथ होगी.

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