केजरीवाल ऐसे करेंगे तो समर्थन पर विचार: शीला

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के गृहमंत्री के कार्यालय के बाहर धरने देने को लेकर विभिन्न दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

विधान सभा में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता हर्षवर्धन ने कहा, "दिल्ली के मुख्यमंत्री को अगर धरना-प्रदर्शन की राजनीति से फुर्सत नहीं है तो अगर वो चाहें तो हम उन्हें सौ ऐसी बातें बता सकते हैं जिस पर धरना प्रदर्शन और सड़क जाम कर सकते हैं."

हर्षवर्धन ने आगे कहा, "दिल्ली के मुख्यमंत्री को समझना होगा कि जिस तरह उन्होंने चार मेट्रो स्टेशन बंद कराके जनता को मुश्किल पहुँचाई है."

उन्होंने केजरीवाल की आलोचना करते हुए कहा, "उन्हें सरकार चलाने और जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के बीच फ़र्क़ समझना चाहिए."

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केजरीवाल के धरने पर प्रतिक्रिया देते हुए टीवी चैनल एबीपी न्यूज़ से हुए कहा, "जब समर्थन दिया गया था तो वो अनकंडिशनल नहीं था, जहाँ-जहाँ आप जनता के हित की बात करेगी, हम आप को बाहर से समर्थन देंगे लेकिन अगर वो ऐसे काम करेंगे तो हम समर्थन देने पर सोचेंगे."

पद की गरिमा समझें

Image caption दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को पद की गरिमा समझना चाहिए.

शीला ने केजरीवाल के सलाह देते हुए यह भी कहा कि वो एक बहुत बड़े ओहदे पर हैं, उन्हें पद की गरिमा को देखते हुए बात करनी चाहिए. उन्हें अपने वादे पूरे करने चाहिए, न कि अराजकता फ़ैलानी चाहिए.

वहीं भाजपा नेता विजय मल्होत्रा ने कहा है कि ये आम आदमी को नुकसान पहुँचा रहे हैं. शपथ लेने के समय भी इन्होंने मेट्रो स्टेशन बंद करवा दिए थे. इन्होंने दोबारा मेट्रो को बंद करवा दिया है. अगर इन्हें कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए संविधान की शपथ ही क्यों ली थी.

इससे पहले कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार को कांग्रेस का समर्थन एक 'ग़ैर ज़रूरी निर्णय' था.

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी(@thekiranbedi 23m) ने अपने ट्विट में कहा है, "दिल्ली की कमान एक बेकाबू राजनीतिक नेतृत्व के पास है! वो किसकी सुन रहे हैं? क्या वे यह सब अपनी सरकार चलाने के लिए कर रहे हैं या उसे बचान के लिए? "

पहले अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी साथ-साथ थे लेकिन आम आदमी पार्टी शुरू होने के बाद दोनों अलग हो गए.

वहीं केजरीवाल के काफ़िले को दिल्ली पुलिस ने रेल भवन के सामने रोक दिया था. अब केजरीवाल रेल भवन के सामने ही धरने पर बैठ गए हैं.

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