राजस्थान: कांग्रेस में नई ऊर्जा फूंक पाएगें सचिन पायलट?

सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस

लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान कांग्रेस बड़े राजनीतिक बदलाव के दौर में प्रवेश कर गई है. विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक पराजय के बाद अब प्रदेश में इस पार्टी के लिए फिर से पांव जमाना मुश्किल हो रहा था.

नए हालात में पार्टी को खड़ा करने के लिए अब केंद्रीय कंपनी मामलों के राज्यमंत्री सचिन पायलट के हाथों में कमान सौंपी गई है. उन्होंने आज से नए प्रदेशाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है.

विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. चंद्रभान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था. उनका त्यागपत्र मंज़ूर करने के बाद पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले हफ़्ते सचिन पायलट का नाम नए प्रदेशाध्यक्ष के रूप में घोषित किया था.

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के अहम नेता अशोक गहलोत ने नए प्रदेशाध्यक्ष के रूप में पायलट के नाम की घोषणा होते ही पार्टी हाईकमान के इस निर्णय का स्वागत किया था और कहा कि पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के मज़बूत होने की उम्मीद है.

मगर राजस्थान के दूसरे दिग्गज नेता सीपी जोशी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं. जोशी के कुछ नज़दीकी मानते हैं कि वे केंद्रीय राज्यमंत्री लालचंद कटारिया को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के पक्षधर थे.

पायलट का 'संतुलन'

पायलट जातिगत तौर पर गुर्जर समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में मीणा वोटों का ध्यान रखते हुए नेता प्रतिपक्ष के बतौर किसी आदिवासी विधायक को मौक़ा दिया जाएगा. लेकिन प्रदेश का जाट समुदाय राजनीतिक तौर पर काफी ताक़तवर माना जाता है.

इसलिए अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में पहली बार विधायक बने रामेश्वर डूडी को मौक़ा दिया जा रहा है जो जाट समुदाय से हैं. वे एक बार सांसद रह चुके हैं.

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ दिन में प्रदेश की राजनीति काफी तेज़ी से घूमी है और अब एक युवा जाट को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला लिया गया है.

ख़ुद पायलट के मुताबिक़ वे मीणा बहुल दौसा क्षेत्र से सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और मीणा समुदाय से उनके रिश्ते बहुत अच्छे हैं. वैसे भी पायलट को सभी जातियों के बीच संतुलन साधने वाला युवा नेता माना जाता रहा है.

वे कहते हैं कि वे सभी का सहयोग लेकर पार्टी को जितना मज़बूती से खड़ा किया जा सकता है, उसे करेंगे और सभी पुराने और बड़े नेताओं का सहयोग और मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ेंगे.

कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के मुताबिक खुद पायलट ने दौसा और अजमेर जैसे संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया था. पिता राजेश पायलट ने दौसा और भरतपुर क्षेत्रों का संसद में प्रतिनिधित्व किया था, जबकि मां रमा पायलट ने बूंदी, अलवर और झालावाड़ जैसे इलाक़ों में सक्रिय राजनीति की है. इस लिहाज़ से प्रदेश में उनको अच्छा समर्थन मिल सकता है.

गुर्जर-मीणा समीकरण

राजस्थान की राजनीति में यह आम धारणा है कि अगर यहां किसी गुर्जर को अहमियत दी जाती है, तो मीणा समुदाय के नाराज़ होने का ख़तरा रहता है और अगर किसी मीणा को महत्व मिलता है, तो गुर्जर नाराज़ हो जाते हैं. इन दोनों के बीच आरक्षण का विवाद भी है.

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पिछली वसुंधरा सरकार के समय गुर्जरों ने आदिवासी का दर्जा हासिल करने के लिए आंदोलन किया था, जिसमें पुलिस की गोली से कई गुर्जर आंदोलनकारियों की मौत हुई थी. तभी से दोनों समुदायों के बीच रिश्ता तनावों से भरा रहा है.

पायलट को अध्यक्ष बनाने के पीछे कई आधार हैं. वे भाजपा नेता और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का बेहतर विकल्प हो सकते हैं. पायलट का जातिगत आधार तो मज़बूत है ही, वे प्रदेश के युवाओं के बीच भी काफ़ी आकर्षण रखते हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पायलट कांग्रेस में नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं, लेकिन पार्टी संगठन का नेतृत्व उनके हाथ में जाने से स्थानीय मीडिया के ज़रिए यह आम राय उभरकर आई है कि अब प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी जैसे बड़े नेताओं की राजनीति पर विराम लग सकता है.

चुनाव की चुनौती

दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से जुड़े एक प्रमुख नेता का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए एक साथ कई युवा दावेदारों को तैयार करने की नीति पर चल रहे हैं. इसीलिए अब प्रदेश संगठन की ज़्यादातर जिम्मेदारियां नई पीढ़ी के नेता निभाएंगे.

200 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के सिर्फ़ 21 सदस्य ही जीते हैं. भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि पिछली विधानसभा में कांग्रेस के 96 विधायक जीते थे.

पायलट के सामने ताज़ा चुनौती लोकसभा चुनाव की है. राज्य में लोकसभा की 25 सीटें हैं, जिनमें 20 कांग्रेस, चार भाजपा और एक निर्दलीय के पास है. प्रदेश का रुझान यह है कि जिस पार्टी की सरकार होती है, उसी की ज़्यादा सीटें आती हैं.

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