कहीं 'आप' जरूरी मुद्दों से भटक तो नहीं रही?

  • 22 जनवरी 2014
आम आदमी पार्टी के समर्थक Image copyright Reuters

अभी दो हफ्ते भर पहले की ही तो बात है. आम आदमी पार्टी की सदस्यता लेने के लिए लोग उमड़ से पड़े थे और अब हालात कुछ ऐसे हैं कि 'आप' के प्रचंड समर्थक भी कह रहे हैं कि उनका नेतृत्व जरूरी मुद्दों से भटक रहा है.

बीते दिनों 'आप' में शामिल होने वाले महत्वपूर्ण लोगों में से एक कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तौर तरीकों की कड़ी आलोचना की है. विमानन क्षेत्र की कंपनी एयर डक्कन के संस्थापक कैप्टन गोपीनाथ को इस बात का श्रेय दिया जाता है कि उन्होंने सस्ती विमानन सेवा मुहैया कराकर भारत के आम आदमी को हवाई यात्रा कराई.

('धरने पर बैठने को मजबूर हैं अरविंद')

कैप्टन गोपीनाथ ने बीबीसी हिंदी से कहा, "लगातार हो रही गलतियाँ, बिना सोचे समझे किए जाने वाले फैसले और फिर कदम वापस खींचने की कवायद, पुलिस बनने को आतुर एक बावले और बेचैन से कानून मंत्री ने पार्टी के कई समर्थकों, शुभ चिंतकों और सदस्यों को चिंतित कर दिया है."

"'आप' में हाल में शामिल हुए सदस्य इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि पार्टी विकास विरोधी और कम्युनिस्ट समर्थक करार दिए जाने के खतरे की कीमत पर चलाई जा रही है. 'आप' के कट्टर समर्थक रहे मध्य वर्ग के पढ़े लिखे लोगों का समर्थन खोने का भी खतरा है, जिन्होंने इसे सत्ता में पहुँचाया."

पुलिस सुधार

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"पुलिस कर्मियों के निलंबन की मांग जरूरी मुद्दों से भटकने की तरह है. आप बदनसीब जूनियर अफसरों को बलि का बकरा बना रहे हैं जोकि इस सिस्टम के मामूली पुर्जे हैं." कैप्टन गोपीनाथ उन पहले लोगों में से थे जिन्होंने खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को दी गई इजाजत वापस लेने के दिल्ली सरकार के फैसले की आलोचना की थी.

('अविवेक' का नया उत्सव है 'आप'?)

उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को पुलिस सुधारों को लागू करने के लिए धरने पर बैठना चाहिए. भ्रष्टाचार खत्म करने और नेता, पुलिस और अपराधियों के बीच के गठजोड़ को तोड़ने की दिशा में उठाए पहले कदम के तौर पर सभी लोग इसे स्वीकार भी करते.

कैप्टन गोपीनाथ पूछते हैं, "पुलिस प्रशासन को दिल्ली के मुख्यमंत्री के अधीन लाने के लिए कहना उतनी ही बुरी बात है जितना कि इसका केंद्रीय गृहमंत्री के नियंत्रण में रहना. सभी सत्तारूढ़ पार्टियाँ पुलिस के कामकाज में दखल देती हैं. इसलिए इसे दिल्ली के मुख्यमंत्री के तहत ला देने से क्या बदल जाएगा."

"एक राजनीतिक दल के रूप में पार्टी विरोध कर सकती है, उसे करना चाहिए. उन्हें और उनकी कैबिनेट को अपने कार्यालय से काम करना चाहिए. ऐसा न करने पर उन्हें भीड़ को भड़काने वाले के तौर पर देखे जाने का खतरा है. यह संविधान की भावना के भी विरुद्ध है. पार्टी को मिल रही राजनीतिक शुभकामनाओँ को गंवा देना समझदारी भरा कदम नहीं होगा."

धारा 144 का उल्लंघन

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लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कैप्टन गोपीनाथ से इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

('नौटंकी नहीं जनतंत्र है ये')

मणिपाल ग्लोबल फाउंडेशन के चेयरमैन और इन्फोसिस के पूर्व निदेशक एमडी पई कहते हैं, "एक मुख्यमंत्री का धरना पर बैठने का विचार लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है. इससे लोगों में गलत संदेश जाएगा लेकिन केजरीवाल की चिंताएँ वाजिब हैं."

दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती पर हुए विवादों पर एमडी पई नहीं मानते कि आम आदमी पार्टी नस्लभेद करती है. हाल ही में पई और इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ वी बालाकृष्णन को आप ने अपनी आर्थिक नीति बनाने के सिलसिले में संपर्क किया था.

हालांकि अन्ना हजारे के करीबी सहयोगी जस्टिस संतोष हेगड़े की इस पर अलग राय है, "किसी की ओर से धारा 144 का उल्लंघन किया जाना गैरकानूनी है, चाहे वो मुख्यमंत्री ही क्यों न हों. पुलिस प्रशासन के नियंत्रण को लेकर कोई विवाद है तो बातचीत के जरिए या कोर्ट जाकर मसले को सुलझाया जा सकता है."

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