'आधार' कार्ड कितना ज़रूरी, कितना ग़ैरज़रूरी?

आधार कार्ड

'आधार' कार्ड परियोजना भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में गिना जाता है.

कई सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ा गया, कुछ सरकारी सहूलियतों के बारे में ये कहा गया कि आधार के बगैर इनका लाभ नहीं लिया जा सकता.

हालांकि बाद में एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अपरिहार्यता को खत्म करने के पक्ष में अपनी राय जाहिर की.

आधार कार्ड की व्यावहारिकता को लेकर दो स्पष्ट राय है. कुछ लोग इसके पक्ष में है और कुछ इसके विरोध में.

बीबीसी ने इस बारे में अर्थशास्त्री रीतिका खेड़ा और आधार परियोजना से जुड़े रहे और झारखंड के मुख्य सचिव राम सेवक शर्मा से बात कर आधार परियोजना के अलग अलग पहलुओं पर रोशनी डालने की कोशिश की है.

झारखंड के मुख्य सचिव आरएस शर्मा इसके कई फ़ायदे गिनाते हैं लेकिन अर्थशास्त्री रीतिका खेड़ा आधार के बताए जा रहे फ़ायदों से इत्तेफ़ाक नहीं रखतीं.

विरोध मेंः रीतिका खेड़ा, अर्थशास्त्री

एक एक लाभ को बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है. इस कार्ड के बारे में कई दावे किए गए थे जिनमें से कुछ पर मैं बात करना चाहूँगी. यूनिक आइडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया(यूआईडीआईए) ने दावा किया था 'आधार' ज़रूरी है क्योंकि भारतीयों के पास कोई पहचान पत्र नहीं है. यह सच नहीं है.

असलीयत यह है कि बहुत से लोगों के पास एक से ज़्यादा पहचान पत्र होते हैं. जैसे, भारत के दस राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए पीईईपी सर्वेक्षण में हमने पाया कि सर्वेक्षण में भागीदारी करने वाले 1985 लोगों में से 85.6 प्रतिशत लोगों के पास राशन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र या राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गांरटी योजना का कार्ड था.

इनमें से करीब तीन-चौथाई (76 प्रतिशत) लोगों के पास तीनों पहचान पत्र थे. यूआईडीएआई का दावा था कि पहचान पत्र के अभाव में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है. असलीयत यह है कि योजनाओं का लाभ पाने से वंचित रह जाने वाले ज़्यादातर लोगों को लाभ न मिलने का कारण पहचान पत्र का अभाव नहीं होता.

योजनाओं का लाभ

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इसका असल कारण यह है कि ग़रीब लोगों को सरकारी क्रार्यक्रमों में छोड़ा दिया जा रहा है. आधार कॉर्ड होने का यह क़त्तई मतलब नहीं है कि सभी लोगों को आवश्यक रूप से सब्सिडी वाला राशन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलने लगेगी. दूसरी तरफ ऐसे मामले भी हैं जहाँ आधार कार्ड के बिना भी सरकारी योजनाओं का लाभ सभी को मिला.

जैसे, तमिलनाडु में सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली का लाभ सभी को मिलता है. नगद स्थानांतरण के लिए ज़रूरी किए जाने का दावा भी सही नहीं है. 'डाइरेक्ट कैश ट्रांसफर्स' (जैसे कि एलपीजी सब्सिडी को सीधे बैंक अकाउंट में जमा करना) के लिए ज़रूरी है कि सीओआरई (सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन रियर-टाइम इलेक्ट्रानिक) बैंकिंग केंद्र में हर नागरिक का अकाउंट हो.

इलेक्ट्रानिक ट्रासंफर इसी अकाउंट में संभव है. राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना अधिनियम (नरेगा) के तहत मिलने वाली मज़दूरी साल 2008-09 से ही बैंक अकाउंट या पोस्टऑफ़िस खाते में आती रही है. यूआईडीएआई ने दावा किया था कि आधार कार्ड से सरकार से मिलने वाली सविधाएँ ज़्यादा सुविधाजनक हो जाएंगी.

भ्रष्टाचार

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दरअसल यह सही नहीं है. जैसे, छत्तीसगढ़ में आधार संख्या के बिना ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुविधाजनक बना दिया गया है. यूआईडीएआई ने दावा किया था कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए आधार कार्ड ज़रूरी है. लेकिन तमिलनाडु सरकार ने आधार के बिना ही अपने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में त्रुटि को न्यूनतम(10 प्रतिशत से कम) कर दिया है.

छत्तीसगढ़ और ओड़िसा ने भी नरेगा की मज़दूरी के भुगतान में आधार कार्ड के बिना ही त्रुटि को कम करने में सफलता पाई है. बैंक अकाउंट और पोस्टऑफ़िस खाते में मज़दूरी जमा किए जाने से भ्रष्टाचार काफ़ी मुश्किल है.

मेरी राय में 'आधार' की बजाय सरकार को कम्प्यूटरीकरण और स्मार्ट कार्ड्स जैसी तकनीकी रूप से सरल चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए और मौजूदा आधुनिक बैंकिग व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार करना चाहिए.

पक्ष मेंः आरएस शर्मा, मुख्य सचिव, झारखंड

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यह प्रत्येक व्यक्ति की यूनीक पहचान बनाने करने का एक तरीक़ा है और यह पहचान ऑनलाइन होगी. इससे किसी भी व्यक्ति की पहचान कहीं भी सत्यापित की जा सकती है. एक तरफ़ बहुत से लोगों के पास कोई पहचान नहीं है दूसरी तरफ बहुत से लोग मल्टिपल आइडेंटिटी कार्ड का फ़ायदा उठा रहे हैं. इससे एक व्यक्ति की केवल एक ही पहचान बनाई जा सकेगी.

आधार इस देश से बुनियादी स्तर पर रणनीतिक तौर से भ्रष्टाचार ख़त्म करने का एक बड़ा मंच है. आधार कार्ड से सरकार की तरफ़ से मिलने वाली सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में ही जाएगी और इलेक्ट्रॉनिक पुष्टि हो सकेगी . इससे कहीं भी पैसा भ्रष्टाचार में जाने की संभावना ख़त्म होगी.

आधार कार्ड की एक बड़ी सुविधा यह है कि लोगों को हर जगह अपने दस्तावेज़ ले जाने और फ़ोटोकॉपी करने की ज़रुरत नहीं है. बहुत सारे दस्तावेज़ों काम केवल एक आधार कार्ड ही कर देगा. इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन की सुविधा उपलब्ध हो वहाँ तो केवल आधार संख्या बता देना ही काफ़ी होगा. सत्यापन ऑनलाइन ही हो जाएगा.

कुशलता और सटीकता

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एक आधार कार्ड होने से पेंशन, छात्रवृत्ति, ज़मीन के रजिस्ट्रेशन, जल वितरण प्रणाली और टेलीफ़ोन कनेक्शन से लेकर यात्रा की टिकट बुक करने से लेकर यात्रा करने तक बहुत सी सेवाओं तक पहुँच बेहद आसान हो जाती है. वह कहते हैं आधार कार्ड की मदद से बैंक में खाता भी आसानी से खुल जाता है.

आधार कार्ड न केवल व्यक्तिगत स्तर पर सेवाओं तक पहुँच आसान बनाता है बल्कि सरकारी काम-काज को भी सरल कर कर देता है. आधार कार्ड की मदद से प्रशासन अपना काम अधिक कुशलता और सटीकता से कर सकता है. इससे सरकारी काम में होने वाली देरी से भी निपटने में मदद मिलेगी.

आधार कार्ड सरकार को यह सुविधा प्रदान करता है कि वह अपनी योजनाओं का फायदा जनता तक पहुंचा सके.

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