भारत की छोटी कारें कितनी सुरक्षित?

  • 1 फरवरी 2014
ग्लोबल एनसीएपी कार क्रैश टेस्ट

कारों के सुरक्षा मानकों की निगरानी करने वाली एक ब्रितानी संस्था के क्रैश टेस्ट में भारत की पाँच छोटी कार बनानी वाली कंपनियाँ विफल रहीं. क्रैश टेस्ट में यह देखा जाता है कि दुर्घटना होने की स्थिति में यात्रियों के कोई कार कितनी सुरक्षित है.

ग्लोबल एनसीएपी नामक संस्था के टेस्ट से पता चलता है कि इन कारों से दुर्घटना होने की स्थिति में घातक या गंभीर चोटें लग सकती हैं.

जिन कारों का टेस्ट किया गया उनमें सुज़ुकी-मारुति आल्टो 800, टाटा नैनो, फोर्ड फ़िगो, हुंडई आई10 और फ़ॉक्सवैगन पोलो को शामिल किया गया था.

संवाददाता ने बताया कि इन कारों को सस्ता बनाने के लिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में समझौता किया गया.

पिछली साल इन पाँचों कारों की भारत में बिकीं छोटी कारों 20 फ़ीसदी हिस्सेदारी रही थी.

एक अनुमान के मुताबिक़ भारत में बिकने वाली 80 फ़ीसदी कारों की क़ीमत 8000 डॉलर (तक़रीबन 501040 रुपए) से कम है.

सुरक्षा में कमी

एनसीएपी ग्लोबल के प्रमुख मैक्स मोज़्ली ने कहा, "इन कारों की सुरक्षा का स्तर परेशान करने वाला है. यह यूरोप और उत्तरी अमरीका में इस समय आम पाँच सितारा स्तर की सुरक्षा से बीस साल पीछे है." मोज़्ली इंटरनेशनल मोटोरस्पोर्ट के भी प्रमुख रह चुके हैं.

इस टेस्ट के बाद कुछ कार निर्माताओं ने कहा है कि सुरक्षा उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है और वो एनसीएपी के टेस्ट के परिणामों की समीक्षा करेंगे.

जिन पाँच कारों का क्रैश टेस्ट किया गया उनमें से किसी भी एयर बैग नहीं था.

एनसीएपी के अनुसार उत्तरी अमरीका और यूरोप में बिकने वाले इन कारों के समान मॉडल में जो सुरक्षा सुविधाएँ होती हैं उनका भारत में बिकने वाली कारों में अभाव था.

मोज़्ली ने कहा, "ख़राब ढांचे और एयर बैग के अभाव में इन कारों में भारतीय ग्राहकों के जीवन को ख़तरा है."

भारतीय ग्राहकों का जीवन

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एनसीएपी के टेस्ट की परिणाम आने के बाद फ़ॉक्सवैगन ने बिना एयर बैग वाली अपनी पोलो मॉडल कार को बाज़ार वापस ले लिया है.

फ़ोर्ड मोटर के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "हम इस टेस्ट की समीक्षा पर नज़र रखे हुए हैं और इसके बारे में भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे."

टाटा ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि नैनो अपने ढांचे को मज़बूत करने पर विचार कर रही है. कंपनी पहले ही पावर स्टीयरिंग और दूसरे सुविधाओं को कार में जोड़ चुकी है.

भारत में सड़क दुर्घटना में होनी वाली मौतों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है और यह संख्या बढ़ती ही जा रही है.

भारत सरकार के अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार भारत में साल 2012 में सड़क दुर्घटना में तक़रीबन 140,000 लोग मारे गए थे. एनसीएपी के अनुसार सड़क दुर्घटना में मरने वालों में 17 फ़ीसदी कार चालक होते हैं.

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