2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की तीसरी कोशिश

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टू जी स्पेक्ट्रम की नीलामी का तीसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया है जिसमें आठ कंपनियां देशभर में 22 सर्किल में लाइसेंस हासिल करने के लिए हिस्सा ले रही हैं.

इस नीलामी में भारती एयरटेल, वोडाफ़ोन, रिलायंस जिओ इंफोकॉम और पाँच अन्य दूरसंचार कंपनियां होड़ में है. सरकार ने इसका आधार मूल्य 11, 300 करोड़ रुपए रखा है.

उच्चतम न्यायालय ने फ़रवरी 2012 में 122 लाइसेंसों को रद्द कर दिया था. इसके बाद 2012 और 2103 में लाइसेंस बेचने की दो कोशिशों नाकाम हो गई थीं क्योंकि टेलीकॉम कंपनियों ने क़ीमतों को काफ़ी ज़्यादा बताते हुए इसका बहिष्कार किया था.

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ये लाइसेंस पूर्व मंत्री ए राजा के कार्यकाल में जारी किए गए थे. लेकिन इस मामले पर सीएजी (महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में सरकारी खज़ाने को एक लाख 76 हज़ार करोड़ के कथित नुकसान का आरोप लगा था.

भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण राजा को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. हालाँकि राजा ने इन आरोपों से इनकार किया है पर इस पूरे मामले में राजा के खिलाफ़ मुकदमा चल रहा है.

नीलामी

दूरसंचार विभाग ने 1800 मेगाहर्टज़ बैंड में 385 मेगाहर्टज़ स्पेक्ट्रम और 900 मेगाहर्टज़ बैंड में 46 मेगाहर्टज़ स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए रखे हैं.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ तीन कंपनियों को कुछ ख़ास सर्किल में बोली लगाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है. वोडाफ़ोन इंडिया सात और आरकॉम आठ सर्किल में बोली नहीं लगा सकती हैं जबकि टाटा टेलीसर्विसेज को दिल्ली में बोली लगाने की अनुमति नहीं होगी.

वोडाफ़ोन के लिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में स्पेक्ट्रम खरीदना ज़रूरी है. इसी तरह एयरटेल को दिल्ली और मुंबई में तथा लूप मोबाइल को मुंबई में अपना ऑपरेशन जारी रखने के लिए स्पेक्ट्रम खरीदना अनिवार्य है क्योंकि उनके लाइसेंस की अवधि नवंबर में समाप्त हो रही है.

आधार मूल्य में कमी

सरकार ने 1800 मेगाहर्टज़ बैंड में प्रति मेगाहर्टज़ 1765 करोड़ रुपए का आधार मूल्य तय कर रखा है जो कि मार्च की नीलामी से 26 प्रतिशत कम है.

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900 मेगाहर्टज़ के लिए पिछली नीलामी की तुलना में प्रति मेगाहर्टज़ आधार मूल्य 53 प्रतिशत कम रखा गया है. दिल्ली में यह 360 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्टज़, मुंबई में 328 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्टज़ और कोलकाता में 125 करोड़ रुपए रखी गई है.

इस बीच सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के रंजन मैथ्यू ने बीबीसी से कहा, "टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए यह नीलामी काफ़ी अहम है क्योंकि कुछ लाइसेंस इस साल नवंबर में समाप्त हो रहे हैं."

यह नीलामी भी विवादों के घेरे में है. कई कंपनियों ने शिकायत की है कि न केवल स्पेक्ट्रम की क़ीमत बहुत ज्यादा है बल्कि बैंडविड्थ की संख्या भी सीमित है.

2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी को लेकर कंपनियों ने ज़्यादा उत्साह नहीं दिखाया है जबकि साल 2010 में 3 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को क़रीब 15 अरब डॉलर मिले थे.

इंडियन सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के मुताबिक़ भारत में 90 करोड़ से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन कनेक्शन हैं.

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