मदद में जमा पैसे बने दामिनी की 'जान के दुश्मन'

  • 3 फरवरी 2014
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Image caption बबलू और उसकी बेटी दामिनी की इस तस्वीर के बाद बड़े पैमाने पर लोगों ने उसकी मदद की थी

जिसने भी ये तस्वीर देखी होगी वह शायद इसे भुला नहीं पाया होगा. राजस्थान में भरतपुर की इस दामिनी ने जब आँखें खोलीं तो माँ चल बसी और पिता बबलू उसे रिक्शे में झूले की तरह लटकाए घूमता था.

फिर मीडिया में इसकी ख़बर आने के बाद सारे जहाँ ने उसकी मदद की और देखते-देखते कोई सत्रह लाख रुपए जमा हो गए.

दामिनी अब डेढ़ साल की है और उस समय इकट्ठा हुई रकम ही उसकी जान की दुश्मन हो गई है.

भरतपुर पुलिस ने रविवार को बबलू के एक दोस्त को दामिनी के अपहरण के आरोप में गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने दामिनी को बरामद कर उसे भरतपुर की बाल कल्याण समिति को सौंप दिया है.

मगर इसके साथ ही दूसरी जो चौंकाने वाली बात सामने आ रही है, वो है पुलिस का दावा कि दामिनी के पिता बबलू को शराब की लत लग गई है.

वैसे बाल कल्याण समिति की जगह अनजान है मगर समिति के प्रमुख अलोक शर्मा कहते हैं दामिनी पूरी ख़ैरियत से है.

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वह कहते हैं, ''उसे रविवार की रात हल्का बुखार था, अब वह दुरुस्त है. हम उसका पूरा ख्याल रख रहे हैं. अभी छोटी है ना, लिहाज़ा थोड़ी ज़्यादा सार-सँभाल की ज़रूरत है."

भरतपुर पुलिस उस समय हरक़त में आई जब बबलू ने ये कहते हुए मदद माँगी कि उसकी बेटी का अपहरण हो गया है.

पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और दामिनी की खोज में अभियान शुरू किया. पुलिस के मुताबिक, बबलू का दोस्त दामिनी को लेकर रेल में सवार हो गया और फिर भरतपुर के नदबई रेलवे स्टेशन पर उतर गया.

परवरिश

Image caption बबलू और उसकी बेटी दामिनी की फाइल फोटो.

भरतपुर के पुलिस थाने अटलबंध के थानाधिकारी सत्येन्द्र सिंह नेगी कहते हैं, ''हमने बालिका को बरामद कर उसकी मेडिकल जाँच करवाई है, वह ठीक हालत में है. उसे बाल कल्याण समिति को सौंपा गया है. ताकि उसकी ठीक से परवरिश हो सके. इस सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. उससे पूछताछ कर रहे है."

पुलिस के अनुसार शनिवार रात बबलू, उसका दोस्त और एक अन्य व्यक्ति साथ शराब पीकर सो गए. मगर बबलू का दोस्त अगले दिन रविवार को बालिका को उठाकर चुपचाप निकल गया.

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पुलिस का कहना है कि वह गलती से आगरा के बजाय जयपुर जाने वाली ट्रैन में बैठ गया. मगर जब वह नदवई स्टेशन पर उतरा तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, "इन लोगों को लगा कि बालिका के नाम काफी पैसा है. लिहाजा ये पैसा हड़पा जा सकता है. इसीलिए बालिका का अपहरण कर लिया गया. ये अनपढ़ लोग है और ज़्यादा कुछ समझते नहीं है."

हिमायत और दुआ

बाल कल्याण समिति के आलोक शर्मा बताते हैं कि बालिका को मिले पैसे की समुचित निगरानी और उसे दामिनी के हक़ में इस्तेमाल के लिए सरकार ने एक समिति गठित कर रखी है.

शर्मा भी इसके एक सदस्य हैं. ''हर माह समिति आकलन कर एक निश्चित राशि बबलू को देती है ताकि बालिका की परवरिश की जा सके. उसके लिए वस्त्र, आहार और इलाज के लिए ही राशि सरकार की देख-रेख में खर्च की जाती है. दामिनी बड़ी होगी तो उसका भविष्य सँवारने में ये राशि खर्च की जाएगी."

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Image caption दामिनी को नवंबर, 2012 में बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

दामिनी वर्ष 2012 में 15 सितंबर को पैदा हुई. मगर जल्द ही माँ की मौत हो गई. घर में कोई और नहीं था जो सहारा देता इसलिए बबलू ने उसे अपने साथ बाँधकर रिक्शा चलाना शुरू किया. दामिनी की ये दर्दभरी दास्ताँ जब दुनिया को पता चली, हर हाथ हिमायत और दुआ के लिए उठता चला गया.

अब जानकारी मिली है कि बबलू शराब में गाफिल रहने लगा है और उसके इर्द-गिर्द ऐसे ही लोगों का जमावड़ा लगा रहता है जिनकी निगाहें उस रकम पर हैं.

वह नन्हीं सी परी. माँ का साया नहीं और पिता ने जिन हाथों को झूला बनाया था, वे हाथ अब जाम थामे मिलते हैं. बेदर्द ज़माना और एक नन्हीं जान. मगर अब भी मददगारों की कोई कमी नहीं है.

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