आरक्षण पर कांग्रेस ने दिया स्पष्टीकरण

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कांग्रेस ने आरक्षण को लेकर अपने वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी के बयान से किनारा कर लिया है. पार्टी का कहना है कि आरक्षण को लेकर उसकी नीति को लेकर कोई संदेह नहीं है.

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने द्विवेदी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्ति करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही आरक्षण का समर्थन करती रही है और इसे लेकर उसकी नीतियां जगज़ाहिर हैं.

उन्होंने कहा, "जाति आधारित आरक्षण अवश्य जारी रहना चाहिए." पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण को कांग्रेस ने ही लागू किया था और पार्टी ही इसकी सबसे बड़ी समर्थक बनी रहेगी.

कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने जाति के आधार पर आरक्षण को समाप्त करने की मांग करते हुए राहुल गांधी से सभी समुदायों को इसके दायरे में लाते हुए आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए कोटा लागू करने का अनुरोध किया था.

खंडन

द्विवेदी के बयान को उनका 'निजी' विचार बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को कहा कि द्विवेदी "बहुत मंझे हुए और अनुभवी" नेता हैं, और "जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने को लेकर दिया गया बयान उनके निजी विचार हैं."

उन्होंने कहा, "कांग्रेस आज भी वर्तमान आरक्षण नीति को मानती है और उसका ही समर्थन करती है. पार्टी के इस पक्ष पर पुनर्विचार का कोई सवाल ही नहीं है."

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Image caption संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने राज्यसभा में कहा कि सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण पर विचार नहीं कर रही.

यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने इस मामले में संसद में हंगामा किया था. बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल ने लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेता के इस बयान की मंशा पर सवाल उठाए थे.

संसद में हंगामे के बीच राज्यसभा में संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है. संसदीय प्रावधानों के अनुसार आज की तारीख में मिल रहा आरक्षण ही जारी रहेगा."

राजीव शुक्ला के यह स्पष्टीकरण देते वक्त राज्यसभा सदस्य द्विवेदी भी सदन में ही मौजूद थे.

कोई संशय नहीं

जनार्दन द्विवेदी ने मंगलवार को कहा था, "यह (जाति के आधार पर आरक्षण) समाप्त हो जाना चाहिए था. यह अब तक क्यों नहीं हुआ, क्योंकि निहित स्वार्थी तत्व प्रकिया में आ गए. क्या दलितों और पिछड़ों में सभी को आरक्षण का लाभ मिलता है? यह सब ऊपर वालों को मिलता है. सामाजिक न्याय और जातिवाद में अंतर है."

द्विवेदी ने कहा था, "सामाजिक न्याय की अवधारणा अब जातिवाद में बदल गई है... मैं मानता हूं इसे तोड़ने की जरूरत है... चूंकि राहुल गांधी पार्टी घोषणा पत्र के लिए जनता से सीधी राय ले रहे हैं, मैं भी इसका लाभ उठाते हुए उनसे अनुरोध कर रहा हूं कि उन्हें एक बड़ा फैसला करना चाहिए."

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Image caption जनार्दन द्विवेदी ने राहुल गांधी से जाति आधारित आरक्षण ख़त्म करने की मांग की थी.

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा था कि लोगों के आर्थिक आधार पर आरक्षण के बारे में बात की जाए. भविष्य में देश का नेता वही होगा, जो जात-पात के कठघरे को तोड़ेगा, क्योंकि तब ही समानता के आधार पर समाज का निर्माण हो सकेगा.

इससे पहले पार्टी प्रवक्ता शोभा ओझा ने मंगलवार को कहा था कि यह द्विवेदी का नज़रिया है और जब भी पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता अपने विचार प्रकट करता है पार्टी में उसका संज्ञान लेती है और उस पर बहस होती है.

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