वामदलों पर मोदी का निशाना, राष्ट्रपति पर भी टिप्पणी

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पश्चिम बंगाल में अपनी पहली सियासी रैली में भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने तीसरे मोर्चे और वामदलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां भारत को तीसरे दर्ज़े का देश बना देंगी.

मोदी ने गाँधी परिवार पर वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दो मौक़ों पर प्रधानमंत्री न बनने देने का आरोप भी लगाया. मोदी ने कहा कि इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए था.

राष्ट्रपति पर राजनीति

मोदी ने कहा, "प्रणब मुखर्जी इंदिरा की सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री थे. अच्छा होता उस दिन प्रणब को प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया गया होता. बाद में राजीव गाँधी सरकार में प्रणब मुखर्जी को मंत्री परिषद में भी शामिल नहीं किया गया."

मोदी ने कहा, "2004 में भी सोनिया गाँधी चाहती तो प्रणब मुखर्जी को प्रधानमंत्री बना सकती थीं लेकिन नहीं बनाया. वे उस समय भी सबसे वरिष्ठ राजनेता था." यूपीए सरकार में कई महत्पूर्ण पदों पर रहे प्रणब मुखर्जी वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति हैं.

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Image caption कोलकाता रैली में ममता बनर्जी मोदी के निशाने पर नहीं रहीं.

मोदी के आरोपों पर केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, "यह दुखद है कि गुजरात के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति पर राजनीतिक बयानबाज़ी की. मोदी को राष्ट्रपति को राजनीतिक बयानबाज़ी से दूर रखना चाहिए था. "

तिवारी ने कहा, "तथ्य यह है कि राष्ट्रपति भारतीय राष्ट्र के प्रतीक हैं उन्हें पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर माना जाता रहा है और इस मर्यादा को सभी ने बरक़रार रखा है."

वामदलों पर तीखे प्रहार करते हुए मोदी ने कहा कि देश के पूर्वी इलाक़ों को वामदलों ने अपने शासन के दौरान बर्बाद कर दिया जबकि देश का पश्चिमी हिस्सा तरक्की करता रहा क्योंकि वे वहाँ कभी सत्ता में नहीं रहे. मोदी ने कहा कि वामदलों की राजनीति को हमेशा के लिए ख़त्म करने का वक़्त आ गया है.

ममता पर नरम

मोदी ने अपने भाषण में कुछ बंगाली वाक्यों का भी इस्तेमाल किया.

हालाँकि मोदी ने तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना नहीं साधा.

मोदी ने कहा, "बंगाल हमेशा देश को दिशा देता रहा है. लोकसभा में बीजेपी को चुनिए. तृणमूल की सरकार राज्य में काम करेगी और मैं देश में काम करूंगा. प्रतियोगिता हो जाने दीजिए. सिर्फ़ पश्चिम बंगाल की सरकार राज्य की नीयति नहीं बदल सकती. आपको केंद्र सरकार की भी ज़रूरत होगी."

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