क्या आरक्षण पर पुनर्विचार का समय आ गया है?

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आरक्षण अब एक ऐसा मुद्दा बन चुका है, जिसे छेड़ना ख़ुदकुशी करने की तरह है.

कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने हाल में जब जाति के आधार पर आरक्षण को ख़त्म करने की मांग की तो लोग उन पर टूट पड़े.

भाजपा ने कहा कि ये बयान जानबूझ कर दिया गया है ताकि मतदाताओं का ध्यान सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से हटाया जा सके.

इधर मायावती ने भी इसे जनार्दन द्विवेदी के बजाए कांग्रेस पार्टी का बयान माना है और पार्टी से आरक्षण पर अपना पक्ष साफ़ करने की मांग की है.

यही नहीं, जनार्दन द्विवेदी के इस बयान पर कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उन्हें आड़े हाथों लिया है. सोनिया गांधी ने आरक्षण पर कांग्रेस का रुख़ साफ़ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसे ख़त्म करने का कोई इरादा नहीं रखती.

लेकिन आप क्या राय रखते हैं आर्थिक आधार पर आरक्षण की या फिर आरक्षण को बनाए रखने की जरूरत पर.

बताइए अपनी राय बीबीसी इंडिया बोल में इस शनिवार यानी 08 फरवरी को शाम साढ़े सात बजे.

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