उत्तर प्रदेश: अरबों के लैपटॉप का हुआ क्या?

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उत्तर प्रदेश में 2012 के विधान सभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने 12वीं पास छात्र-छात्राओं को मुफ़्त लैपटॉप बांटने का वादा किया था .

चुनाव में मुलायम सिंह की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और उनके पुत्र अखिलेश यादव प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने.

चुनाव पूर्व सपा ने अपने वादे में 10वीं पास करने वाले स्कूली बच्चों को मुफ़्त टैबलेट बांटने का भी फ़ैसला लिया था.

अब तक टैबलेट तो नहीं बंटे लेकिन अखिलेश सरकार क़रीब 15 लाख मुफ़्त लैपटॉप बांटने का दावा ज़रूर कर चुकी है.

इस 'महत्वाकांक्षी' योजना पर लगभग पांच हज़ार करोड़ रूपए लागत की बात दोहराई जाती रही है.

लेकिन शुरुआत से ही योजना के उद्देश्य और उसके नतीजों पर सवाल उठते रहे हैं.

किसका लाभ

सरकार का दावा यही रहा है कि इससे प्रदेश के युवाओं में तकनीक से वाक़फ़ियत बढ़ेगी और ग़रीब बच्चों का भला होगा.

लेकिन पहला सवाल यही उठता है कि क्या प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में लैपटॉप जैसी आधुनिक चीज़ को निरंतर इस्तेमाल करने के लिए बिजली भी है.

सरकारी आंकड़ों की मानी जाए तो प्रदेश में ज़रुरत से सिर्फ़ लगभग 14% बिजली की ही कमी है.

हाल ही में ख़ुद अखिलेश यादव ने कहा है, "वर्ष 2016 तक प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में 18 घंटे और शहरों में 20 घंटे बिजली सप्लाई के लिए काम शुरू होगा".

Image caption प्रशांतो रॉय मुफ़्त लैपटॉप जैसी स्कीम से बिल्कुल इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.

लगभग 20 करोड़ आबादी वाले प्रदेश में पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं.

लगभग 20% प्रतिशत जनसँख्या ऐसी भी है जिसको अस्पताल की ज़रुरत होने पर 50 किलोमीटर तक का सफ़र तय करना पड़ जाता है.

राज्य से गुज़रने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा सड़कों को मरम्मत की ज़रूरत है और सैकड़ों गांवों में सड़कें अभी भी सपना हैं.

आलोचना

प्रदेश में विपक्षी दलों ने शुरुआत से ही लैपटॉप योजना को 'बच्चों के हाथ में झुनझुना थमाने वाली बात' क़रार दिया है.

हालांकि सपा सरकार ने निरंतर इस आरोप का खंडन किया है और कहा है कि 'प्रदेश में व्याप्त डिजिटल-डिवाइड को दूर करना उनकी प्राथमिकता है'.

लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि मुफ़्त लैपटॉप बांटने की योजना एक ख़ास युवा वर्ग को ध्यान में रख कर ज़रूर बनी होगी.

आईटी जगत के वरिष्ठ पत्रकार प्रशांतो रॉय को ऐसी योजनाओं के मक़सद पर संदेह है.

उन्होंने कहा, "आम लोगों का पैसा इस बात में व्यर्थ जाता है और राजनीतिक पार्टियों के लिए ये एक चुनावी मुद्दा बन कर सिमट जाता है. लगातार सुन रहा हूँ कि ऐसी योजनाओं के ख़त्म होने से पहले ही इससे लाभान्वित होने वाले इसमें स्वार्थ और आर्थिक फ़ायदा ढूंढने लगते हैं.''

Image caption अभिषेक मिश्रा का कहना है कि स्कीम ने ज़्यादातर लोगों को फ़ायदा पहुंचाया है.

ऐसी अपुष्ट ख़बरें भी आती रही हैं कि कई बार लैपटॉप स्टोर करने के गोदाम में बारिश का पानी चला गया तो कई बार गोदाम से दसियों लैपटॉप चोरी हो गए.

बीबीसी हिंदी पर आगे आप कुछ ऐसे लोगों के बारे में भी पढ़ेंगे जिन्होंने ख़ुद इन्हें अपने किसी फ़ायदे के लिए बेच दिया है.

जब अखिलेश यादव के क़रीबी और विज्ञान-तकनीक विभाग के मंत्री अभिषेक मिश्रा से मैंने ये सवाल पूछा तो वे भी थोड़े असहज दिखे.

उन्होंने कहा, "करोड़ों की आबादी वाले प्रदेश में कई लोग ऐसे ज़रूर होंगे जिन्होंने इस स्कीम का ग़लत फ़ायदा उठाया होगा. लेकिन मेरे पास सैकड़ों ऐसे लोग आते हैं जो इस बात को मानते हैं कि अगर सपा सरकार उनके बच्चों को ये लैपटॉप मुफ़्त नहीं देती तो उनके लिए ये एक सपना ही रह जाता.''

सच क्या है इसका फ़ैसला बीबीसी हिंदी के पाठकों को करना है.

इस विशेष श्रृंखला में हम आगे आपको ऐसे कुछ लोगों से मिलवाएंगे जिन्होंने अपने लैपटॉप या तो बेच दिए या फिर उसका ऐसा प्रयोग कर रहे हैं जो एक दंडनीय अपराध है.

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