अरविंद केजरीवाल का इस्तीफ़ा

  • 14 फरवरी 2014
अरविंद केजरीवाल, दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है. दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश करने में नाकाम रहने के बाद से ही केजरीवाल के इस्तीफ़े की अटकलें लगाई जा रही थीं.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कार्यालय में शुक्रवार की शाम कार्यकर्ताओं को अपना इस्तीफ़ा दिखाते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वह कैबिनेट के फ़ैसले के अनुसार उप राज्यपाल को इस्तीफ़ा देने जा रहे हैं.

पार्टी कार्यकर्ताओं के शोर-शराबे के बीच केजरीवाल ने कहा, "आठ दिसंबर को जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा हुई थी तब हम लोग यहीं इकट्ठा हुए थे. इसी खिड़की से मैंने सबको संबोधित किया था. हमने 28 सीटें जीती थीं और हमें भरोसा नहीं था कि हमारी सरकार बनेगी."

उन्होंने कहा, "हमने क़सम खाई थी कि हम कांग्रेस और बीजेपी का समर्थन नहीं लेंगे. लेकिन कांग्रेस ने ज़बरदस्ती समर्थन दिया. हमने जनता से पूछकर सरकार बनाई. 28 दिसंबर को हमने सरकार बनाई और शपथ ली. हमारा सबसे बड़ा वादा था कि हम जनलोकपाल बिल पास करेंगे. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून बनाएंगे."

आम आदमी पार्टी के दिल्ली कार्यालय पर मौजूद बीबीसी संवाददाता सलमान रावी का कहना है कि इस्तीफ़े की तैयारियां पहले ही कर ली गईं थीं क्योंकि पार्टी कार्यकर्ताओं को कार्यालय पहुंचने के लिए कहा गया था. सैकड़ों की तादाद में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के ख़िलाफ़ जमकर नारे लगाए.

'बीजेपी-कांग्रेस एक'

बारिश के बीच कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा, "आज विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश करने की कोशिश की गई तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियाँ मिल गईं. आज तक भारत के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ."

उन्होंने आगे कहा, "सभी को यह तो पता है कि बीजेपी और कांग्रेस पर्दे के पीछे मिलते हैं और देश को मिलकर लूट रहे हैं लेकिन पिछले दो दिन में ये खेल भी सबके सामने आ गया. आज दोनों पार्टियों ने जनलोकपाल विधेयक विधानसभा में पेश ही नहीं होने दिया."

केजरीवाल ने कहा, "इन्होंने जनलोकपाल बिल गिरा दिया. ऐसा क्यों हैं? क्योंकि अभी तीन दिन पहले हम लोगों ने मुकेश अंबानी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है."

उनके अनुसार मुकेश अंबानी वो शख़्स हैं जो इस देश की सरकार चलाते हैं.

मुकेश अंबानी पर तीव्र हमले करते हुए केजरीवाल ने कहा, ''यूपीए की सरकार को पिछले दस साल से मुकेश अंबानी चला रहे थे और पिछले एक साल से वो मोदी जी को चला रहे हैं. जैसे ही हमने मुकेश अंबानी पर हाथ रखा ये दोनों एक हो गए.''

केजरीवाल ने कहा कि इसलिए दोनों पार्टियों ने मिलकर जनलोकपाल बिल गिरा दिया. उनके अनुसार दोनों पार्टियों को ये भी डर था कि यदि सरकार चलती रही तो अभी तो मुकेश अंबानी और मोइली को ही पकड़ा है, थोड़े दिनों में शरद पवार की भी बारी आ सकती है.

आख़िर में केजरीवाल ने कहा, "दोस्तों, मैं बहुत छोटा आदमी हूँ. मैं यहाँ कुर्सी के लिए नहीं आया हूँ. मैं यहाँ जनलोकपाल बिल के लिए आया हूँ. आज लोकपाल बिल गिर गया है और हमारी सरकार इस्तीफ़ा देती है. लोकपाल बिल के लिए सौ बार मुख्यमंत्री की कुर्सी न्योछावर करने के लिए तैयार हैं. मैं इस बिल के लिए जान भी देने के लिए तैयार हूँ."

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