ग़ैर-संवैधानिक आदेश नहीं मानूंगा: केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वो केंद्र सरकार के ग़ैर-संवैधानिक आदेश को नहीं मानेंगे.

दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश नहीं हो पाने के बाद वो सदन को संबोधित कर रहे थे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने संविधान की शपथ ली है, केंद्र सरकार के ग़ैर संवैधानिक आदेशों की नहीं.

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के मुकेश अंबानी पर एफ़आईआर दर्ज करने के बाद बीजेपी और कांग्रेस एक हो गए और दोनों ने मिलकर एक साज़िश के तहत जनलोकपाल बिल को पेश नहीं होने दिया.

इस बीच केजरीवाल के इस्तीफ़े की अटकलें तेज़ हो गई हैं. इन अटकलों को केजरीवाल के सदन में दिए गए एक बयान से और हवा मिलने लगी.

सदन को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा था, "मुझे लगता है कि यह हमारा आख़िरी विधानसभा सत्र है." उधर आम आदमी पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय पर उनके सैकड़ों समर्थक जमा हो गए हैं.

पार्टी के एक समर्थक ने कहा कि केजरीवाल को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए क्योंकि कांग्रेस और भाजपा कभी भी जनलोकपाल बिल पास नहीं होने देंगे.

पार्टी के समर्थक नारा लगा रहे हैं, ''अभी तो शीला हारी है, मोदी तेरी बारी है.''

इससे पहले शुक्रवार को जनलोकपाल बिल दिल्ली विधानसभा में पेश नहीं हो सका था.

विधानसभा अध्यक्ष एसएम धीर ने कहा कि सदन के 42 सदस्य विधेयक पेश करने के ख़िलाफ़ हैं इसलिए विधेयक को पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारी हंगामे के बीच सदन में विधेयक पेश करने का ऐलान किया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार भी कर लिया था.

विधेयक पेश करते वक्त बीजेपी और कांग्रेस सदस्यों ने इसे पेश करने का विरोध किया था.

कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली का कहना है कि विधेयक को सदन में प्रस्तुत नहीं माना जा सकता क्योंकि यह क़ानून के विरुद्ध है.

उधर इससे पहले कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने उपराज्यपाल की चिट्ठी पर मतदान का प्रस्ताव किया था. हालांकि लवली ने एक बार फिर कहा कि इसका सरकार के समर्थन से कोई संबंध नहीं है और फ़िलहाल केजरीवाल सरकार को कांग्रेस का समर्थन जारी है.

दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को हंगामे का बाद जब सदन का सत्र दोबारा शुरू हुआ तो विधानसभा अध्यक्ष एमएस धीर ने लेफ़्टिनेंट गवर्नर (एलजी) की चिट्ठी पढ़ी.

उसके इसके बाद बीजेपी सदस्य उस पर मतदान की मांग करते हुए हंगामा करने लगे. कांग्रेस विधायक भी इस पर बीजेपी का समर्थन करते नज़र आए.

कांग्रेस ने एलजी के प्रस्ताव पर वोटिंग करवाने का प्रस्ताव भी रखा लेकिन स्पीकर ने मुख्यमंत्री को जनलोकपाल बिल पेश करने की अनुमति दे दी.

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इसके तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल ने विधेयक प्रस्तुत करने का ऐलान कर दिया. ग़ौरतलब है कि उपराज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को एक चिट्ठी लिखकर उनसे बिल को सदन में पेश करने की इजाज़त नहीं दिए जाने के लिए कहा था.

लेकिन स्पीकर ने उपराज्यपाल की बात को नज़रअंदाज़ करते हुए सरकार को न केवल बिल पेश करने बल्कि उसे अपनी स्वीकृति देते हुए उस पर चर्चा की भी इजाज़त दे दी.

स्थगन

इससे पहले दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल बिल को लेकर जमकर हंगामा हुआ जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाही को 20 मिनट के लिए स्थगित कर दिया था.

इस दौरान स्पीकर ने अपने चैंबर में सभी दलों के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था.

इसके बाद सदन का सत्र जब दोबारा शुरू हुआ तो कांग्रेस, बीजेपी और अन्य सदस्यों की मांग के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष एमएसधीर ने एलजी की चिट्ठी सदन में पढ़ी.

बीजेपी सदस्य इस पर वोटिंग करने की मांग करने लगे लेकिन सरकार ने इसका विरोध किया. सरकार का कहना था कि वोटिंग से पहले इस चिट्ठी पर चर्चा होनी चाहिए.

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इससे पहले शुक्रवार सुबह जब दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह लवली ने सरकार की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा सरकार ने अभी तक कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून यूसुफ़ को जनलोकपाल बिल की कॉपी तक नहीं मुहैया कराई है.

उन्होंने कहा, ''हम भी चाहते हैं कि ऐसा बिल आए जो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़े, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ही नहीं चाहती है.''

'भ्रम फैलाने की कोशिश'

भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष हर्षवर्धन ने कहा कि इस तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है कि बीजेपी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ नहीं लड़ना चाहती है.

उनका कहना था, ''कल केजरीवाल ने फ़ेसबुक पर लिखा कि कल सदन के अंदर इतना हंगामा किया गया कि जनलोकपाल बिल प्रस्तुत नहीं हो सका. कल जनलोकपाल बिल एजेंडा में था ही नहीं तो बीजपी और कांग्रेस ने उसे किस तरह रोका.''

हर्षवर्धन ने दावा किया, "जन लोकपाल बिल के लिए आपकी जितनी प्रतिबद्धता है उससे हज़ार गुना ज़्यादा हमारी प्रतिबद्धता है.''

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बीजेपी नेता ने अपना बयान यह कहकर ख़त्म किया कि लेफ़्टिनेंट गवर्नर (एलजी) की चिट्ठी को स्पीकर सदन के सामने पढ़ें.

बहस में शामिल होते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून युसूफ़ ने कहा, "सोमनाथ भारती ने जो किया था वो उसी सोच का नतीजा है जिसके तहत नार्थ इस्ट के लोगों के साथ नस्ली बरताव हुआ है. इसलिए सोमनाथ को पद से हटाया जाए."

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कोई भी क़ानून होगा तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी लेकिन अगर सदन में क़ानून की धज्जियाँ उड़ाई जाएंगी तो उसका विरोध किया जाएगा.

'एलजी का अपमान बर्दाश्त नहीं'

जद-यू के विधायक शोएब इक़बाल ने रविदास जयंति की छुट्टी रद्द करने पर अफ़सोस जताया.

उन्होंने कहा, "मैं लोकपाल पर आपके साथ हूँ. लेकिन सदन एक सर्कस की तरह लग रहा है."

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उन्होंने कहा "आपने एलजी को जो अपमानित किया, उसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते."

लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इन आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि इससे पहले कई शुक्रवार, जैसे कि 22 मार्च 1996, 30 अगस्त 2013 को सरकारी विधेयक पेश हुए हैं.

उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर 1993, 23 जुलाई 2004 को संपन्न बैठकों में अन्य सरकारी काम भी हुए हैं.

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