कॉल, इंटरनेट के लिए चुकाने होंगे ज़्यादा पैसे?

  • 15 फरवरी 2014

कथित 2जी घोटाले के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए स्पेक्ट्रम लाइसेंसों को भारत सरकार ने 61 हज़ार करोड़ रुपए में दोबारा नीलाम किया है.

बीस साल के स्पेक्ट्रम लाइसेंस के बदले कंपनियों को नीलामी में तय की गई राशि किस्तों में चुकानी है. लेकिन एक मोबाइल यूज़र के लिए इसके क्या मायने हैं, क्या बढ़ जाएंगी कॉल दरें?

नीलामी में लाइसेंस वापस पाकर लगभग सभी बड़ी मोबाइल कंपनियां संतुष्ट नज़र आईं, लेकिन टेलीकॉम क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस निवेश को बाज़ार से वसूलने के लिए मोबाइल कंपनियों को सेवाओं के दर बढ़ाने होंगे.

वरिष्ठ टेक्नोलॉजी लेखक प्रशांतो कुमार रॉय कहते हैं, “नीलामी के बाद मोबाइल सेवाओं की दरें बढ़ना तय है, लेकिन दाम किस हद तक बढ़ेंगे ये बता पाना मुश्किल है. मोबाइल कंपनियां अब तक 3जी, 4जी स्पेक्ट्रम में किए गए निवेशों को नहीं वसूल सकी है और अब 2जी में निवेश कंपनियों पर अतिरिक्त भार डालेगा.”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि कंपनियों के पास प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है और उन्हें ये काम बहुत सावधानी से करना होगा, क्योंकि भारतीय बाज़ार कीमतों को लेकर काफ़ी संवेदनशील है. इसके अलावा प्रीमियम सेवाएँ शुरू कर नए ग्राहक बनाने पर भी कंपनियां ज़ोर देंगी.”

कॉल दरें

भारत में कॉल दरें दुनिया की सबसे सस्ती कॉल दरों में से हैं, लेकिन 2008 में जारी किए गए 122 स्पेक्ट्रम लाइसेंसों को कथित 2जी घोटाले के चलते रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद दरें बढ़ाई गईं थी.

भारतीय टेलीकॉम बाज़ार में अब भी करीब एक दर्ज़न कंपनियां हैं पर अकेले सबसे बड़ी तीन कंपनियों का 70 फ़ीसदी बाज़ार पर कब्ज़ा है.

भारत में सबसे बड़ी मोबाइल कंपनियों में से एक भारती एयरटेल को नीलामी में जीते गए स्पेक्ट्रम लाइसेसों के एवज में 18,530 करोड़ रुपयों का भुगतान करना है, जबकि वोडाफ़ोन को 19,600 करोड़ का भुगतान करना होगा.

हालांकि सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के महानिदेशक राजन मैथ्यू ने बीबीसी हिन्दी के साथ विशेष बातचीत में कहा कि जल्दबाज़ी में क़ीमतें बढ़ाए जाने की संभावना कम है.

“इस साल दाम बढ़ाए जाने की संभावना कम है, लेकिन आने वाले समय में वॉइस कॉल दरों में मामूली सुधार किया जा सकता है. ये देखने वाली बात होगी कि जब नई स्पेक्ट्रम लाइसेंस सक्रिय हो जाएंगे तो डाटा सेवा पर इसका क्या असर पड़ेगा.”

उन्होंने आगे कहा, “डाटा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त निवेश भी करना होगा और एक समय ऐसा आ सकता है जब इनकी क़ीमतों पर दबाव पड़ेगा.”

बेहतर मोबाइल सेवाएं

राजन मैथ्यू का कहना है कि मोबाइल कंपनियों ने सरकार से गुज़ारिश की है कि स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल की क़ीमतों और अन्य सरचार्ज दरों को घटाया जाए.

उनका ये भी कहना है कि ग्रामीण इलाकों में टेलीकॉम सेवाएं पहुंचाने के लिए सरकार को मोबाइल कंपनियों की मदद करनी चाहिए.

हालांकि इस पूरी नीलामी प्रक्रिया में उपभोक्ताओं के लिए भी कुछ अच्छी ख़बर हो सकती है.

प्रशांतो कुमार रॉय कहते हैं कि मोबाइल कंपनियों जब अलॉट किए गए स्पेक्ट्रमों पर काम शुरू करेगी तो इसका सबसे पहले असर वॉइस कॉल सेवा पर पड़ेगा. वॉइस कॉलिंग की क्वालिटी बेहतर होगी और कॉल ड्रॉप जैसी समस्या से निजाद भी मिल सकती है.

इसके अलावा लो-स्पीड डाटा सेवाओं के क्षेत्र में भी बेहतरी हो सकती है. प्री-पेड यूज़र्स के लिए सस्ते दरों के डाटा पैक्स बाज़ार में जारी किए जा सकते हैं.

3जी और 4जी जैसी हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं भी बेहतर होंगी, क्योंकि फिल्हाल 3जी स्पेक्ट्रम पर वॉइस कॉलिंग का ज्यादा भार है जो कि नए 2जी लाइसेंसों के जारी किए जाने के बाद कम हो जाएगी. ऐसे में कंपनियों को हाई-स्पीड डाटा सेवाएं प्रदान करने में सहूलियत मिलेगी.

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