राजीव गांधी हत्याकांड: मौत की सज़ा उम्रक़ैद में तब्दील

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Image caption पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1991 में तमिलनाडु में एक चुनावी रैली के दौरान हुए आत्मघाती धमाके में मारे गए थे

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में मौत की सज़ा पाने वाले तीन लोगों की सज़ा को उम्रक़ैद में तब्दील कर दिया है.

मुख्य न्यायाधीश पी सथाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को इस बारे में अपना फ़ैसला सुनाया.

राजीव गांधी हत्याकांड में संथन, मुरुगन और पेरारीवालन को अदालत ने 1998 में मौत की सज़ा सुनाई थी. उन्होंने साल 2000 में राष्ट्रपति के पास अपनी माफ़ी की अर्ज़ी दी थी.

लेकिन 11 वर्षों के बाद राष्ट्रपति ने उनकी अर्ज़ी ख़ारिज कर दी थी.

पहले उन्हें 2011 में फांसी दी जानी थी लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर उसे रोक दिया गया था. उसके बाद से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ था.

'ऐतिहासिक फ़ैसला'

इन लोगों के वकील मोहित युग चौधरी ने पत्रकारों को बताया, “सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो आदमी फांसी के फंदे के नीचे रहता है, जिसकी दया याचिका पर पहले से इतनी देर हो चुकी है, जाहिर उसे बहुत कष्ट सहना पड़ा है. इन हालात में उनकी मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदलना ही सही होगा.”

एमडीएमके पार्टी के नेता वाइको ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा, “आज ऐतिहासिक दिन है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जाएगा. आज पूरा तमिल समुदाय बहुत ही ख़ुश है और तनाव मुक्त हुआ है.”

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशन ने भी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ख़ुशी जताई है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की सीनियर रिसर्चर दिव्या अय्यर ने कहा, “भारत में अब मृत्युदंड को खत्म कर दिया जाना चाहिए. ये दंड देने का एक बर्बर तरीका है जिसका अपराध रोकने की दिशा में अब तक कोई प्रभावी असर साबित नहीं हुआ है.”

पिछले ही महीने भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 14 लोगों की मृत्यदंड की सज़ा को उम्रकैद में बदला था.

'अफ़सोस'

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Image caption श्रीलंका में कई दशकों तक चले गृह युद्ध में हज़ारों लोग मारे गए

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी मई 1991 में तमिलनाडु में एक चुनावी रैली के दौरान एक आत्मघाती हमले में मारे गए थे.

संथन, मुरुगन और पेरारीवालन श्रीलंकाई तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे के सदस्य रहे हैं. श्रीलंका में अलग तमिल राष्ट्र के लिए संघर्ष करने वाले इस चरमपंथी संगठन को 2009 में ख़त्म कर दिया गया.

राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए 1987 में श्रीलंका में भारतीय शांति सैनिक भेजे थे. उनकी हत्या को इसी का बदला माना जाता है.

लिट्टे ने 2006 में राजीव गांधी की हत्या के लिए अफ़सोस जताया था.

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