तेलंगाना का विरोध तेज़, सीमांध्र में बंद

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लोकसभा में तेलंगाना विधेयक पारित होने के बाद आंध्र प्रदेश के सीमांध्र इलाके में इसके विरोध की आग भड़क गई है. मंगलवार रात से ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.

तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने जहां सीमांध्र के तेरह ज़िलों में बंद का आह्वान किया है, वहीं राज्य सरकार के छह मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

हैदराबाद में स्थानीय पत्रकार धनंजय ने बीबीसी को बताया कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी बुधवार को क़रीब ग्यारह बजे राज्यपाल से मिलने वाले हैं और समझा जाता है कि इस मुलाक़ात के दौरान वो राज्यपाल को इस्तीफ़ा सौंप सकते हैं.

धनंजय के मुताबिक राज्य के कई कांग्रेसी विधायकों ने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफ़ा दे दिया है.

कई छात्र संगठनों ने बुधवार से दो दिनों के बंद का आह्वान किया है. सीमांध्र के सभी ज़िलों के शिक्षण संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है.

परीक्षाएं टलीं

काकीनाड़ा के जवाहर लाल नेहरू तकनीकी विश्वविद्यालय, विजयवाड़ा के कृष्णा विश्वविद्यालय और विशाखापट्टनम के आंध्र विश्वविद्यालय की सभी परीक्षाओं को टाल दिया गया है.

सभी ज़िलों में रात से ही लोगों ने कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया और जगह-जगह सोनिया गांधी के पुतले जलाए गए.

इसके अलावा राज्य में यातायात भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. आशंका जताई जा रही है कि बंद के दौरान यातायात की स्थिति और बिगड़ सकती है. राज्य परिवहन की हज़ारों बसें नहीं चल रही हैं और वो डिपो में ही खड़ी हैं.

लोकसभा में मंगलवार को ये विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ था. उम्मीद है कि बुधवार को इसे राज्य सभा में पेश किया जाएगा.

राज्य के बंटवारे पर सीमांध्र क्षेत्र के सांसदों और मंत्रियों की ओर से किए जा रहे भारी विरोध को नजरअंदाज करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2014' लोकसभा में पेश किया.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा शुरू से ही पृथक तेलंगाना राज्य के पक्ष में रही है.

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