मुज़फ़्फ़रनगर दंगों पर खाप पंचायत का नया फ़रमान

खाप पंचायत

हरियाणा में झज्जर के डाबोदा खुर्द गांव में बुधवार को हुई जाटों की सर्वखाप पंचायत में घोषणा की गई है कि मुज़फ्फ़रनगर मामले में एक मार्च तक किसी भी 'निर्दोष' जाट की गिरफ़्तारी नहीं होने दी जाएगी.

इस सर्वखाप पंचायत में उत्तरप्रदेश समेत सात राज्यों के 650 से अधिक गाँवों से जाट समुदाय के दस हज़ार से अधिक लोग आए थे.

सर्वखाप पंचायत में उत्तरप्रदेश से आए खाप प्रमुखों की मांग पर फ़ैसला किया गया है कि एक मार्च को मुज़फ्फ़रनगर के फ़ुगाना में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों के खाप प्रमुखों की बैठक होगी.

इस बैठक में निर्णय होगा कि मुज़फ्फ़रनगर दंगा मामले पर सरकार और प्रशासन के साथ किस तरह आगे बढ़ना है.

'दंगा पीड़ित जाट'

इस सर्वखाप पंचायत में उत्तरप्रदेश से आए खाप प्रतिनिधियों ने मुज़फ्फ़रनगर के जाटों को 'दंगा पीड़ित' बताया.

उत्तरप्रदेश के शामली के सर्वखाप स्वरूप समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश मलिक ने कहा, ''हमारे ऊपर दबिश दी जा रही है और हमारे बच्चों के ख़िलाफ़ वॉरंट निकाले जा रहे हैं. दंगाग्रस्त क्षेत्र में जाट दंगा-पीड़ित हो गए हैं."

इस बारे में पूछे जाने पर मुज़फ्फ़रनगर के कलेक्टर कौशल राज ने बीबीसी से कहा, "सारा मामला उच्चतम न्यायालय में है और गुरुवार को इस मामले की सुनवाई भी है."

उन्होंने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं है कि किसी एक पक्ष को पीड़ित किया जा रहा है. हरियाणा में जाकर इस मुद्दे पर बात करने से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सकता, उन्हें अपनी बात स्थानीय प्रशासन के सामने या उचित न्यायिक मंचों पर रखनी चाहिए."

कौशल राज ने बताया, "मुज़फ्फ़रनगर दंगा मामले में 650 से अधिक एफ़आईआर दर्ज हुईं थीं जिनमें 6000 से अधिक लोगों को नामज़द किया गया था. जांच के बाद 600-700 लोगों के नाम ही इन मामलों में स्पष्ट हुए हैं. लगभग पचास प्रतिशत गिरफ़्तारियां हुईं हैं, कुछ लोग अभी गांव से भागे हुए हैं."

इस पर ओमप्रकाश मलिक ने कहा, "हमारे गांवों से दूसरे समुदाय के लोग पलायन कर गए हैं. यह सोची-समझी साज़िश है. सैकड़ों निर्दोष लोगों को नामज़द करके रिपोर्ट दर्ज कराई गईं हैं. ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ भी रिपोर्ट दर्ज की गई जो कि गांव में मौजूद भी नहीं थे या अपने घरों में बैठे थे."

'अहिंसात्मक विरोध'

गिरफ़्तारी के मामले में प्रशासन को चुनौती देना कहां तक ठीक है, इस सवाल के जवाब में ओमप्रकाश मलिक कहते हैं, "कुछ दिन पहले पंचायत में यह फ़ैसला किया गया है कि हम अहिंसात्मक विरोध करेंगे. हमारे बच्चे निर्दोष हैं. अगर उनकी गिरफ़्तारी के लिए कोई आएगा तो हम और हमारी महिलाएं और बच्चे उनकी गाड़ियों के सामने लेट जाएंगे."

इस पर मुज़फ़्फ़रनगर के कलेक्टर कौशल राज कहते हैं, "उन्हें जांच में सहयोग देना होगा. केवल यह कहने से काम नहीं चलेगा कि हम इस मामले में शामिल नहीं थे. जो लोग दोषी हैं उन्हें सामने लाने में मदद करें और चश्मदीद गवाह पेश करें.''

उन्होंने कहा, "जिन लोगों को वे निर्दोष घोषित कर रहे हैं, उनके बयान दर्ज कराएं या फिर सबूत पेश करें कि उस दिन वो कहां थे. कितने ही लोग इस तरह से बच भी गए हैं."

इस पर ओमप्रकाश मलिक कहते हैं, "कुछ मामले हत्या और आगज़नी के हुए हैं. हमें नहीं पता कि कौन आगज़नी कर गया लेकिन बलात्कार का कोई मामला नहीं हुआ."

मुज़फ़्फ़रनगर दंगा मामले में बलात्कार के छह मामले दर्ज हुए हैं.

'एकतरफ़ा कार्रवाई'

यह पूछने पर कि कैसे वे इतने भरोसे के साथ कह सकते हैं कि कोई बलात्कार नहीं हुआ? ओमप्रकाश मलिक कहते हैं, ''बलात्कार होता तो पहले उसका मामला दर्ज होता लेकिन पहले आगज़नी और हत्या का मामला दर्ज हुआ और बाद में बलात्कार का."

उन्होंने कहा, "गांव से पलायन और बलात्कार के मामले केवल मुआवज़े के लिए हैं. सरकार एकतरफ़ा कार्रवाई कर रही है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार एक दूसरे पर ज़िम्मेदारी डाल रहे हैं."

उन्हें कहा, "मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के बाद उस इलाक़े में हिंदुओं का ध्रुवीकरण हुआ है. दंगा पीड़ितों से केंद्र सरकार की तरफ़ से जो भी मिलने आया, हिंदुओं के घरों में कोई नहीं आया.''

लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र इलाक़े के रुझान के बारे में पूछने पर ओमप्रकाश मलिक कहते हैं, "इस बार हम ऐसे दल को वोट देंगे जो हिंदुओं के बारे में सोचे और हिंदुओं के बारे में भाजपा सोचती है."

बीते साल सितंबर में मुज़फ़्फ़रनगर और आसपास के इलाक़ों में भड़के दंगों में राज्य सरकार के अनुसार 60 से अधिक लोग मारे गए थे.

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