भारत का सबसे व्यस्त हाइवे हुआ टोल फ्री

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भारत के प्रमुख एक्सप्रेस वे दिल्ली-गुड़गांव से टोल हटा लिया गया है. अब इस हाइवे से नियमित सफर करने वालों को जाम से राहत मिलेगी.

गुड़गांव को दिल्ली से जोड़ रहा 8 मार्ग वाला एक्सप्रेसवे साल 2008 से शुरू किया गया था. तब से ही यह कई कारणों से विवादों में रहा.

दिल्ली-गुड़गांव हाइवे से रोज़ाना क़रीब 200,000 गाड़ियां गुज़रती हैं. कई बार तो इन गाड़ियों को टोल गेट पार करने में 20 मिनट लग जाते हैं.

ये हाइवे दक्षिण एशिया का सबसे व्यस्त हाइवे माना जाता है और एशिया का दूसरा सबसे व्यस्त हाइवे.

इन टोल गेटों से गुज़रने वाले यात्रियों की मुश्किलें सुलझाने के कई प्रयास किए गए. जैसे कि टोल केंद्र पर टैक्स वसूलने के लिए अतिरिक्त खिड़कियां खोली गईं, यातायात पर काबू पाने के लिए ज्यादा लोग तैनात किए गए, मगर समस्या जस की तस रही.

जाम से राहत

' टोल हटाओ संघर्ष समिति' के संयोजक अत्तर सिंह संधू कहते हैं, "रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही थी, क्योंकि टोल केंद्रों पर गाड़ियों की लंबी कतार रोज़मर्रा की बात हो गई थी."

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Image caption दिल्ली-गुड़गांव हाईवे से रोजाना करीब 200,000 गाड़ियां गुजरती हैं

दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले पर इस रास्ते से नियमित रूप से आने जाने वाले यात्री संजू जैन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में खुशी ज़ाहिर की है.

संजू जैन ने कहा है, "यह एक बड़ी राहत है. देश भर में जितने भी टोल टैक्स के केंद्र हैं, उन सबको हटा दिया जाना चाहिए. क्योंकि यहां रोज़ ही लंबा चौड़ा जाम लग जाता था."

जैन के अनुसार, "रोज़ जाम लगने के कारण न केवल वक़्त की बर्बादी होती थी बल्कि बेकार में ईंधन भी खर्च होता था. स्थानीय टोल केंद्रों पर टैक्स देने के बावजूद यात्रियों का सफर आसान नहीं हो रहा था."

बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे पर टोल टैक्स खत्म करने के लिए निजी ऑपरेटरों और राज्य संचालित हाईवे प्राधिकरण सहित दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे के तीन हिस्सेदारों को इजाज़त दी.

टोल ख़त्म कर देने से जो नुकसान होगा उसकी भरपाई के लिए ऑपरेटर अब उन गाड़ियों पर नए टैक्स लगाएंगे जो गुड़गांव टोल गेट से गुज़रती हुई, दिल्ली से लगभग 270 किमी दूर जयपुर शहर तक जाती हैं.

गुरुवार की सुबह गाड़ियां उन 32 टोल गेटों से तेज़ी से गुज़रती दिखीं जिन पर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद टोल टैक्स खत्म कर दिया गया था. यहां टैक्स जमा करने वाले कोई कर्मचारी मौजूद नहीं थे.

विवाद

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रमुख आरपी सिंह ने अंग्रेजी दैनिक 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' को बताया, "यह हम सबकी जीत है. अब दिल्ली-गुड़गांव नियमित सफर करने वालों को काफ़ी राहत मिलेगी."

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Image caption मुंबई में राज ठाकरे ने 'टोल मुक्त अभियान' चलाया था.

दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे भारत की पहली बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक रहा है. इस एक्सप्रेसवे का निर्माण राज्य और निजी कंपनियों ने संयुक्त रूप से किया.

निर्माण के बाद से ही यह हाइवे कई कमियों के कारण विवादों में घिर गया. इन कमियों में आए दिन होने वाले ट्रैफिक जाम, फिसलन भरी सड़कों, पैदल यात्रियों के लिए ओवरब्रिज की कमी और कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप शामिल है.

रोज़ ट्रैफिक जाम से जूझ रहे यात्री और स्थानीय लोग टोल हटाने की मांग करते हुए नियमित रूप से धरना-प्रदर्शन करते रहे. दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद 16 में से 12 टोल गेट हटा लिए गए हैं.

अदालत में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली-गुड़गांव सुपर कनेक्टिविटी लिमिटेड (डीजीएससीएल) और मुख्य वित्त दाता इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईडीएफसी) के बीच त्रिपक्षीय समझौतों की शर्तों को दर्ज किया गया है.

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