विवादास्पद किताब पर क़ानूनी लड़ाई की अपील

द हिंदूज़: एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री इमेज कॉपीरइट BBC World Service

देश विदेश के कई जाने माने शिक्षाविदों ने प्रकाशक पेंगुइन इंडिया से अमरीकी लेखक वेंडी डोनिगर की हिन्दू धर्म पर लिखी गई विवादस्पद किताब ‘द हिंदूज़: एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री’ के बारे में क़ानूनी लड़ाई लड़ने की अपील की है.

आशीष नंदी, पार्था चटर्जी, रोमिला थापर और मार्था नुसबाउम सहित कई शिक्षाविदों ने चेंजडॉटओआरजी पर एक याचिका डाली है जिसमें पेंगुइन से इस मामले में ऊपरी अदालत में लड़ाई लड़ने की अपील की गई है.

इस याचिका में सांसदों, क़ानूनविदों और विधि अधिकारियों से मौजूदा क़ानूनों में बदलाव करने की अपील की गई है ताकि गंभीर अकादमिक और कलात्मक कृति को 'दुर्भावनापूर्ण क़ानूनी पचड़े' से बचाया जा सके.

एक संस्था ने इस किताब पर हिन्दू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

इस महीने की शुरुआत में पेंगुइन इंडिया इस किताब को वापस लेने और उसकी बाक़ी बची प्रतियों को नष्ट करने के लिए सहमत हो गई थी.

पेंगुइन इंडिया ने कहा था कि वह देश के क़ानून का सम्मान करते हुए यह क़दम उठा रही है.

भारतीय क़ानून में बोलकर या लिखकर किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना अपराध है.

समझौता

Image caption डोनिगर ने किताब वापस लिए जाने पर निराशा जताई थी.

'शिक्षा बचाओ आंदोलन' संगठन का कहना था कि इस किताब से हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है और उसने साल 2011 में इसे अदालत में चुनौती दी थी.

पेंगुइन ने इस संस्था के साथ अदालत के बाहर समझौता कर लिया था जिसके बारे में ऑनलाइन जानकारी दी गई थी.

पेंगुइन के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना हुई थी. कई लोगों का कहना था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है.

साथ ही कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि पेंगुइन जैसी बड़ी कंपनी ने कैसे एक अंजान संस्था के आगे 'हथियार डाल दिए'.

डोनिगर ने उनकी किताब को वापस लिए जाने पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि वह इसके लिए प्रकाशक को ज़िम्मेदार नहीं मानती हैं लेकिन उन्होंने भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति पर दुख जताया था.

देश में धार्मिक संगठन जिस तरह से अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंट रहे हैं उससे कई और लोग भी इसके ख़िलाफ़ मुखर हो गए हैं.

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