चिराग पासवान: 'यह पार्टी के अस्तित्व की लड़ाई है'

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लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया रामविलास पासवान के बेटे और पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा है कि उनकी पार्टी गठबंधन के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि इस बारे में पार्टी दो-तीन में कोई निर्णय कर लेगी.

इस बातचीत के दौरान उन्होंने यह उम्मीद भी जताई है कि गठबंधन के मसले पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान अपनी निजी प्राथमिकताओं को दूर रखते हुए पार्टी के हित में फ़ैसला करेंगे.

चिराग पासवान ने पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बताया, "हमने कहा है कि राष्ट्रीय जनता दल के साथ हमारे रिश्ते अच्छे नहीं है. इससे साफ़ ज़ाहिर है कि पार्टी गठबंधन के नए विकल्पों पर मज़बूती से विचार कर रही है."

हालांकि चिराग पासवान ने गठबंधन के लिए भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के साथ बातचीत और सीबीआई की तरफ़ से रामविलास पासवान को समन भेजने की ख़बर पर टिप्पणी से इनकार किया.

लंबा इंतजार

गठबंधन को लेकर दुविधा के बारे में उन्होंने कहा, "हमने राजद और कांग्रेस को पर्याप्त समय दिया क्योंकि हम लोग ईमानदारी से चाहते थे कि हमारा गठबंधन मज़बूती के साथ बना रहे. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से हमने मुलाकात की. हम बिहार के प्रभारी सीपी जोशी के साथ लंबे समय से संपर्क में रहे."

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चिराग पासवान ने कहा कि हर तरह की कोशिशों के बावजूद कांग्रेस या राजद के साथ गठबंधन या सीटों के मुद्दे पर कोई बातचीत ही नहीं हो पाई.

उन्होंने कहा, "ऐसे में पार्टी के संसदीय बोर्ड ने मजबूर होकर फ़ैसला किया कि पार्टी को मौजूदा गठबंधन के अलावा दूसरे मज़बूत विकल्प के बारे में सोचना चाहिए. हम दो-तीन दिन में कोई निर्णय ले लेंगे."

एनडीए में शामिल होने के सवाल पर चिराग पासवान ने कहा, "पार्टी ने अभी ये निर्णय नहीं लिया है कि हम बीजेपी के साथ ही जा रहे हैं. अभी विकल्पों पर चर्चा हो रही है. जहाँ तक नरेंद्र मोदी की बात है तो मैंने कुछ दिन पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से गठित एसआईटी ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है. ऐसे में दंगों का कोई मुद्दा अब रहा नहीं."

गठबंधन का सवाल

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लोक जनशक्ति पार्टी इससे पहले भी एनडीए का हिस्सा रह चुकी है. हालांकि 2002 में गुजरात में हुए दंगों के बाद पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था.

चिराग पासवान ने कहा कि गठबंधन को लेकर कोई भी फ़ैसला "सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे वरिष्ठ नेताओं की भावनाओं और पार्टी के हित में लिया जाएगा."

गठबंधन के मसले पर उनके परिवार में दोराय को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "ऐसी दो अलग सोच नहीं हैं. पार्टी के संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष होने के नाते मेरी ज़िम्मेदारी बनती है कि पार्टी वही निर्णय ले जो पार्टी के हित में हो. यह पार्टी के अस्तित्व की लड़ाई है. ज़रूरी है कि हमारे ज़्यादा से ज़्यादा एमपी जीतकर आएं."

उन्होंने कहा, "इसलिए ऐसे गठबंधन के साथ जाना चाहिए, जिसमें पार्टी को मज़बूती मिलती है. सही मायनों में आप अपने मुद्दों की लड़ाई तभी लड़ सकते हैं, जब आप संसद में मज़बूत हों."

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