भारतीय अर्थव्यवस्था: पिछली तिमाही में उम्मीद से कम वृद्धि दर

  • 28 फरवरी 2014
फैक्ट्री में कर्मचारी Image copyright Reuters

भारत की आर्थिक वृद्धि दर पिछले तिमाही में औसत से कम हो गई है. आर्थिक वृद्धि सलाना 4.8 फ़ीसदी की दर से घटकर दिसंबर तक पिछली तिमाही में 4.7 फ़ीसदी हो गई है.

यह आंकड़ा विश्लेषकों के उम्मीदों से कम है.

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि में यह गिरावट उच्च मुद्रास्फ़ीति, कमज़ोर मुद्रा और विदेशी निवेश में आई कमी की वजहों से हुई है.

2012 में इसी अवधि के दौरान सलाना सकल घरेलू उत्पाद 4.5 फ़ीसदी था.

यह लगातार पांचवा तिमाही है जब भारत की सलाना विकास दर 5% से कम रही है.

बड़ा झटका

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Image caption हर साल 13 लाख लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा किए जाने की जरूरत है.

विनिर्माण क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में 1.9 फ़ीसदी की गिरावट एक बड़ा झटका है. यह क्षेत्र देश की सबसे बड़ी नौकरी उपलब्द्ध कराने वाले क्षेत्रों में माना जाता है.

हालांकि, होटल, परिवहन सुविधाएं और कृषि जैसे सभी क्षेत्रों में काफ़ी वृद्धि देखी गई.

दो साल पहले, भारत की विकास दर 8 फ़ीसदी थी.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि देश को इस रफ़्तार से बढ़ने की ज़रूरत है कि हर साल 13 लाख लोगों के लिए पर्याप्त रोज़गार के अवसर पैदा किया जा सकें.

देश की 1.2 अरब आबादी में से आधे से अधिक आबादी 25 साल से कम उम्र की हैं.

चंद पांडेय उनमें से एक है. उन्होंने हाल ही में एक कार के पुर्ज़े बनाने वाली फ़र्म में अपनी नौकरी खो दी है और दूसरी नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "मैं जिस भी कंपनी में जाता हूं, कंपनी वाले कहते हैं कि मंदी है और उत्पादन कम हो रहा है. वे अभी किसी भी को काम पर नहीं रख रहे हैं. दो या तीन महीने हो गए मैं नौकरी के लिए भटक रहा हूँ, लेकिन हर जगह एक ही जवाब मिलता है."

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