भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का निधन

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Image caption बंगारू लक्ष्मण को 27 अप्रैल 2012 को दिल्ली की एक अदालत ने रिश्वत लेने का दोषी क़रार दिया था.

भारतीय जनता पार्टी के नेता बंगारू लक्ष्मण का हैदराबाद में देहांत हो गया है. बंगारू लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उन्हें पिछले हफ़्ते अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

74 वर्षीय बंगारू लक्ष्मण का राजनीतिक करियर एक स्टिंग ऑपरेशन में फँसने के बाद हशिए पर चला गया था.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने बीबीसी से बातचीत में बंगारू लक्ष्मण के निधन की पुष्टि की.

बंगारू लक्ष्‍मण का जन्म 1939 में आंध्र प्रदेश में हुआ था.

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को 27 अप्रैल 2012 को वर्ष 2001 में एक लाख रूपए की रिश्वत लेने के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने दोषी करार दिया था. जिसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

तहलका का स्टिंग ऑपरेशन 2001 में हुआ था जिसमें उन्हें भाजपा मुख्यालय स्थित उनके कमरे में एक लाख रूपए रिश्वत लेते हुए दिखाया गया.

उस समय भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार थी और लक्ष्मण उसके सबसे प्रमुख घटक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे.

तहलका का वीडियो टेप जारी होने के बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया. बंगारू लक्ष्मण ने उसी दिन इस्तीफ़ा दे दिया. दो दिन बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस और समता पार्टी अध्यक्ष जया जेटली ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दे दिए.

लक्ष्मण इससे पहले 1999 से 2000 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल राज्यमंत्री भी थे.

तहलका कांड

तहलका डॉट कॉम के आरोपों की वजह से बंगारु लक्ष्मण को इस्तीफा देना पड़ा था

भारत की एक वेबसाइट तहलका डॉट कॉम ने 13 मार्च 2001 को एक वीडियो सीडी जारी किया जिसका टीवी चैनलों पर प्रसारण किया गया.

इस सीडी में बंगारू लक्ष्मण को अपने दफ्तर में एक फर्जी रक्षा सौदे के लिए नगद रिश्वत लेते हुए दिखाया गया था.

इस स्टिंग ऑपरेशन में तहलका के पत्रकारों ने खुद को ब्रिटेन की एक फर्जी कंपनी वेस्ट एंड इंटरनेशनल का प्रतनिधि बताकर बंगारू लक्ष्मण से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि वो हाथ में थामे जा सकनेवाले उनके सैन्य उपकरण - थर्मल इमेजर - की सप्लाई के लिए रक्षा मंत्रालय में उनकी सिफारिश करें.

सीडी प्रसारित होने के 11 दिन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश के. वेंकटस्वामी की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया.

बाद में वर्ष 2003 में न्यायाधीश वेंकटस्वामी के इस्तीफा देने के बाद जाँच का काम न्यायमूर्ति एस एन फूकन आयोग को सौंपा गया.

लेकिन 2004 में आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही यूपीए सरकार ने फूकन आयोग को भंग कर जाँच का काम सीबीआई को सौंप दिया.

सीबीआई ने दिसंबर 2004 में बंगारू लक्ष्मण समेत पांच लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कई धाराओं में मामला दर्ज किया.

दो साल बाद 2006 को बंगारू लक्ष्मण के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया.इसके छह साल बाद 2012 में उन्हें सजा सुनाई गई.

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