जाटों को ओबीसी आरक्षण, केंद्र सरकार की मंज़ूरी

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केंद्र सरकार ने जाटों को पिछड़ी जातियों (ओबीसी) की केंद्रीय सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. रविवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया.

इस फ़ैसले से जाटों को केंद्र सरकार के तहत आने वाली नौकरियों में पिछड़े वर्ग की श्रेणी में फ़ायदा मिलेगा. कुल नौ राज्यों में रहने वाले जाट समुदाय के लोगों को इससे लाभ होगा.

यह नौ राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड और राजस्थान (दो जिलों और धौलपुर को छोड़कर)

केंद्र सरकार ने यह फ़ैसला ऐसे समय लिया है जब देश में लोकसभा चुनाव जल्द ही होने वाले हैं.

वहीं यह आशंका भी जताई जा रही है कि केंद्र सरकार के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.

इसकी वजह यह बताई जाती है कि केंद्र सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग के ताज़ा सर्वेक्षण का इंतज़ार किये बिना ही जाट आरक्षण को मंज़ूरी दे ही है.

जाटों समुदाय लंबे समय से ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहा था. ख़ासतौर पर हरियाणा में यह मांग ज़ोर-शोर से उठती रही है. जहां 10 सालों से कांग्रेस की सरकार है. इस चुनाव के दौरान कांग्रेस राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में इस फ़ैसले को दिखा कर वोट मांग सकती है.

वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यूपीए का घटक दल राष्ट्रीय लोक दल भी इस फ़ैसले को दिखा कर जाट मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करेगा. मुज़फ़्फ़रपुर दंगों के बाद से ऐसा लग रहा था कि जाट राष्ट्रीय लोक दल से छिटक रहे हैं.

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