'आधे से ज़्यादा पाकिस्तानी ग़रीबी रेखा से नीचे'

  • 2 मार्च 2014
पाकिस्तान में गरीबी इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत के उर्दू अख़बारों में बीते हफ़्ते नौसेना प्रमुक डीके जोशी के इस्तीफ़े और बिहार की बदलती राजनीति की ख़ास तौर से चर्चा रही तो पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में राजनीतिक चुनौतियों के अलावा तंग होते आर्थिक हालात का ज़िक्र किया गया है.

राष्ट्रीय सहारा कहता है कि हाल में एक पनडुब्बी हादसे के बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी का इस्तीफ़ा सुखद आश्चर्य का अहसास करता है.

अख़बार ने अतीत में झांकते हुए लिखा है कि जब सितंबर 1956 में महबूब नगर ट्रेन हादसे में 112 लोग मारे गए थे तो उस वक़्त के रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफ़ा दे दिया था. लेकिन पिछले दो दशकों में न जाने कितने रेल हादसे हुए कभी किसी रेल मंत्री क्या इस्तीफ़ा दिया?

अख़बार के अनुसार एडमिरल जोशी चाहते तो हादसे पर दुख जताते हुए अपने पद पर बने रह सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

एनजीओ और सियासत

'बिहार में करवट बदलती सियासत'. ये संपादकीय है हमारा समाज का जिसमें कहा गया है कि वफ़ादारियां बदलने और तजुर्बे करने का सिलसिला शुरू हो चुका है. जहां एक तरफ़ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला ने कांग्रेस में शामिल होने एलान कर दिया है, तो दूसरी तरफ़ बिहार में दलित नेता रामविलास पासवान कांग्रेस का साथ छोड़ कर एनडीए का दामन थाम चुके हैं.

अख़बार कहता है कि मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद विश्लेषक अंदाज़ा लगा रहे थे कि अब राज्य में भाजपा की दाल गलनी मुश्किल हो जाएगी लेकिन पासवान के एनडीए के साथ होने के बाद लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस सकते में हैं.

हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने अपने संपादकीय में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने देश में काम करने वाले एनजीओ यानी गैर सरकारी संगठनों की संख्या बताई है जो बीस लाख के आसपास है.

अख़बार कहता है कि हिसाब लगाया जाए तो हर छह सौ लोगों के हिस्से में एक एनजीओ आता है. सवाल ये है कि इतने एनजीओ क्या कर रहे हैं.

अख़बार में गैर सरकारी संगठनों की राजनीतिक वाबस्तगियों का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि कुछ ने बीजेपी की तो कुछ ने कांग्रेस की पनाह ली हुई है जबकि कुछ ने सीधे सीधे आम आदमी पार्टी बना कर सीधे सियासत शुरू कर दी है.

'कठपुतली राष्ट्रपति'

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान में अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव हैं जिनमें करज़ई के उत्तराधिकारी को चुना जाएगा

रुख़ पाकिस्तानी अख़बारों का करें तो अमरीका के साथ सुरक्षा समझौते पर दस्तख़्त न करने के अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के रुख़ पर नवाए वक्त हैरान है.

अख़बार कहता है कि ये तमाशा है क्योंकि जिस कठपुतली अफ़ग़ान राष्ट्रपति ने अमरीकी बैसाखियों के सहारे काबुल की सत्ता हासिल की और उन्हीं बैसाखियों के चलते दो दो कार्यकाल पूरे किए, उसी व्यक्ति को अब सत्ता से हटते समय अफ़ग़ान लोगों से अपनी ज़िदंगी के लिए ख़तरा महसूस हो रहा है.

अख़बार के अनुसार, इन ख़तरों से ख़ुद को बचाने के लिए करज़ई अमरीका को आंखें दिखाकर अफ़ग़ान लोगों की हमदर्दी हासिल करना चाहते हैं. ये सुरक्षा समझौता अफ़ग़ानिस्तान में 2014 के बाद अमरीकी और नैटो सेनाओं की मौजूदगी से जुड़ा है.

दैनिक ख़बरें के संपादकीय में पाकिस्तानी संसद में दिए गए गृह मंत्री निसार अली ख़ान के इस बयान का ज़िक्र है कि राजधानी इस्लामाबाद में ऐसे दो लाख से भी ज़्यादा लोग हैं जिनका राष्ट्रीय डेटाबेस और रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है और पाकिस्तानी राजधानी में तीन सौ घर ऐसे हैं जो विदेशी एजेंसियों ने किराए पर ले रखे हैं.

अख़बार कहता है कि पहले भी ब्लैकवॉटर जैसी एसेंसियों के इस्लामाबाद में घर किराए पर लेने और जासूसी करने जैसे मामले सामने आ चुके हैं. इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है. ख़ास कर अब जब सरकार ने चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का फैसला कर दिया है तो विदेशी एजेंसियों पर नज़र रखना और भी जरूरी है.

'संसद में शराब और चरस'

दैनिक औसाफ़ की ख़बर में विश्व बैंक की ओर से हालिया आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में सिर्फ 0.7 फ़ीसदी लोगों की रोज़ाना की आमदनी दस डॉलर से ज़्यादा है जबकि 76.4 फीसदी लोगों की प्रतिदिन की कमाई ढ़ाई डॉलर से भी कम है.

मौजूदा साल के लिए विश्व वैंक की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में सम्मानजनक जिंदगी गुज़ारने के लिए ढाई डॉलर यानी तीन सौ रुपये प्रति व्यक्ति आमदनी ज़रूरी है लेकिन पाकिस्तान में 76.4 फ़ीसदी आबादी यानी तेरह करोड़ 67 लाख लोग इस आमदनी के महरूम हैं.

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Image caption पाकिस्तान में करोड़ों लोग ग़रीबी में जी रहे हैं

पाकिस्तान के वित्त मंत्री इसाक डार का ये बयान भी अख़बार में है कि पाकिस्तान की 54 फ़ीसदी आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे जिंदगी गुज़ार रही है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को आगे बढ़ना है, तो कर दाताओं की संख्या में इज़ाफ़ा करना होगा.

दैनिक औसाफ़ ने अपने कार्टून में गृह मंत्री चौधरी निसार अली ख़ान के इस बयान पर तंज़ किया गया है जिसमें उन्हें बातचीत में गतिरोध आने के बाद तालिबान को क्रिकेट मैच खेलने की पेशकश की थी. कार्टून में निसार अली ख़ान के सामने एक तालिबान लड़ाके को अपने घुटने से बैट तोड़ते हुए देखा जा सकता है.

पाकिस्तानी सांसद जमशेद दस्ती का ये सनसनीख़ेज़ बयान सब अख़बारों में पहले पन्ने की सुर्खी बना कि 'संसद की लॉजेज में शराब, चरस और लड़कियां'.

दैनिक वक़्त के अनुसार उन्होंने कहा कि संसद लॉजेज में हर साल चार से पांच करोड़ की शराब लाई जाती है, वहां चरम की बदबू आती हैं और मुजरे के लिए वहां लड़कियां लाई जाती हैं. जब वो ये आरोप लगा रहे थे तो उनका माइक बंद कर लिया गया और उनसे स्पीकर के चैंबर में आकर अपनी बात कहने और सबूत पेश करने को कहा गया.

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