आख़िरकार एनडी तिवारी ने रोहित को माना बेटा

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Image caption हाई कोर्ट के आदेश पर एनडी तिवारी का डीएनए परीक्षण हुआ था.

कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा मान लिया है.

रोहित शेखर तक़रीबन छह साल से एनडी तिवारी को अपना पिता साबित करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ रहे थे.

इस दौरान अदालत के आदेश पर एनडी तिवारी को अपना डीएनए टेस्ट कराना पड़ा. इसमें यह साबित हुआ कि एनडी तिवारी ही 34 साल के रोहित शेखर के पिता हैं.

टीवी समाचार चैनल एनडीटीवी से एनडी तिवारी ने कहा, '' मैं यह स्वीकार करता हूँ कि रोहित शेखर मेरे पुत्र हैं. डीएनए टेस्ट से भी यह साबित हुआ है कि वह मेरे जैविक पुत्र हैं.''

लड़ाई से थके

एनडी तिवारी ने रविवार रात रोहित शेखर को अपने घर पर बुलाकर उनसे बात की, ख़बरों के मुताबिक़ उन्होंने रोहित शेखर से कहा कि वो अब लड़ाई से थक गए हैं. उन्होंने कहा, ''इस महान परिवार से संबंधों को लेकर मुझे गर्व है.''

नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश का राज्यपाल रह चुके हैं.

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर एनडी तिवारी को 2012 में पितृत्व परीक्षण कराना पड़ा था. अदालत ने कहा था कि अगर एनडी तिवारी नमूना न दें और ज़रूरत पड़े तो इसमें पुलिस की सहायता ली जाए. इसके खिलाफ एनडी तिवारी सुप्रीम कोर्ट तक गए थे. लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली.

अदालत में मामला

एनडी तिवारी के खिलाफ रोहित शेखर साल 2008 में पहली बार अदालत गए थे. वहाँ उन्होंने दावा किया कि वो कांग्रेस नेता और अपनी माँ उज्जवला शर्मा के पुत्र हैं.

उन्होंने कहा कि वो उस व्यक्ति से यह स्वीकार करवाना चाहते हैं, जो बचपन में जन्मदिन पर उनके घर आते थे और उनके साथ खेलते थे.

दिल्ली हाई कोर्ट अब भी इस मामले की सुनवाई कर रहा है. लेकिन रोहित शेखर ने कहा है कि वह जो चाहते थे, वह उन्हें मिल गया है और वो इसे अदालत के संज्ञान में ले आएंगे.

शेखर ने इस बारे में कहा, ''मैं और मेरी माँ जिस दौर से गुजरे हैं, मैं नहीं चाहता कि उस घाव और उस दर्द को किसी और को सहना पड़े. मुझे उम्मीद है कि हमारे घाव भर जाएंगे.''

उन्होंने कहा कि इस लड़ाई के दौरान उन्हें हार्ट अटैक हुआ और वे अनिद्रा के शिकार हो गए.

उन्होंने यह स्वीकार किया कि यह स्वीकारोक्ति अतीत के कड़वे अनुभवों को कम करने की दिशा में पहला क़दम है.

रोहित शेखर ने कहा, "अगर मैं हक़ जमा लूं तो भी हमारे घाव नहीं भरेंगे. लेकिन मैं अब उनके साथ कुछ समय बिताना चाहता हूँ. हमारे मामले ने एक उदाहरण पेश किया है. उम्मीद करता हूँ कि इससे उन लोगों को मदद मिलेगी, जो इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं."

जब एनडी तिवारी से यह पूछा गया कि क्या वो अपने नए बेटे के साथ समय बिताना पसंद करेंगे तो उन्होंने कहा, ''क्यों नहीं.''

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