'एनडी तिवारी सिर्फ़ मेरे बेटे के पिता हैं'

  • 4 मार्च 2014
नारायण दत्त तिवारी Image copyright BBC World Service
Image caption नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा मान लिया है

तक़रीबन छह साल से कांग्रेस नेता एनडी तिवारी को अपना पिता साबित करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ रहे रोहित शेखर को आख़िरकार जीत मिली.

पितृत्व से जुड़े विवाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को अदालत के आदेश पर अपना डीएनए टेस्ट कराना पड़ा. इसमें यह साबित हुआ कि एनडी तिवारी ही 34 साल के रोहित शेखर के पिता हैं.

बीबीसी ने रोहित शेखर की मां उज्ज्वला शर्मा से बात की.

उज्ज्वला शर्मा ने कहा, ''मेरे लिए यह बहुत बड़ी राहत है. हम बहुत बड़े तनाव से गुज़र रहे थे. अदालत में लड़ाई लड़ना बेहद जटिल और कठिन काम है. लंबा संघर्ष करना पड़ा.''

क़ानूनी दर्जा

एनडी तिवारी के ख़िलाफ़ रोहित शेखर साल 2008 में पहली बार अदालत गए थे. वहां उन्होंने दावा किया कि वो अपनी मां उज्ज्वला शर्मा और कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी के क़रीबी रिश्ते से पैदा हुए हैं.

रोहित की मां मानती हैं कि कम साधन संपन्न होने की वजह से उन्हें काफ़ी जद्दोजहद करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि जैसे-तैसे करके हम लोगों ने न्याय की इस लड़ाई को लड़ा है.

क्या उज्ज्वला शर्मा और उनके बेटे रोहित की लड़ाई बेटा मान लिए जाने तक ही सीमित रहेगी, उज्ज्वला बताती हैं, ''काफ़ी हद तक लड़ाई का मक़सद पूरा हुआ है. अभी एनडी तिवारी जी ने बेटा स्वीकार करने की जो बात कही है, अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद रोहित को उनके पुत्र होने का क़ानूनी दर्जा मिल जाएगा.''

वे मानती हैं कि एनडी तिवारी का रोहित शेखर को बेटा मान लेना बेहद सकारात्मक क़दम है और इस पर विश्वास किया जा सकता है.

वे कहती हैं, ''तिवारी जी ने रोहित को एक छोटे समूह के सामने नहीं बल्कि पूरे भारत के सामने, पूरी मीडिया के सामने बेटा स्वीकारा है. इसलिए मुझे पूर्ण संतोष है.''

पितृत्व परीक्षण

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर एनडी तिवारी को 2012 में पितृत्व परीक्षण कराना पड़ा था. अदालत ने कहा था कि अगर एनडी तिवारी नमूना न दें और ज़रूरत पड़े तो इसमें पुलिस की सहायता ली जाए. इसके ख़िलाफ़ एनडी तिवारी सुप्रीम कोर्ट तक गए थे. लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली.

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी रोहित शेखर के दावों को ग़लत बताते रहे हैं.

अब जब उन्होंने ये रिश्ता ख़ुद स्वीकार किया तो पिता के अपने पुत्र के साथ इस रिश्ते को वे किस तरह परिभाषित करेंगी. इस सवाल के जवाब में रोहित की मां ने कहा, ''रोहित और एनडी तिवारी जी के बीच पिता पुत्र का रिश्ता तो है मगर मेरे साथ उनका रिश्ता एक सह-अभिभावक का रहेगा.''

रोहित को अपना बेटा मान लेने के बाद कई समीकरण बदल जाएंगे. अब घर में परिवार के बीच संवाद की एक नई स्थिति उत्पन्न होगी.

रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा कहती हैं, ''चूंकि तिवारी जी ज़्यादा ताक़तवर हैं तो यह संवाद उनके रवैये पर निर्भर करेगा. उनका रिस्पॉन्स यदि सही होगा तो संवाद की स्थिति भी संतुलित रहेगी.''

उन्होंने इस रिश्ते के प्रति अपनी आशा जताते हुए कहा, ''हालांकि बेटा मान लेने मात्र से परिवार की अनुभूति तो नहीं आई है. बस रोहित की एक शुरूआत हुई है. जहां तक मेरा सवाल है हमने हमेशा उन्हें परिवार की तरह माना है. मगर जब उन्होंने मजबूर कर दिया तो हमें अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा.''

बस मिठास!

छह साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अब क्या पुराने मतभेद भुला दिए जाएंगे. उज्ज्वला शर्मा बताती हैं कि अब यदि कोई रिश्ता होगा तो वह सौहार्द्र का होगा, हम अपने मतभेद भुला देंगे.

तो क्या एनडी तिवारी, रोहित शेखर और उज्ज्वला शर्मा अदालत अपनी लड़ाई, सारी खट्टी बातें भूल जाएंगे?

वे कहती हैं, ''व्यक्ति का रिश्ता मान लेना बहुत बड़ी बात होती है. लड़ाई तो तब की थी कि व्यक्ति रिश्ता ही न माने. रिश्ता मान लेने के बाद तो परिवार के लिए प्यार-दुलार वाला ही रिश्ता होगा. क्योंकि परिवार सहनशीलता और परस्पर क्षमा पर ही टिका होता है.''

वे इस जीत को राष्ट्र की महिलाओं की, एक नागरिक और सच्चाई की जीत मानती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार