पंजाब में मिले कंकालों की जांच शुरू

  • 3 मार्च 2014
अजनाला Image copyright AFP

भारत में पुरातत्वविद इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि पंजाब राज्य में एक कुएं से बरामद किए गए कंकाल उन सैनिकों के तो नहीं, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में हिस्सा लिया था. इससे पहले पंजाब में अमृतसर ज़िले की अजनाला तहसील में कुछ अज्ञात कंकालों की खुदाई का काम रविवार को बंद हो गया था.

अधिकारियों के मुताबिक़ इस खुदाई में अब तक 80 मानव खोपड़ियों के अवशेष मिलने की पुष्टि हो चुकी है और मामले की पूरी तहक़ीक़ात जारी है.

अजनाला तहसील के उप-ज़िला मजिस्ट्रेट सुरिंदर सिंह ने बीबीसी संवाददाता अनुभा रोहतगी को बताया, "मैं खुद देख कर आया हूँ कि कम से कम 80 मानव खोपड़ियों को बरामद किया गया है. हमें शाम तक सरकार और पुरातत्व विभाग को एक रिपोर्ट बनाकर भेजनी है. यहाँ पर स्मारक बनाने की मांग को भी सरकार तक पहुंचाया जा रहा है."

माना जाता रहा है कि 1857 में ब्रितानी सरकार के ख़िलाफ़ भारत में हुए विद्रोह के दौरान लगभग 250 भारतीय मूल के सैनिकों को इस कुँए में 'फ़ेंक दिया गया था'.

हालांकि इस धारणा और आंकड़े की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.

खोज

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अजनाला तहसील में स्थित 'कालियाँ वालां कुआँ' में पिछले लगभग एक वर्ष से खुदाई के ज़रिए करीब 250 पूर्व लापता हुए भारतीय सैनिकों की अस्थियों की खोज जारी थी.

कुएं की खुदाई का काम शोधकर्ताओं और गुरुद्वारा शहीद गंज प्रबंधक कमिटी की देख-रेख में कराया जा रहा था.

सैलानियों के लिए लोकप्रिय रहे 'कालियाँ वालां कुआँ' का नाम हाल ही में बदल कर 'शहीदाँ वालां कुआँ' रख दिया गया था.

इस खुदाई की पैरवी करने वाले प्रमुख लोगों में लेखक और पत्रकार सुरिंदर कोचर भी हैं जिन्होंने बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में और जानकारी दी.

उन्होंने कहा, "शुरुआत में हमारे दावे को कोई भी मानने के लिए तैयार नहीं था. लेकिन फरवरी की खुदाई के दौरान साढ़े सात फ़ुट की ही खुदाई में पहला कंकाल मिला और पहले दिन में ही कुल करीब 25 कंकाल मिले. आखिरकार रविवार तक की खुदाई में, जैसा कि इतिहास में भी दर्ज है, करीब 282 गुमशुदा भारतीय सैनिकों के कंकाल ढूंढ निकाले गए हैं".

'इन्साफ'

सुरिंदर कोचर की मांग है कि मामले में सरकारी दखल जल्द से जल्द हो जिससे इन 'शहीदों' को इंसाफ मिल सके.

उन्होंने कहा, "हमने सभी कंकालों को पूरा सम्मान देते हुए गुरूद्वारे के प्रांगण में रखा है जिससे स्थानीय लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें. इन सभी कंकालों के साथ मेडल, सिक्के और अंगूठियां भी मिलीं हैं."

हालांकि अभी तक पंजाब राज्य के पुरात्तव विभाग ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि बरामद हुए कंकाल उन लापता सैनिकों के ही हैं.

राज्य पुरातत्व विभाग के प्रमुख नवजोत सिंह रंधावा ने बीबीसी को बताया, "इस बारे में अभी तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला है कि ये कंकाल उन भारतीय मूल के सैनिकों के ही हैं जो वर्ष 1857 में कथित तौर पर ब्रितानी सैनिकों के हाथों मारे गए थे. ये भी हो सकता है कि ये कंकाल उन व्यक्तियों के हों जो 1947 के बंटवारे के दौरान हुई हिंसा से बचने के लिए इस कुएं में कूद गए हों. मामले की छानबीन जारी है".

इस बीच स्थानीय अधिकारियों ने मामले की व्यापक जांच के आदेश दे दिए हैं और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है.

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