मेरठ: पाकिस्तान के पक्ष में नारों की जांच शुरू

  • 6 मार्च 2014
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक निजी विश्वविद्यालय के 67 कश्मीरी छात्रों को निलंबित किए जाने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी है.

मेरठ के जिला अधिकारी पंकज यादव नें बीबीसी को बताया है कि जांच का ज़िम्मा अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया है जो पंद्रह दिनों के अन्दर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे.

पिछले रविवार को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में कुछ कश्मीरी छात्रों के पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद तनाव पैदा हो गया था.

इस निजी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर मंज़ूर अहमद ने कश्मीरी छात्रों के निलंबन को जायज़ ठहराते हुए कहा, "छात्रों की तरफ से इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है."

उनका कहना था कि कुछ कश्मीरी छात्रों ने न केवल पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए, बल्कि हॉस्टल की संपत्ति को भी नुक़सान पहुंचाया.

वह कहते हैं कि इस तरह की हरक़त से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव उत्पन्न हो गया था क्योंकि कई छात्रों नें उनका विरोध करना शुरू कर दिया.

'सामूहिक कार्रवाई'

विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि पाकिस्तान का समर्थन करने वाले सिर्फ़ 10-12 छात्र ही रहे होंगे, मगर हॉस्टल में रह रहे बाक़ी छात्रों ने किसी का नाम नहीं बताया, इसलिए सामूहिक कार्रवाई की गयी है.

इस विश्वविद्यालय में कश्मीरी छात्रों की संख्या 300 के आसपास है. जिस घटना की बात की जा रही है, वह सिर्फ मदन ढींगरा हॉस्टल की है जबकि दूसरे हॉस्टलों में भी कश्मीरी छात्र रहते हैं.

घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में ही विरोध प्रदर्शन होने लगे और शायद यही वजह है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बाक़ी कश्मीरी छात्रों से अपने हॉस्टलों में ही रहने को कहा है.

इन हॉस्टलों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गयी है. स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आर के गर्ग ने किसी भी कश्मीरी छात्र से मिलने के लिए अनुमति देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि इससे तनाव बढ़ सकता है.

कुछ छात्रों ने बताया कि घटना के बाद बाक़ी कश्मीरी छात्र अपने-अपने हॉस्टल में ही रह रहे हैं क्योंकि उनसे कहा गया है कि माहौल शांत होने तक कक्षाओं में नहीं जाएँ.

विश्वविद्यालय ने घटना की जांच के लिए अलग से एक कमिटी का गठन किया है जिसका नेतृत्व प्रोफ़ेसर जी के बंसल कर रहे हैं.

मेरठ के जिला अधिकारी का मानना है कि निलंबित किये गए सभी 67 कश्मीरी छात्र दोषी नहीं हैं. वह कहते हैं, "पता चल रहा है कि कुछेक छात्रों ने ऐसा किया. मगर सज़ा हॉस्टल में रह रहे सभी 67 छात्रों को मिली. हम सुनिश्चित करेंगे कि निर्दोष छात्रों के भविष्य पर इसका असर नहीं पड़े.''

वहीँ विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों नें बीबीसी को बताया कि घटना में बेशक चंद कश्मीरी छात्रों का हाथ रहा हो, मगर इसके लिए सभी कश्मीरी छात्रों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. उनका यह भी मानना है कि जिन छात्रों ने क्रिकेट मैच के दौरान पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार