कहां चूक रहे हैं अखिलेश यादव?

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उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों की हड़ताल अब ख़त्म हो गई है. लगभग एक सप्ताह तक पूरा राज्य जिस संकट से जूझ रहा था उससे जिस तेज़ी से अखिलेश यादव की सरकार को निपटना चाहिए था वो हुआ नहीं.

बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण का ख़ुद ही संज्ञान ले लिया.

हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार को स्थिति को संभाल न पाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "सरकार स्थिति से निपटने में असफल रही है."

कोर्ट ने कहा कि 40 मौतें हो चुकी हैं और सरकार के पास स्थिति से निपटने की कोई योजना नहीं दिखती.

राज्य सरकार के इसी ढीले रवैये के लिए बीते मंगलवार को मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव और आज़म ख़ान को काम न करने के लिए भरी सभा में डांट लगाई थी.

साल 2012 और 2014 के बीच अखिलेश यादव सरकार की छवि इतनी ख़राब हो चुकी है कि अब यदि अखिलेश जादू की छड़ी भी घुमाएंगे तो भी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किलें शायद ही कम हों.

मुलायम की हताशा

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ख़ुद मुलायम सिंह प्रदेश सरकार की कार्यशैली से और विधायकों और कार्यकर्ताओं से हताश हैं. लखनऊ में एक मीटिंग में मुलायम ने कहा था कि उनके सीने में भी प्रधानमंत्री बनने की आग धधक रही है और अगर विधायकों और कार्यकर्ताओं का रवैया नहीं सुधरा तो वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे.

मुलायम की यह नाराज़गी एक अगस्त 2012 को शुरू हुई थी. अखिलेश के लगभग दो सालों के कार्यकाल में मुलायम ने सात बार उनको चेतावनी दी है. इसमें दो अवसरों पर तो उन्होंने अखिलेश को भरी सभा में प्रदेश शासन की असफलता के लिए आड़े हाथों लिया.

मुख्यमंत्री के पिता होने के नाते अगर मुलायम, अखिलेश सरकार से नाख़ुश थे तो वे उनको घर में भी समझा सकते थे. ऐसा न करके अगर मुलायम ने सबके सामने अपने बेटे को ख़राब शासन के लिए फटकारा तो उसका एक ही अर्थ निकलता है - उत्तर प्रदेश में जो हालात हैं उनकी वजह से मुलायम सिंह को अपने भविष्य की चिंता है.

पहले तो विधायकों और मंत्रियों की 'गुंडागर्दी' की ख़बरों ने समाजवादी पार्टी की छवि को नुक़सान पहुँचाया और उसके बाद एक के बाद एक 150 से ज़्यादा दंगों के बाद भी सरकार दावा करती रही कि क़ानून-व्यवस्था दूसरे राज्यों की तुलना में यहां बेहतर है.

शिलान्यास

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आचार संहिता लागू हो इससे पहले ही अखिलेश ने कई विकास योजनाओं की घोषणा की है. पिछले 10 दिनों में अखिलेश यादव ने 20,000 करोड़ रुपए की योजनाओं का शिलान्यास किया है.

यह अलग बात है कि अखिलेश के प्रिय प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ हाइवे को बनाने के लिए कोई कंपनी आगे नहीं आई. कई अन्य हाइवे ख़स्ता हाल में हैं. आने वाली गर्मियों में बिजली की स्थिति के बारे में सोच कर अभी से पसीना छूटने लगता है.

बक़ौल मुलायम, अखिलेश अब चापलूसों से घिरे रहना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा था, "मुख्यमंत्री जी, अब आपको 'सर' सुनना अच्छा लगने लगा है."

ऐसे में प्रदेश में शासन कैसा है इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है.

हालांकि मुलायम की फटकार को अखिलेश पिता-पुत्र के बीच की बात कहते हैं. हाल में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने कहा कि ऐसा कौन सा बेटा है जिसने अपने पिता से डांट न खाई हो?

मुख्यमंत्री की मानें तो उत्तर प्रदेश विकास पथ पर अग्रसर है.

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