मध्य प्रदेश: मौसम की मार, मुख्यमंत्री का अनशन

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गुरुवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रिमण्डल के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए. शिवराज का आरोप है कि केंद्र की यूपीए सरकार बरसात और ओलावृष्टि से पीड़ित मध्य प्रदेश की 'अनदेखी' कर रही है.

मध्यप्रदेश में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. परेशान किसान मौत को गले लगा रहे हैं तो वहीं लोकसभा चुनाव के चलते इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी तेज़ हो गई है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चाहते हैं कि इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और केंद्र सरकार पांच हज़ार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का ऐलान करे. इसी मांग को लेकर उन्होंने गुरुवार को अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ उपवास रखा और भाजपा ने प्रदेश में आधे दिन का बंद.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया, “प्रदेश में हुई ओलावृष्टि के मामले में मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन से चार बार मिलने का प्रयास किया. लेकिन प्रधानमंत्री समय देने को तैयार नहीं हैं. यह असंवैधानिक है. केंद्र सरकार को इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करना चाहिए.”

गुरुवार को शिवराज सिंह चौहान का जन्मदिन भी है. उन्होंने प्रदेश में किसानों के हालात को देखते हुए जन्मदिन न मनाने का फ़ैसला किया.

प्राकृतिक आपदा

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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है, “राज्य में ओलावृष्टि के कारण बड़ी प्राकृतिक आपदा आई है. किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार को भी आगे आना चाहिये. राज्य सरकार ने दो हज़ार करोड़ रुपए दिए हैं जो नाकाफी है.”

भाजपा का कहना है कि वो जनता का बताना चाहती है कि केंद्र सरकार किस तरह से उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और केंद्र ने मुश्किल की इस घड़ी में प्रदेश को और किसानों को अकेला छोड़ दिया है.

वही विपक्षी कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने पर लगी हुई है. प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जगह-जगह जाकर किसानों से मिल रहे हैं. कांग्रेस ने राज्य सरकार के ख़िलाफ आज प्रदर्शन का आयोजन कर विधानसभा का घेराव किया. विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि किसान आत्महत्या कर रहे है और प्रशासन मामले की लीपापोती में लगा है.

प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव का कहना है, “मुख्यमंत्री पूरी तरह से ग़लत बात कर रहे है. वो बग़ैर सर्वेक्षण करवाए ही मुआवज़े की मांग कर रहे हैं. जो सरासर ग़लत है. उनका उपवास और बंद पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. उनकी नज़र अब लोकसभा चुनाव पर है जिसके चलते ये सब किया जा रहा है. जबकि प्रशासन आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों पर दबाव डाल रहा है ताकि मामले को रफा-दफा किया जा सके.”

नेता प्रतिपक्ष का कहना

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नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने आरोप लगाया है कि सरकार किसानों के नाम पर नौटंकी कर रही है.

उन्होंने कहा, “ओलावृष्टि के बाद से सरकार अब तक 25 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर ही ख़र्च कर चुकी है. जिससे पता चलता है कि सरकार का मक़सद किसानों की मदद करना नहीं है.”

पिछले एक हफ्ते में हुई बेमौसम बरसात की वजह पूरे प्रदेश में अब तक तीन किसान आत्महत्या कर चुके हैं और तीन ने आत्महत्या का प्रयास किया है. वहीं छह किसानों की मौत अपनी फसल को देखकर लगे सदमे से हो गई है.

सीहोर जिले के 65 साल के किसान ओमकार सिंह की मौत मंगलवार को अपनी फसल को देखकर लगे सदमे से हो गई. ओमकार सिंह ओलावृष्टि के बाद पहली बार अपनी चार एकड़ की फसल को देखने गए थे. उन्होंने जैसे ही अपनी फसल को देखा वह बेहोश होकर गिर पड़े. उन्हें फौरन ज़िला अस्पताल लाया गया जहां उनकी मौत हो गई.

सीएसपी एस आर दंडोतिया ने बताया, “हमें जानकारी है कि एक किसान की मौत सदमे से हो गई है. उसकी जांच की जा रही है.”

आत्महत्या का प्रयास

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वही दमोह और सागर जिले में फसल का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है. दमोह में एक किसान ने आत्महत्या का प्रयास किया तो दूसरे को दिल का दौरा पड़ गया है.

दमोह जिले के बरखेड़ा कलार गांव के 21 वर्षीय किसान सुदेश पटेल ने ज़हरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की कोशिश की. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

पटेल ज़मीन मालिक की ज़मीन पर हिस्सा लेकर खेती कर रहे थे इसके लिए उन्होंने 3 लाख रुपये का लोन लिया था. जब उनकी पूरी खेती बर्बाद हो गई तो वह इस सोच में थे कि कैसे वो अपनी उधारी चुकाएंगे.

मध्य प्रदेश के कृषि विभाग के अनुसार, "ओलावृष्टि ने प्रदेश के 18 जिलों के 640 गांव की लगभग 50 प्रतिशत फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है. वहीं प्रदेश के 37 जिलों में बेमौसम बरसात हुई है."

कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा का कहना है, “भोपाल, इंदौर, होशांगाबाद, नीमच, देवास सागर, दमोह और बालाघाट जिलों में काफी नुक़सान हुआ है. काफ़ी ऐसी जगहें हैं जहां पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो गई है.”

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