मेरठः कश्मीरी छात्रों पर 'देशद्रोह' का मामला दर्ज

मेरठ विश्वविद्यालय

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट करके इसे अवांछित क़दम बताया है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ओमकार सिंह ने बीबीसी को बताया कि स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीके गर्ग की चिट्ठी पर 124-ए (देशद्रोह- इसमें उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है.), 153-ए (धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा आदि के आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देना) और 457 (घर में सेंध लगाकर घुसना) के तहत अज्ञात छात्रों पर मामला दर्ज किया गया है.

विश्वविद्यालय के उप कुलपति महफूज़ अहमद ने बीबीसी से कहा, "हमने घटना वाले दिन चिट्ठी लिखकर उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले सहित छात्रों के निलंबन की भी सूचना दी थी. उसी चिट्ठी में हमने छात्रों को सुरक्षित भेजने की भी मांग की थी. इसी चिट्ठी को आधार बनाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है."

पिछले रविवार को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान विश्वविद्यालय के कुछ कश्मीरी छात्रों को कथित तौर पर पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने और हॉस्टल की संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने का आरोप में निलंबित किया था.

प्रशासन की भूमिका

इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट किया, "कश्मीरी छात्रों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला एक अस्वीकार्य और कड़ी सज़ा है जो उनका भविष्य ख़त्म कर देगा और उन्हें विमुख कर देगा."

उन्होने एक और ट्वीट कर कहा, "मुझे यकीन है कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए विश्वविद्यालय को जो ज़रूरी लगा उसने वह किया लेकिन यूपी सरकार की यह कार्रवाई अवांछित है और इसे वापस लिया जाना चाहिए."

उमर अब्दुल्लाह ने ट्विटर पर ये भी लिखा है कि वे जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात करके देशद्रोह का मामला हटाने की मांग करेंगे.

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि छात्रों के निलंबन में प्रशासन और पुलिस की तरफ से कोई दबाव और भूमिका नहीं रही है.

विश्वविद्यालय के 67 कश्मीरी छात्रों को निलंबित किए जाने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी थी.

इससे पहले मेरठ के जिला अधिकारी पंकज यादव ने बीबीसी को बताया था कि मामले की जाँच अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है जो 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे.

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