छत्तीसगढ़: नक्सल हमले में 16 लोगों की मौत

  • 11 मार्च 2014

छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादियों के हमले में सुरक्षा बल के 15 जवान मारे गए हैं.

मारे गए जवानों में 11 सीआरपीएफ़ की 80वीं बटालियन के हैं, जबकि चार जवान ज़िला पुलिस बल के हैं. इसके अलावा एक आम नागरिक के भी मारे जाने की ख़बर है.

पुलिस प्रवक्ता दीपांशु काबरा के अनुसार इस हमले में सीआरपीएफ़ के दो और ज़िला पुलिस के एक जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं. घायलों को राजधानी रायपुर ले जाने की तैयारी चल रही है.

पुलिस का कहना है कि माओवादी मारे गए जवानों के हथियार भी लूटकर ले गए.

इस इलाक़े में राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण चल रहा है, जिसकी सुरक्षा के लिए पुलिस लगातार गश्त करती रहती है.

पुलिस के मुताबिक माओवादी मारे गए जवानों के हथियार भी लूटकर ले गए.

दीपांशु काबरा के अनुसार ''पुलिस के 40 जवान सड़क निर्माण में लगे लोगों की सुरक्षा के लिए निकले थे, उसी समय माओवादियों ने उन पर हमला किया. इस हमले में कुल 16 लोग मारे गए हैं, जिसमें एक आम नागरिक भी शामिल है.”

दरभा घाटी वही इलाका है, जहां पिछले साल 25 मई को माओवादियों ने हमला करके कांग्रेस के कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल समेत 31 लोगों की हत्या कर दी थी.

कांग्रेस नेता उस इलाक़े में परिवर्तन यात्रा पर थे.

माओवादियों ने ताज़ा हमला उस समय किया है, जब ठीक एक महीने बाद 10 अप्रैल को बस्तर में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.

पुलिस का कहना है कि संदिग्ध माओवादियों ने सुनियोजित तरीक़े से इस वारदात को अंजाम दिया.

अंधाधुंध फ़ायरिंग

पुलिस प्रवक्ता दीपांशु काबरा के अनुसार नक्सलियों ने सड़क के दोनों तरफ से पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की. अधिकांश जवान इसी फ़ायरिंग का शिकार हुए.

पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ के बाद माओवादी घटनास्थल से भाग गए.

घटनास्थल पर मिले ख़ून के निशान के आधार पर पुलिस ने कम से कम दो नक्सलियों के मारे जाने की आशंका व्यक्त की है. इस घटना के बाद पूरे इलाक़े में पुलिस ने तलाशी अभियान तेज़ कर दिया है.

इधर, राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपना दिल्ली का दौरा रद्द करने के बाद आपात बैठक बुलाई है. इसमें राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृहसचिव समेत पुलिस के आला अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है.

दूसरी ओर, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इस घटना को राज्य सरकार की विफलता बताया है.

उन्होंने कहा है कि ''यह हमला राज्य की इच्छाशक्ति के अभाव के कारण हुआ. यह राजनीति का समय नहीं है, लेकिन राज्य सरकार सामाजिक, आर्थिक मुद्दे पर पूरी तरह से असफल रही है. राज्य सरकार ने दरभा में कांग्रेस परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले से सीख नहीं ली.''

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