कितने मिलते हैं बंजारा और जिप्सी

फ़्लेमेंको कलाकार

जिप्सी, ये शब्द सुनते ही ध्यान आते हैं हिप्पी से दिखने वाले लोग जो गाते बजाते हैं और लंबे रास्ते तय करते हैं अपनी मंजिल को ढ़ूढंने के लिए. इन खानाबदोश लोगों को भारत में बंजारा और विदेशों में जिप्सी के नाम से जाना जाता है.

इस 13 मार्च 2014 से 15 मार्च 2014 तक भारत के जोधपुर में ऐसे ही जिप्सी लोगों का जमघट लगेगा क्योंकि यहां चल रहा है जोधपुर फ़्लेमेंको जिप्सी महोत्सव.

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इस महोत्सव का आयोजन भारत में पहली बार हो रहा है और पहली बार ही यहां अपनी कला का जादू बिखेरने देश विदेश से फ़्लेमेंको संगीत औऱ नृत्य के जाने माने कलाकार खिंचे चले आए हैं. आखिर वो क्या है जो उन्हें खींच लाया ?

बंजारा जिप्सी भाई भाई

जोधपुर फ़्लेमेंको जिप्सी महोत्सव में शिरकत कर रहे क्वीन हरीश, जो पिछले 13 साल से राजस्थानी बंजारा लोकनृत्य का दुनियाभर में प्रदर्शन कर रहें हैं और जैसलमेर के एक जिप्सी परिवार से वास्ता रखते हैं.

(जिन्हें यूट्यूब ने बनाया स्टार)

क्वीन हरीश ने बीबीसी से एक खास मुलाकात में बताया कि दरअसल जिप्सी कल्चर की शुरुआत भारत से ही हुई है और यहीं से पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, तुर्की, मकदूनिया से रोमानिया होते हुए स्पेन तक पहुंच गए.

इस बात को सिद्ध करने के लिए हरीश ने हमारे सामने रखे कुछ 'तर्क' जो उन्होंने पिछले 13 सालों में दुनियाभर की जिप्सी संस्कृतियों को महसूस करके निकाले थे.

1. भाषा

इस महोत्सव में हिस्सा लेने स्पेन से आए फ़्लेमेंको कलाकारों की मूल भाषा भले ही स्पेनिश हो लेकिन अपनी बोली में ये भी आंख को आंख, कान को कान, मुंह को मुंह और नाक को नाक ही बोलते हैं जबकि स्पेनिश बोलने वाले बाक़ी लोगों के साथ ऐसा नहीं है.

2. पहनावा

क्वीन हरीश ने बताया कि एक समानता जो जिप्सी और बनजारों में मिलेगी वो ये है कि दोनों के कपड़ों में हाथ से किया गया काम ज़रूर रहता है.

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प्रसिद्ध स्पेनिश नर्तकी तमार गोंजालेज़ ने बताया, "फ्लेमेंको डांस में इस बात पर खास ध्यान दिया जाता है कि हमारे कपड़े बदन को पूरी तरह से ढकें.”

उसी तरह से बंजारा संस्कृति के लोग भी डांस करते समय इस बात का ख़्याल रखते हैं.

3. खान पान

क्वीन हरीश ने बताया कि खान पान में जिप्सी लोग, चाहे वो स्पेनिश हों या भारतीय यानी बंजारे, दोनों ही मसालेदार मांसाहारी व्यंजन खाना ही पसंद करते हैं.

लेजेंडरी फ्लेमेंको आर्टिस्ट पेपे के मुताबिक़ उन्हें भारत का खाना और खासकर तंदूरी चिकन बेहद प्रिय है और स्पेन में भी उन्हें ये खान-पान याद आता है.

4. पारिवारिक मूल्य

क्वीन हरीश ने बताया कि अफ़गानिस्तान, तुर्की, मकदूनिया से लेकर रोमानिया आप कहीं भी चले जांए – जिप्सी आपको एकल परिवार में नहीं मिलेंगे.

जिस तरह भारत में बंजारे (जिप्सी) परिवार की तीन-चार पीढ़ियां एक ही काम से जुड़ी रहती हैं और एक साथ रहती हैं वैसे ही पूरी दुनिया में जिप्सी परिवार रहते हैं, 'घराने' बना कर.

5. धुन

क्वीन हरीश ने फ्लेमेंको संगीतकार और गायक आगुस्तिन कार्बोनेल की बातों का अनुवाद हमसे किया.

कार्बोनेल जो 'बोला' के नाम से मशहूर है उन्होंने कहा कि ये भारत में उनका पहला शो है.

25 सालों से वो “आवो नी म्हारे देस” की धुन को स्पेनिश बोल के साथ गा रहे हैं. ये धुन उन्हें विरासत में मिली है और उनके मुताबिक ये इस बात का सबूत है कि कभी इस धुन को स्पेनिश और भारतीय कलाकारों नें साथ गाया होगा.

6. कास्तानियस और खड़ ताल

फ्लेमेंको नृत्य में ताल देने के लिए 'कास्तानियस' नाम के एक वाद्य यंत्रका प्रयोग होता है जो बिल्कुल भारतीय वाद्य यंत्र 'खड़ ताल' से मिलता जुलता होता है.

क्वीन हरीश ने बताया कि स्पेनिश जिप्सी इसे तबसे इस्तेमाल कर रहे हैं जब फ़्लेमेंको संगीत अपनी शक्ल ले ही रहा था.

इन सभी समानताओं के बावजूद इन दोनों संस्कृतियों में कई ऐसी बातें है जो इन्हें जुदा करती है, लेकिन उनका जिक्र फिर कभी.

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