झारखंडः संकटों से घिरे हेमंत सोरेन क्या सरकार बचा पाएंगे?

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इमेज कॉपीरइट pti

आने वाले लोकसभा चुनाव ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की परेशानी बढ़ी दी है. सत्ता पक्ष के चार विधायक दूसरे दल में चले गए हैं.

ये चारों विधायक दलबदल क़ानून के घेरे में आ चुके हैं. 82 सदस्यों वाली (एक मनोनीत समेत) झारखंड विधानसभा में सरकार को 43 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. विपक्ष ने सरकार को अल्पमत में बताया है.

(न्यायिक हिरासत में झामुमो विधायक)

झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव का कहना है कि 16 मार्च को वे लोग राज्यपाल से मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध करेंगे. बीबीसी से उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार अल्पमत में है और असंवैधानिक तरीक़े से चल रही है. सरकार को समर्थन दे रहे चार विधायक दूसरे दलों में शामिल हो गए हैं.

इसका मतलब है कि सरकार विश्वास खो चुकी है. इस बीच विपक्षी दल आजसू के विधायक चंद्रप्रकाश चौधरी और कमलकिशोर भगत ने सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा है कि तमाम विरोधाभास के बीच चल रही सरकार अल्पमत में है.

किसने बदले दल

कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर दूबे समेत सरकार को समर्थन दे रहे दो निर्दलीय विधायक बंधु तिर्की, चमरा लिंडा तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने दूबे को धनबाद, बंधु तिर्की को रांची और चमला लिंडा को लोहरदग्गा से अपना उम्मीदवार बनाया है. इनके अलावा झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू भाजपा में शामिल हो गए हैं.

(धोनी के भाई खेलेंगे राजनीति का मैच)

भाजपा ने राजमहल से अपने वर्तमान सांसद देवीधन बेसरा का टिकट काटकर मुर्मू को उम्मीदवार बनाया है. इस बीच मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि चुनाव में ऐसा होता रहता है. अब तक किसी विधायक ने अपना इस्तीफ़ा नहीं दिया है. बहुमत साबित करने की नौबत आएगी तो सदन में वे इसे कर दिखाएंगे.

विधानसभा में सोरेन सरकार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के 18, कांग्रेस के 13, राष्ट्रीय जनता दल के पांच, मासस के एक सदस्यों के अलावा तृणमूल में शामिल होने वाले बंधु तिर्की, चमरा लिंडा समेत छह सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. यह संख्या 43 है.

सरकार का गिरना?

अगर चार विधायकों पर दलबदल क़ानून के तहत कार्रवाई हुई तो सरकार में सदस्यों की संख्या 39 हो जाएगी. विपक्षी ख़ेमे में भाजपा के 18, झारखंड विकास मोर्चा के 11, आजसू पार्टी के छह, जनता दल यूनाईटेड के दो और भाकपा माले के एक, कुल 39 सदस्य हैं.

(शाकाहारी हैं सोरेन)

एक मनोनीत विधायक भी विपक्षी ख़ेमे में हैं, जिन्हें शक्ति परीक्षण में वोट का अधिकार है. तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर दूबे का कहना है कि हेमंत सोरेन उंगली पर अपनी सरकार के दिन गिन लें. सरकार का गिरना तय है.

ग़ौरतलब है कि चंद्रशेखर दूबे को हाल ही में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ तल्ख़ टिप्पणी करने की वजह से मंत्रिमंडल से बर्ख़ास्त किया गया था. 2004 में वे धनबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीते थे. 2009 में चुनाव हारने के बाद वे विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते.

बहमुत या अल्पमत

इस बार कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी. वे इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. पूरे मामले पर विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता का कहना है कि किसी विधायक ने अपना इस्तीफ़ा नहीं दिया है फिर भी उनके संज्ञान में यह मामला है. समय पर उचित कार्रवाई होगी.

(हेमंत सोरेन ने विश्वास मत जीता)

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि दल-बदल को लेकर कोई याचिका दायर करे तो स्पीकर उस आधार पर कार्रवाई कर सकते हैं. वैसे स्पीकर स्वतः संज्ञान लेकर भी कार्रवाई कर सकते हैं. रही बात बहुमत या अल्पमत की तो यह सदन में ही तय होता है.

राज्यपाल के पास कोई लिखित देता है तो वे सरकार को सदन में बहुमत करने को कहेंगे. उनका कहना है कि दल बदल क़ानून निर्दलीयों पर भी लागू होते हैं.

चुनाव के बाद

झारखंड विधानसभा की कार्यवाहियों की लंबे समय तक कवरेज करते रहे वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्रा कहते हैं, "मौजूदा समीकरणों में हेमंत सोरेन संकटों से घिरते नज़र आ रहे हैं."

(झारखंड के नए मुख्यमंत्री बने)

"स्पीकर चाहें तो स्वतः संज्ञान लेकर दल बदलने वाले विधायकों पर दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई कर सकते हैं. विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष मृगेंद्र प्रताप सिंह ने एसे ही एक मामले में पहले कार्रवाई भी की है."

"दल बदल क़ानून कहता है कि किसी राष्ट्रीय या मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल का कोई सदस्य दूसरे दल में शामिल होता है तो विधानसभा या संसद से उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी. क़ानून के तहत निर्दलीय विधायक या सांसद निर्वाचन के छह महीने के बाद किसी दल में शामिल होते हैं तो उनकी भी सदस्यता जाएगी."

लोकसभा का चुनाव

विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी के मुताबिक़ चार विधायकों ने दल बदले हैं, ज़ाहिर है सरकार अल्पमत मे है. उनका मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद सरकार का गिरना तय है.

हेमलाल मुर्मू झारखंड मुक्ति मोर्चा में बड़े क़द के नेता माने जाते हैं. संथाल परगना में वे झामुमो को कुछ हद तक परेशान भी कर सकते हैं. साल 2004 में वे राजमहल से झामुमो के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीते थे. अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन की सरकार में वे मंत्री भी थे.

हेमलाल ने तब अपना रास्ता किनारा कर लिया जब कांग्रेस के पूर्व सांसद थॉमस हांसदा के बेटे विजय हांसदा को झामुमो ने राजमहल से उम्मीदवार बनाया. हाल ही में शिबू सोरेन के भाई लालू सोरेन भी तृणमूल में शामिल हो गए हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार