मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने पर लगी मोहर

नरेंद्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी इमेज कॉपीरइट AFP

भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश में वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे. वाराणसी से मौजूदा सांसद मुरली मनोहर जोशी को कानपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा गया है.

संकेत मिल रहे थे कि मुरली मनोहर जोशी वाराणसी की सीट छोड़ना नहीं चाहते थे. लेकिन उन्हें अपनी सीट नरेंद्र मोदी के लिए छोड़नी ही पड़ी.

इस बारे में पूछे जाने पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहनवाज़ हुसैन ने बीबीसी को बताया, ''जोशी जी बड़े ख़ुश हैं. वह हमारे बड़े नेता हैं. नरेंद्र भाई उनकी सीट से लड़ें, इसका ख़ुद उन्होंने स्वागत किया है.''

लेकिन असल सवाल यह है कि वाराणसी से नरेंद्र मोदी को चुनाव लड़ाने से भारतीय जनता पार्टी को कितना फ़ायदा हो सकता है?

इस बारे में शहनवाज़ हुसैन कहते हैं, ''इससे पूरे उत्तर भारत में पार्टी को लाभ होगा. लोगों में बड़ा उत्साह है. अटल जी जब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होते थे और लखनऊ से लड़ते थे, उसका भी हमें बहुत फ़ायदा मिलता था.''

केजरीवाल और वाराणसी

दिल्ली विधानसभा चुनावों से भारतीय राजनीति में ज़ोरदार दस्तक देने वाले आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद के बारे में कहा जाता रहा है कि उन्हें नरेंद्र मोदी जैसे किसी बड़े नेता के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ना चाहिये.

अब जबकि मोदी का वाराणसी से चुनाव लड़ना तय हो गया है, क्या केजरीवाल वाराणसी से चुनाव लड़ना पसंद करेंगे?

इस सवाल पर केजरीवाल ने बंगलोर में स्थानीय संवाददाता इमरान क़ुरैशी से कहा, ''मोदी के ख़िलाफ़ वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने के बारे में अभी तक कोई तय नहीं किया है.''

राजनाथ सिंह और लखनऊ

वहीं पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपनी ग़ाज़ियाबाद सीट छोड़कर लखनऊ से चुनाव लड़ रहे हैं जहां उनका मुक़ाबला कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी से होगा.

सवाल यह है कि क्या राजनाथ सिंह को ग़ाज़ियाबाद से दोबारा चुनाव जीतने का भरोसा नहीं है?

इस बारे में शहनवाज़ हुसैन कहते हैं, ''राजनाथ सिंह इसके लिए तैयार नहीं नहीं थे लेकिन पार्टी का प्रस्ताव मानकर लखनऊ से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गए. ग़ाज़ियाबाद के लोगों की उन्होंने पूरी ख़िदमत की है.''

लेकिन वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा इसकी दूसरी वजह बताते हैं.

उनका कहना है, ''आम आदमी पार्टी का प्रभाव ग़ाज़ियाबाद में ज़्यादा है. लखनऊ में उसका उतना असर नहीं है. राजनाथ सिंह यह बात जानते हैं. अटल बिहारी वाजपेयी की सीट होने की वजह लखनऊ का महत्व ग़ाज़ियाबाद से अधिक है. राजनाथ सिंह को लगता है कि लखनऊ के रास्ते पार्टी में उनका क़द थोड़ा और बढ़ जाएगा.''

लखनऊ से पिछला लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के ही लालजी टंडन ने जीता था.

इसके अलावा, मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को झांसी से टिकट दिया गया है जहां पिछला लोकसभा चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी ने जीता था.

सिद्धू की सीट जेटली को

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली पंजाब में अमृतसर से चुनाव लड़ेंगे जहां से पिछला चुनाव भारतीय जनता पार्टी के ही नवजोत सिंह सिद्धू ने जीता था.

वहीं चंडीगढ़ से कांग्रेस के मौजूदा सांसद पवन कुमार बंसल के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी ने जानीमानी अदाकारा किरण खेर को मैदान में उतारा है.

उधर बिहार में पटना साहिब की सीट पर बीजेपी ने मौजूदा सांसद शत्रुध्न सिन्हा को एक बार फिर टिकट दिया है.

चुनाव के संदर्भ में उम्मीदवारों को लेकर भारतीय जनता पार्टी चुनाव समिति की यह चौथी बैठक थी जिसमें कुल 12 राज्यों के लिए लोकसभा उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है.

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